<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751</id><updated>2012-02-04T03:42:08.157-08:00</updated><title type='text'>मानव अधिकार संबंधी लेख</title><subtitle type='html'>इस् ब्लॉग के माध्यम से मैं कोशिश करूँगा कि एकत्र किए गये आलेखों से लोगों के समक्ष मानव अधिकारों से जुड़ी हुई बातें एवं हनन के मामलों को ला सकूं</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>77</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-3393398676254899599</id><published>2011-11-26T01:31:00.000-08:00</published><updated>2011-11-26T01:31:14.421-08:00</updated><title type='text'>मनमोहन सरकार का जनविरोधी फैसला</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; text-align: justify;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-EOx3krygPvg/TtCxoV_UGgI/AAAAAAAAAQc/VdbOsUkcw0A/s1600/india.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" hda="true" height="240" src="http://1.bp.blogspot.com/-EOx3krygPvg/TtCxoV_UGgI/AAAAAAAAAQc/VdbOsUkcw0A/s400/india.jpg" width="400" /&gt;&lt;/a&gt;भारत में पिछले दो सालों से जब लगातार खाद्य पदार्थों के दाम बढाये जा रहे थे तब भी शायद कुछ लोगों को मालूम था कि रणनीतिक रूप से नए-नए कीर्तिमान स्थापित करती इस कृत्रिम महंगाई के पीछे कौन है. देश के आम जन के सामने इसका खुलासा २४/११/२०११ गुरुवार रात ९. बजे उस समय हो गया जब खबर आयी कि सरकार में बैठे लोगों नें एक खतरनाक और जन विरोधी फैसला ले लिया है. गुरुवार को भारत के खुदरा बाजार में एफडीआई को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई. कैबिनेट के इस फैसले नें खुदरा बाजार में विदेशी कंपनियों को मल्टी ब्रांड रिटेल में ५१ % की हिस्सेदारी और सिंगल ब्रांड रिटेल में १००% हिस्सेदारी के लिए छूट दे दी. इसी के साथ वर्षों से भारत के इस सघन खुदरा बाजार पर गिद्ध दृष्टी गडाए वालमार्ट (अमेरिका) केयरफोर (फ्रांस), टेस्को (ब्रिटेन) व मेट्रो (जर्मनी) जैसी विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत में अपने मेगा रिटेल स्टोर श्रृंखला खोलने के रास्ते खुल गए.&lt;/div&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वैसे तो मनमोहन सरकार नें वर्ष २००६ में ही एक ‘प्रेसनोट’ जारी कर निम्नलिखित शर्तों के साथ ‘सिंगल ब्रांड’ उत्पादों के खुदरा बाजार में ५१% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत दे दी थी जिसमें कहा गया था कि (१) बिक्रय उत्पाद केवल सिंगल ब्राण्ड होना चाहिए, (२) उत्पादों को अन्तर्राष्ट्रीय पैमाने पर उसी ब्राण्ड के तहत बेचा जाना चाहिए, (३) सिंगल ब्राण्ड उत्पाद रिटेलिंग में केवल वे ही उत्पाद शामिल होंगे, जिन्हें निर्माण के दौरान ही ब्राण्डेड किये जाते हैं. और अब कैबिनेट द्वारा एफडीआई को दी गई मंजूरी के नोट में खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए निम्नलिखित शर्तों को शामिल किया है वे हैं (१) विदेशी कंपनियों के निवेश का ५० फीसदी आधारभूत सरंचना जैसे कोल्ड स्टोरेज, स्टोर जैसे इंतजामों पर खर्च करना होगा. (२) ३० फीसदी खरीददारी छोटे और मझौले आकार के उद्योगों से होगी. (३) १० लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में ही ऐसे स्टोर खोले जाएंगे.(४) ब्रांडेड और गैर ब्रांड की चीजों की भी बिक्री करनी होगी.(५) एक प्रोजेक्ट में कम से कम ५०० करोड़ रुपये का निवेश करना होगा.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सरकार के इस फैसले के साथ एक सवाल उभरता है कि उन करोड़ों खुदरा व्यापारियों का क्या होगा जो अपनी छोटी-छोटी पूंजी के साथ किराना का व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहें है. एफडीआई के माध्यम से इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भारतीय बाजारों में प्रवेश कराकर चाहे भारत सरकार जितने भी सब्जबाग दिखाये, खुदरा व्यापार में भीमकाय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश से हमारे देश के आतंरिक व्यापार, बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था के