सोमवार, 22 अगस्त 2011

उम्मीद की लौ


अब संसद के पीछे

छिपने लगे है नेता

और जनता सड़क पर

उतर गयी है


१२० करोड़ जनता नें

तय कर लिया है

कि वे जगाकर रहेंगे ५४५

सोये हुए लोगों को


अन्ना का

स्वास्थ्य गिर रहा है

गिर रही है सरकार की

लोकप्रियता भी


हे ईश्वर

सलामत रखना

अन्ना को और उनके

स्वास्थ्य को भी


क्योंकि उन्होंने

जनता के मन में

उम्मीद की लौ
जला दी है

शनिवार, 20 अगस्त 2011

स्विस बैंक तथा अन्य बैंकों में जमा भारतियों के काले धन की सूची

स्विस बैंक तथा अन्य बैंकों में जमा भारतियों के काले धन की सूची जुलियस अन्साजे नें अपने वेब साईट विकीलीक्स के माध्यम से दिनांक ०२/०८/२०११ को जारी की है। इस् सूची की जानकारी हमें न्यूज़ ऑफ़ डेल्ही डाट काम पर मिली। इसे आप भी देखें और अपनी टिप्पणी से हमें अवगत कराएँ।





शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

यह परिवर्तन की लहर है...

यह परिवर्तन की लहर है। आजादी की दुसरी लड़ाई है। अहिंसा से क्रांति पुरी होकर रहेगी। क्रांति कैसी होती है, नौजवानों ने दिखा दिया है । शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलकर लोग यूं ही साथ देते रहें। उपवास से मेरा वजन घट रहा है मगर युवा शक्ति देखकर उतनी ही उर्जा भी मिल रही है। हम सबको सुखद भविष्य के सपने पूरे करने हैं । जीत हमारी ही होगी । भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सभी को कमर कसनी है । तभी हम मंजिल तक पहुंचेगें ।


अन्ना








गुरुवार, 18 अगस्त 2011

भ्रष्टाचार ख़त्म हो अड़ा है आदमी

सत्ता की जिद्द से
लड़ा है आदमी
जीत के मुहाने पर
खड़ा है आदमी

यह देश आज मांगता है
आपसे समर्थन
देखो नया इतिहास
गढ़ा है आदमी

यह जता दिया है
अन्ना के अनसन नें
सांसद, सरकार से
बड़ा है आदमी

जनता की जीत हो
इस जनांदोलन में
स्वेक्षा से कूद
पड़ा है आदमी

चाहे इंडिया गेट हो या
हो तिहाड़ जेल
अहिंसा का पाठ
पढ़ा है आदमी

शहर-२ से कर रहा है
दिल्ली को कूच
तिरंगा लहराकर
बढ़ा है आदमी

युवा चल दिया है आज
बापू की राह
भ्रष्टाचार खत्म हो
अड़ा है आदमी

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

इस देश को बचाना है

एलाने-जंग हो गया
मोह भंग हो गया

अब जंग भ्रष्टाचार से
केंद्र की सरकार से

यह पुनीत कार्य है
क्या तुम्हे स्वीकार्य है

राष्ट्र की पुकार सुन
अन्ना की हुंकार सुन

अमर सपूत हो अगर
उठो चलो धरो डगर

मां भारती का कर्ज है
हम सबका यही फर्ज है

इस देश को बचना है
जेल में भी जाना है

सोमवार, 15 अगस्त 2011

दिल्ली की सरकार संभल जा

दिल्ली की सरकार संभल जा
वो गांधी का अनुयायी है

कहते है सब अन्ना उसको
वह देश का बड़ा भाई है

तन मन धन सब दान दिया
भारत माता का लाल है वो

मानो मांग जनलोकपाल की
वर्ना फिर महा काल है वो

अनसन पर गर बैठ गया तो
समझो शामत आ जायेगी

और महंगा होगा जेल भेजना
दिल्ली की सत्ता जायेगी

मत करो उपेक्षा जनहित की
अब अपना मुह मत मोड़ो

जनअधिकारों को मान्य करो
आसुरी प्रवित्ति छोडो

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

रक्षा करो अन्नदाता की

अरे किसान की कौन सुने
सत्ता का खेल जारी है

जंगल जमीन सब छीन रहे
अब पानी की बारी है

सुन सकते हो लालबहादुर
क्या हुआ तुम्हारा नारा

जो अधिकारों की मांग करे
वो मारा जाय बेचारा

पुलिस कर रही हत्याएं
और सरकारें सोती हैं

आह, चार को मार दिए
भारत माता भी रोती हैं

वो किसान हैं कहाँ जांय
क्या करें तुम्ही बतलाओं

रक्षा करो अन्नदाता की
स्वर्ग से वापस आओ