ताने-बाने को गंभीर खतरा पैदा हो जायेगा. बताते है कि भारतीय बाजार में मोनसेंटो नें पिछले ५ वर्षों में किसानों के उपयोग के लिए कीटनाशक और सीड्स बेच कर ५०० गुना मुनाफा कमाया है और वही पिछले ५ वर्षों में देश में ५५ हजार किसानों नें आत्महत्या की. मनमोहन सरकार द्वारा इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारतीय खुदरा बाजार के दरवाजे खोलने के उतावलेपन के बरक्स देखा जाय तो किसानों और कृषि के लिए हमारी सरकार की नीति क्या है ? देश में किसानों से उनकी जमीनें छिनी जा रही है आंकड़े बताते है कि एसीजेड और विकास के नाम पर किसानों से अब तक १०% उपजाऊ जमीन छीन ली गई है ऊपर से तुर्रा यह कि इससे किसानों को फायदा होगा. किसानों और कृषि नीति पर सरकार की अनदेखी किसी से छिपी नहीं है. किसानों द्वारा लगातार की जा रही आत्महत्या इसका ज्वलंत उदाहरण है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;यहाँ करीब डेढ़ दशक पहले की पंजाब की उस घटना की चर्चा जरूरी है जब पंजाब सरकार ने एक विदेशी कंपनी से समझौते के बाद राज्य के किसानों को टमाटर बोने के लिए प्रोत्साहित किया था. उस समय कंपनी ने वादा किया था कि वह किसानों से उचित मूल्य पर टमाटर खऱीदेगी और अपनी प्रोसेसिंग यूनिट में उससे केचप और दूसरी चीजें तैयार करेगी, लेकिन जब टमाटर का रिकार्ड उत्पादन होने लगा तो कंपनी तीस पैसे प्रति किलो की दर से टमाटर मांगने लगी. जिससे क्रुद्ध होकर किसानों ने कंपनी को टमाटर बेचने की बजाय सड़कों पर ही फैला दिए थे यानी किसानों को वाजिब हक कहां मिल पाया था. किसानों और उपभोक्ताओं को फायदा होने का तर्क देने वाले भूल जाते हैं कि देश में जिन करोड़ों लोगों की जीविका गली-मुहल्ले में रेहड़ी-पटरी लगाकर सब्जी-भाजी बेचकर चलती है या गली के मुहाने की दुकान के सहारे रोजी-रोटी चल रही है, रिटेल चेन बढ़ने के बाद उन ४.५ से ५ करोड लोगों का क्या होगा. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मनमोहन जी आपके इमानदारी और काबिलियत पर मुग्ध होकर आपको इस देश नें बहुत कुछ दिया है आपसे लिया कुछ नहीं. आप पर भरोसा कर इस देश नें आपको रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया, विदेशी संस्थानों में आपको सम्मानित पदों पर बिठाया, आपके अर्थशास्त्रिय ज्ञान पर भरोसा करते हुए वित्त मंत्रालय की बागडोर दी, और अंततः इस देश के सर्वोच्च पद पर आपको पदासीन किया किन्तु आपने इस देश को क्या दिया. आपने इस देश को पूंजीवाद के अंधे कुंए में धकेलने की कोशिश की, आपने अपने कैबिनेट के लुटेरे सहयोगियों को भ्रष्टाचार के बड़े बड़े कीर्तिमान कायम करने की खुली छूट दी, आपने महंगाई को चरम पर पहुंचाया, आप लगातार देश के आम आदमी और गरीबों की उपेक्षा करते हुए धन पिपासुओं और पूंजीपतियों के हक में तमाम फैसले लेते रहे. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;लेकिन अब खुदरा बाजार में एफडीआई को कैबिनेट की मंजूरी दिलवाने और उसे लागू करने के आपके फैसले के कारण इस देश की ३३% आबादी जिसका जीवन यापन इसी खुदरा कारोबार के भरोसे है, बुरी तरह प्रभावित होगी क्योकि इस खुदरा कारोबार में ४.५ से ५ करोड लोग प्रत्यक्ष रूप से, १० करोड लोग अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है और इसी खुदरा कारोबार के वजह से ४० करोड लोगों का जीवन यापन हो रहा है. इन सभी से इनका रोजगार बहुराष्ट्रीय कंपनियां एक झटके में छीन लेंगी और ये बेरोजगारी के शिकार होकर भुखमरी के कगार पर पहुंच जायेंगे. इसलिए मनमोहन सिंह जी आपको समझना चाहिए कि यह युद्ध-अपराध से भी बड़ा अपराध है. आपके इस जनविरोधी फैसले को यह देश कभी माफ नहीं करेगा और जब कभी इतिहास में आपको याद किया जायेगा तो “पूंजीवाद के दलाल” के रूप में ही याद किया जायेगा देश के एक सम्मानित नेता के रूप में नहीं. मनमोहन सिंह अगर देश के प्रधानमंत्री के रूप में आम आदमी के भले के लिए नहीं सोच सकते तो कम से कम राजनीतिक रूप से कांग्रेस के भले के लिेए तो सोचें ही क्योंकि इसका सबसे अधिक राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को होगा.&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-3393398676254899599?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/3393398676254899599/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=3393398676254899599&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3393398676254899599'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3393398676254899599'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/11/blog-post.html' title='मनमोहन सरकार का जनविरोधी फैसला'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-EOx3krygPvg/TtCxoV_UGgI/AAAAAAAAAQc/VdbOsUkcw0A/s72-c/india.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7155765867219356952</id><published>2011-10-17T07:34:00.000-07:00</published><updated>2011-10-17T07:46:22.335-07:00</updated><title type='text'>सूचना अधिकार कानून को कमजोर करने की कयावद</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-e5IyG1EGTBs/Tpw8zdXyVtI/AAAAAAAAAO0/Jc_CIFaRtyc/s1600/RTI_809428f.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="267" oda="true" src="http://2.bp.blogspot.com/-e5IyG1EGTBs/Tpw8zdXyVtI/AAAAAAAAAO0/Jc_CIFaRtyc/s400/RTI_809428f.jpg" width="400" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;देश के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह चाहते है कि सूचना के अधिकार कानून और इसके दायरे पर पुनर्विचार हो. श्री सिंह नें यह बात केन्द्रीय सूचना आयुक्तों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस कानून का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि सरकार में विचार विमर्श की प्रक्रिया पर इसका कोई उल्टा असर हो या इससे ईमानदार और सही ढंग से काम करने वाले लोग अपनी बात से हतोत्साहित हों हालाँकि अपनें संबोधन में उन्होंने यह भी जोड़ा कि , "हम प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए सूचना के अधिकार को और ज़्यादा प्रभावी बनाना चाहते हैं." साथ में उन्होंने यह भी कहा कि निर्धारित समय में सूचना जारी करने और सार्वजनिक कार्यों में लगे अधिकारियों को मुहैया संसाधनों के बीच एक संतुलन बनाना ज़रूरी है. सवालों के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि "सूचना के अधिकार से सरकार में विचार-विमर्श की प्रक्रिया पर उल्टा असर नहीं होना चाहिए. हमें इसे आलोचनात्मक दृष्टि से देखना होगा. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार यह ऐसी चिंताएँ हैं जिस पर चर्चा होनी चाहिए और जिसका निबटारा किया जाना चाहिए." उन्होंने सूचना के अधिकार कार्यकर्ताओं के सुरक्षा से संबंधित विधेयक को अगले कुछ महीने में लाने की बात कही इस तरह लोक प्रशासन में गड़बड़ियाँ करने वालों को सामने लाने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध हिंसा रोकने में आसानी होगी. प्रधानमंत्री का कहना है कि, "सूचना के अधिकार से जिन विभागों को अलग रखा गया है उन पर भी फिर से विचार करने की ज़रूरत है जिससे ये देखा जा सके कि वो व्यापक हित में हैं या उसमें बदलाव करना चाहिए." उन्होंने कहा कि 'निजता से जुड़े मुद्दों' पर विचार होना चाहिए. डॉ मनमोहन सिंह के इन वक्तव्यों से पता चलता है कि सूचना के अधिकार कानून से सरकार कहीं न कहीं त्रस्त जरूर है. और सूचना के अधिकार कानून की आलोचनात्मक दृष्टि से समीक्षा करके उसे कमजोर करना चाहती हैं. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आपको याद होगा तो बता दें कि सूचना के अधिकार कानून के माध्यम से विवेक गर्ग नें प्रधानमंत्री कार्यालय से एक चिट्ठी प्राप्त किया था. जो कि 2जी स्पेक्ट्रम पर केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री को भेजी गई थी इस चिट्ठी को वित्तमंत्री श्री प्रणव मुखर्जी की जानकारी में उनके मंत्रालय नें लिखा था. उस पत्र में प्रधानमंत्री को जानकारी दी गई थी कि 30 जनवरी 2008 को तत्कालीन संचारमंत्री ए. राजा से मीटिंग के दौरान तत्कालीन वित्तमंत्री श्री पी. चिदंबरम नें पुरानी दरों पर स्पेक्ट्रम की नीलामी की इजाजत दी. जबकि स्पेक्ट्रम की नीलामी ज्यादा कींमत पर की जा सकती थी. दरसल वित्तमंत्रालय के अधिकारियों नें ग्रोथ के अनुपात में फीस तय करने की बात की थी. मंत्रालय 4.4 मेगाहड्स से ऊपर के स्पेक्ट्रम बाजार भाव से बेचना चाहता था किन्तु ए. राजा इससे सहमत नहीं थे और उन्होंने स्पेक्ट्रम की सीमा 6.2 मेगाहड्स कर दी और तत्कालीन वित्तमंत्री श्री पी. चिदंबरम उस पर मान गए. वित्तमंत्री श्री प्रणव मुखर्जी की चिट्ठी में प्रधानमंत्री को यह बताया गया था कि अगर श्री पी. चिदंबरम चाहते तो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को अपने अंजाम तक पहुंचने से रोका जा सकता था &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इस चिट्ठी को लेकर श्री प्रणव मुखर्जी एवं श्री पी. चिदंबरम में काफी तनातनी देखने को मिली थी. जब इस चिट्ठी को लेकर कांग्रेस में घमासान चल रहा था ठीक उस समय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री श्री प्रणव मुखर्जी अमेरिका की यात्रा पर थे वहां से वापस आने पर मनमोहन सिंह ने 2जी मसले पर आरोपों से घिरे पी चिदंबरम के साथ प्रणव मुखर्जी के साथ प्रधानमंत्री आवास पर बैठक की. प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद प्रणब और चिदंबरम मे प्रेस को साझा नोट पढ़कर सुनाया गया इस नोट में प्रणब की तरफ से कहा गया कि 2जी मामले के बारे में उनके राय निजी नहीं हैं. उस समय प्रणब मुखर्जी ने चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि 2008 में जो टेलीकॉम पॉलिसी सरकार ने अपनाई वो 2003 की ही पॉलिसी है जिसे एनडीए सरकार ने लाया था. प्रणब के इस बयान को पी चिदंबरम ने सहमति दिखाते हुए कहा था कि यह संकट अब टल गया है. इस पूरे मामले में कांग्रेस और सरकार की काफी किरकिरी हुई और यह सब आरटीआई के तहत विवेक गर्ग द्वारा पीएमओ से प्राप्त किये गए उस पत्र के कारण हुई थी जिसे वित्तमंत्री श्री प्रणव मुखर्जी के मंत्रालय नें प्रधानमंत्री को भेजा था.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;लेकिन लगता है कि सरकार द्वारा इस कानून में संशोधन कर इसे कमजोर करने की पृष्ठभूमि तैयार की जाने लगी है इसी क्रम में शुक्रवार को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा सूचना के अधिकार कानून के विषय में दिए गए वक्तव्य को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि सूचना के अधिकार कानून के माध्यम से पीएमओ से निकले वित्तमंत्रालय का पत्र जिसके कारण सरकार की किरकिरी हुई के आलावा एक से बढ़कर एक कामनवेल्थ से लेकर २जी स्पेक्ट्रम सरीखे घोटालों का लगातार खुलासा सूचना के अधिकार कानून की मदद हो रहा है. दरअसल सूचना के अधिकार अधिनियम को लागू हुए छ: साल हो गए और अब सरकार को इस कानून से रोजमर्रा के राजकाज में बड़ी बाधा का सामना करना पड रहा है. कानून लागू होने से लेकर लगभग चार सालों तक सरकार को फायदा हुआ. क्योंकि कानून के लागू होने के बाद से जनमत यह बना कि एक जवाबदेह सरकार अपने रोजमर्रा के राजकाज में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है. किन्तु दिल्ली में हुए कामनवेल्थ खेलों के लिए कराए गए निर्माणकार्य तथा खरीद पर हुए घोटाला एवं २जी स्पेक्ट्रम सरीखे घोटालों का खुलासा जब सूचना के अधिकार कानून के माध्यम से होने लगा तो तभी से सरकार इस कानून को लेकर सकते में है. इन खुलासों से घबरायी सरकार सूचना के अधिकार कानून का पर कतरना चाहती है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सूचना का अधि‍कार कानून देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक सशक्त हथियार के रूप में तब प्राप्त हुआ जब संसद द्वारा सूचना का अधि‍कार अधि‍नि‍यम, 2005 पारि‍त कि‍या गया. और 15 जून, 2005 माननीय राष्ट्र पति‍ जी से सूचना का अधि‍कार कानून को स्वीकृति‍ प्राप्त हुई. अधि‍नि‍यम का&amp;nbsp;&lt;span lang="HI" style="color: #333333; font-family: Mangal; line-height: 115%; mso-ansi-font-size: 11.0pt; mso-ansi-language: EN-US; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-bidi-language: HI; mso-fareast-font-family: Calibri; mso-fareast-language: EN-US; mso-fareast-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin;"&gt;&lt;span style="color: black;"&gt;उद्देश्य&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&amp;nbsp;प्रत्येक सार्वजनि‍क अधि‍करण, केन्द्रीय सूचना आयोग और &lt;span lang="HI" style="color: #333333; font-family: Mangal; line-height: 115%; mso-ansi-font-size: 11.0pt; mso-ansi-language: EN-US; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-bidi-language: HI; mso-fareast-font-family: Calibri; mso-fareast-language: EN-US; mso-fareast-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin;"&gt;&lt;span style="color: black;"&gt;राज्य&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; सूचना आयोग के गठन और उनसे संबद्ध या उनसे अनुषांगि‍क मामलों के कार्यों में पारदर्शि‍ता और जि‍म्मेदारी में संवर्धन करने के लि‍ए सार्वजनि‍क अधि‍करणों के नि‍यंत्रण के अंतर्गत नागरि‍कों को सूचना प्राप्ति सुनि‍श्चित करने के लि‍ए सूचना के अधि‍कार का व्यवहारि‍क वि‍धान स्थापि‍त कि‍ये जाने का प्रावधान किया गया. यह अधि‍नि‍यम जम्मू‍ एवं कश्मीयर राज्य को छोड़कर समस्तथ भारत में लागू है. समस्त अधि‍नि‍यम 12 अक्तूबर, 2005 से लागू होता है उक्त अधि‍नि‍यम के प्रावधान के अंतर्गत रा.स.वि.नि. सार्वजनि‍क अधि‍करण होने के नाते अधि‍नि‍यम के भाग 4(1) (ख) के अंतर्गत यथापेक्षि‍त वि‍शि‍ष्ट जानकारी प्रकाशि‍त कि‍ये जाने का दायि‍त्वा है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अन्ना के जन लोकपाल से संबंधित आंदोलन को अलग करदें तो भारत में वास्तविक जमीनी और दूरदर्शी स्वतः स्फूर्त जनांदोलनों का अभाव है जो कि पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए उत्पन्न हुये हों. आजादी के बाद से साल दर साल भारत का आम आदमी लगातार कमजोर हुआ है और भारतीय व्यवस्था तंत्र अधिक अमानवीय, असामाजिक तथा गैर जवाबदेह होता जा रहा है. ऐसी कमजोर हालत में सूचना के अधिकार जैसे कानून को जिस गंभीरता और दूरदर्शिता से संभालते और मजबूत करते जाने की अहम जरूरत थी, जिससे कि समय के साथ साथ धीरे धीरे इसी कानून से और भी बड़े तरीके विकसित करके सत्तातंत्रों को आम आदमी के प्रति जिम्मेदार बनने को विवश करके लोकतंत्र और स्वतंत्रता के मूल्यों को संविधान के पन्नों में छापते रहने की बजाय यथार्थ में और जमीनी धरातल पर जीवंत उतार कर ले आया जाता. अब अगर प्रधानमंत्री सूचना के अधिकार कानून को हतोत्साहित कर रहे है तो इसमें कोई बड़ी बात नही क्योकि आजादी के बाद से ही हमारी सरकारें और अफसरशाही ने जरुरत से अधिक अधिकार पाये और वे खुद को मालिक और जनता को गुलाम माना, तो यदि आज आम जनता उनसे कुछ पूछे तो यह बात सरकार और अफसरशाही को कैसे बर्दाश्त होगी. इससे उनकी ‘निजता से जुड़े मुद्दों' पर सवाल जो खड़े होंगे? अतः यदि नेता व अफसर इस कानून को नुकसान पहुंचाते हैं या हतोत्साहित करते हैं तो यह कोई अचरज वाली बात नहीं क्योकि देश की आम जनता को मजबूत न होने देना और खुद को आम जनता का मालिक बनाये रखने के लिये तरह-तरह के हथकंडे अपनाना तो इनके मूल चरित्र में है.&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7155765867219356952?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7155765867219356952/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7155765867219356952&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7155765867219356952'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7155765867219356952'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/10/blog-post_7134.html' title='सूचना अधिकार कानून को कमजोर करने की कयावद'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-e5IyG1EGTBs/Tpw8zdXyVtI/AAAAAAAAAO0/Jc_CIFaRtyc/s72-c/RTI_809428f.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-6387819688377862678</id><published>2011-10-17T07:18:00.000-07:00</published><updated>2011-10-17T07:18:38.748-07:00</updated><title type='text'>चरम पर चरमराता मनमोहन का पूंजीवाद</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-L8ughkh6UyU/Tpw5IAUfR2I/AAAAAAAAAOs/MoFqswyQWLk/s1600/manmohan_pm_1_625212906.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="272" oda="true" src="http://1.bp.blogspot.com/-L8ughkh6UyU/Tpw5IAUfR2I/AAAAAAAAAOs/MoFqswyQWLk/s400/manmohan_pm_1_625212906.jpg" width="400" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;दास्तोएव्स्की की डायरी ( द डायरी ऑफ ए राइटर) में उसनें पश्चिमी पूंजीवाद के बारे में टिप्पणी करते हुए लिखा है कि “हमारी सदी में एक भयानक क्रांति हुई इसमें बुर्जुआ वर्ग (पूंजीवादी वर्ग) विजयी हुआ. बुर्जुआ वर्ग (पूंजीवादी वर्ग) के उदय के साथ-साथ वहां भयानक शहर बनें जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था. इन शहरों में आलीशान महल थे, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियां थी, बैंक, बजट, प्रदूषित नदियाँ (नालों के रूप में) रेलवे प्लेटफार्म और कई तरह की संस्थाएं थी और इनके चारों ओर थे कारखानें. लेकिन इस समय लोग एक तीसरे चरण की प्रतीक्षा कर रहे है जिसमें बुर्जुआ वर्ग (पूजीवादी वर्ग) का अंत होगा, आम जनता जागेगी और वह सारी भूमी को कम्यूनों में वितरित करके बाग-बगीचों में रहने लगेगी. बाग-बगीचे ही नई सभ्यता को लायेंगे. जिस प्रकार सामंती युग के किलों की जगह शहरों ने ले ली उसी तरह शहरों की जगह बाग-बगीचे ले लेंगे यही सभ्यता के विकास की दिशा होगी. क्या दास्तोएव्स्की की पूंजीवाद के बारे में की गई टिप्पणी को पूंजीवाद पर गहराता मौजूदा संकट सच की तरफ ले जाता नहीं दिख रहा है?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;हम कुछ सिद्धांतों से पूंजीवाद के इतिहास में घटित संकटों को समझाने की कोशिश करते है. इनमें से एक आपदा सिद्धांत है, इस सिद्धांत के तहत मानता है कि जिस समय पूंजीवाद के विरोधाभास अपने उच्चतम बिंदु पर पहुंचेंगें, पूंजीवाद स्वयं ढह जाएगा और स्वर्ग की एक नई सहस्राब्दी के लिए रास्ता बनाएगा. इस सर्वनाशवादी या अति अराजकतावादी विचार ने पूंजीवादी उत्पीड़न और शोषण से सर्वहारा की पीड़ा को समझने की राह में भ्रम तथा गलतफहमियां पैदा की हैं. बहुत से लोग इस तरह के एक गैर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संक्रमित हुए हैं. एक और सिद्धांत है आशावाद, जिसे पूँजीपति वर्ग हमेशा समाज को अपना उपभोक्ता बनाते हुए उसमें फैलाता है. इस सिद्धांत के अनुसार, पूँजीवाद में अपने विरोधाभासों से उबरने के साधन मौजूद हैं और असल अर्थव्यवस्था सट्टेबाज़ी को नष्ट करके ठीक काम करती है. पूंजीवादी प्रतियोगिता की पद्धति की अराजकता पूंजीवादी संकट का एक अन्य कारण है. यह केवल आभासी वक्तव्य नहीं बल्कि चरितार्थ होता दिख रहा है कि पूंजीवाद पतन पर है यह आकस्मिक विनाश की ओर नहीं बल्कि व्यवस्था के एक नए पतन, पूंजीवाद के अंत होते इतिहास की आखिरी मंजिल की ओर बढ़ रहा है. यह केवल और केवल पूंजीवाद की देन है कि रोज़ दुनिया में एक लाख लोग भूख से मरते हैं, हर 5 सेकण्ड में पांच साल का एक बच्चा भूख से मर जाता है. 84 करोड लोग स्थायी कुपोषण के शिकार हैं और विश्व की 600 करोड की आबादी का एक तिहाई हर रोज़ बढ़ती कीमतों के चलते जीने के लिए संघर्ष कर रहा है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;दुनिया के दखते-देखते ३०-४० सालों में पूंजीवाद अपने चरम पर पहुंच गया. कहते है कि कोई जब अपने अंतिम चरम पर पहुंच जाता है तो उसके सामने ढलान की तरफ धीरे-धीरे आने के आलावा एक रास्ता और बचता है कि बिना किसी सहारे के तेजी से निचे आते हुए अपने आप को ध्वस्त कर ले. क्या पूंजीवाद की स्थिती इससे अलग है? क्या कोई इस बात से इंकार कर सकता है कि पूंजीवाद मौजूदा समय में गहरे संकट में है. दरअसल पूंजीवाद की इस विफलता की की हकीकत को समझने के लिए हमें पूंजीवाद के दो मुख्य सिद्धांतों को समझना होगा जिसमें पहला “मनुष्य अक्लमंद होते हैं, और बाजार का बर्ताव दोषपूर्ण” दूसरा “बाजार स्वयं अपने दाम निर्धारित करता है” पूंजीवाद के ये दोनों सिद्धांत ही गलत हैं. ओईसीडी के महासचिव खोसे अंखेल गूरिया अभी हाल ही में पूंजीवादी व्यवस्था के फेल हो जाने संबंधी कुछ बातों को स्वीकार करते हुए कहा है कि “मुझे लगता है कि नियामक के तौर पर हम असफल रहे, निरीक्षक के तौर पर असफल रहे और कार्पोरेट व्यवस्थापक के तौर पर असफल रहे, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की भूमिका और जिम्मेदारियां बाटनें में भी हम असफल रहे, हमारी वित्तीय असफलता तुरंत ही असल अर्थ व्यवस्था में फ़ैल गई, वित्तीय संकट से हम सीधे आर्थिक अपंगता और उसके बाद सीधे बेरोज़गारी के संकट तक पहुँच गए हैं.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;पूंजीवाद के पैरोंकारों की इस स्वीकारोक्ति से क्या हमारे अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री को कुछ सीख लेनी चाहिए या फिर वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ की नीतियों का अंधानुकरण ? दरसल देश का आम आदमी वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ द्वारा निर्देशित और बहुप्रचारित मौजूदा मनमोहनोंमिक्स अर्थनीति के पेचीदगियों से नावाकिफ है. उसे न केवल महंगाई, बेकारी, भ्रष्टाचार, आदि से निजाद चाहिए बल्कि उसे चाहिए पर्याप्त भोजन, आवास, चिकित्सा और शिक्षा. उसे मनमोहनोंमिक्स के भौतिक विकास से भी शायद कोई मतलब नहीं है. नब्बे के दशक में इक्कीसवी सदी के आगमन का हवाला देते हुए जिस वैश्वीकरण उदारीकरण और निजीकरण को अपनाया गया और इसके विषय में देश की आम जनता को चिकनी-चुपड़ी बातों से बरगलाते हुए वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ की नीतियों को जबरन थोपा गया तथा वैश्वीकरण उदारीकरण और निजीकरण के फायदे गिनाते हुए इसकी शान में जो कसीदे पढे गए. मॉरिशस ट्रीटी के रास्ते आवारा पूंजी के आगमन के साथ देश में विकृत विकास कार्यों की झड़ी लगाई गई. कहा जाने लगा कि मनमोहन के आर्थिक नीतियों के मद्देनजर भारत का कायाकल्प हो रहा है. मॉरिशस तथा अन्य रास्तों से देश में आयी आवारा पूंजी के बल पर फिजूलखर्ची के बड़े-बड़े रिकार्ड कायम करते हुए जहां एक तरफ सुपर एक्सप्रेस हायवे, मीलों लंबे फ्लाईओवर, ऊँचे-ऊँचे बांध, लम्बे टनल, अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे, जम्बो साईज क्रीडा स्थल और पर्यटन के लिए ऐशगाह निर्माण कराया गया वही दुसरी तरफ राज्य टिप्स समझौते, व्यापार घाटे, कर्ज के भार, मूल्यवृद्धि, सरकारी कोषों के दिवालिएपन और भ्रष्टाचार जैसे अपराधों के मकडजाल में फसता गया.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;‘कार्पोरेट और मध्यवर्ग भारत’ के लिए इस मनमोहनी अर्थशास्त्र नें एक स्वर्ग सा निर्मित कर दिया था लुटेरों घोटालेबाजों दलालों दरबारियों और गुटबाजों से बना यह कार्पोरेट और मध्यवर्ग खूब मजे लूटा. मजे पश्चिमोन्मुख पांच सितारा किस्म के जीवन के, चहुमुखी व्याप्त वीआयपी मार्का शानों शौकत के मंत्रियों के लिए ऐशों आराम के असीमित साधनों के, माफियाओं को दी जा रही खुली छूट के, सर्वत्र व्याप्त और सब पर हावी भ्रष्टाचार के और ‘दरिद्र भारत’ का क्या हाल रहा? वह भूख से तड़पने, आत्महत्या का खौफनाक रास्ता अपनाने, बीमारी से कराहने, इलाज और भोजन के आभाव में मरने, किसानो ग्रामीणों जनजातियों सर्वहाराओं की ९० करोड से भी अधिक की तादात खून-पसीना बहाकर हाडतोड मेहनत करके भी आंसू पीकर गुजारा करती रही तथा निरक्षरता और कंगाली को ढोने को अभिशप्त रही. ये शर्मनाक अंतर्विरोध देश के लिए क्या भयानक बीमारी के लक्षण नहीं थे? क्या शुरुआती दौर में ही इसकी पडताल नहीं होनी चाहिए थी? लेकिन पूंजीवाद के पैरोकारों नें ऐसा नहीं किया. सत्ता के शिखर पर रीढ़ विहीन नायक विराजमान थे जो आज मौजूद है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों, अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की तिकड़ी के दलाल के रूप में शासन कर रहे हैं. पूंजीवाद के समक्ष घुटने टेककर साष्टांग दंडवत कर प्रार्थनाओं का दौर चल रहा है गांधी के देश में सत्ता पर काबिज लोग जो गांधी को सत्ता का प्रतीक मानते है उनकी नजर में समाजवादी होना वैचारिक जुर्म मान लिया गया है, इतना ही नहीं समाजवाद को विकास के मार्ग में रोडे अटकानेवाला जानी दुश्मन भी करार दिया गया है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम बढाने और गरीबों, किसानों को दी जा रही सब्सिडी को घटाने के संबंध में अड़ियल रवैया अपनाना-इन सबसे जाहिर होता है कि देश के शासकों के मन में एक साम्राज्यवादी मानसिकता जोर मार रही थी लेकिन अब जब दुनिया मंदी की चपेट में हैं और इस मंदी की मार से ‘मध्यवर्ग भारत’ भी नहीं बच पाया है. ऐसे में वह भी मनमोहन के आर्थिक नीतियों के विरुद्ध खड़ा होता दिखाई दे रहा है. मनमोहन की उदारवादी नीतियों का रास्ता पूंजीपतियों के घर तक तो जाता है लेकिन आम आदमी के घरों को बाईपास करते हुए निकलता है. अब यह कांग्रेस को सोचना है कि अगले चुनावो में सत्ता का स्वाद उन पूंजीपतियों के वजह से चखने को मिलेगा या उस आम आदमी के वजह से जिसे मनमोहन और उनकी मंडली बचकर निकलने के लिए बाईपास का रास्ता अख्तियार कर चुकी है. अगर कांग्रेस यह खुशफहमी पाल बैठी है कि ‘अगले चुनाव तक मतदाता सरकार की जनविरोधी नीतियों को भूल कर उसे ही वोट करेंगे’ तो यह उसकी गलतफहमी है. मनमोहन के पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में भ्रष्टाचार के नए-नए कीर्तिमान कायम हो रहे है किन्तु देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए किसी एक पार्टी या नेता को ज़िम्मेदार ठहराना ठीक नहीं होगा. क्योकि इसमें सभी शामिल हैं. यह अलग बात है कि सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार डॉ मनमोहन सिंह और उनकी आर्थिक नीतियाँ हैं जो पूंजीवादी अर्थ व्यवस्था के लूट के अर्थशास्त्र की पोषक हैं. अब समय आ गया है जब कांग्रेस को यह तय करना है कि देश और आम आदमी का विकास समाजवादी अर्थव्यवस्था जिसे पंडित नेहरु नें अपनाया था, के माध्यम से होगा या पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के माध्यम से जो कि पश्चिमी पूंजीवाद के नाम से जाना जाता है और जिसका खेल अब लगभग खत्म होने को है.&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-6387819688377862678?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/6387819688377862678/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=6387819688377862678&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6387819688377862678'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6387819688377862678'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/10/blog-post_1183.html' title='चरम पर चरमराता मनमोहन का पूंजीवाद'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-L8ughkh6UyU/Tpw5IAUfR2I/AAAAAAAAAOs/MoFqswyQWLk/s72-c/manmohan_pm_1_625212906.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-896711879704460727</id><published>2011-10-17T07:13:00.000-07:00</published><updated>2011-10-17T07:13:32.929-07:00</updated><title type='text'>विरोध को दबाने की सरकारी मुहिम</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-xicT7XZO2FQ/Tpw3y67llpI/AAAAAAAAAOk/pZN26YtIcQw/s1600/DR_SUBRAMANIAN_SWAM_292918f_346012414.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="265" oda="true" src="http://2.bp.blogspot.com/-xicT7XZO2FQ/Tpw3y67llpI/AAAAAAAAAOk/pZN26YtIcQw/s400/DR_SUBRAMANIAN_SWAM_292918f_346012414.jpg" width="400" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;देश में सत्ताधारी लोग और सरकारें नागरिक समाज के लोगों, सरकारी अधिकारियों और विरोधी दल के कार्यकर्ताओं को डरा-धमका रहे हैं. तथा उनके खिलाफ झूठे मुकद्दमें कायम करने में मसगूल हैं और ये काम बड़े ही सुनियोजित तरीक़े से किया जा रहा है. वैसे तो विरोधियों को ठिकाने लगाने का सत्ताधारियों का काफी पुराना रिकार्ड रहा है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से खुलेआम और बड़े ही बेशर्म तरीके से सत्ताधारी अपनें विरोधियों को कुचलने पर आमादा हैं. इतना ही नहीं जब कोई सामाजिक कार्यकर्ता या समाजसेवी एक पार्टी के विरुद्ध बोलता है तो वह पार्टी तत्काल उक्त समाजसेवी को विरोधी पार्टी के एजेंट के रूप में प्रचारित करने लगती हैं. मोटे तौर पर यह दिखाई दे रहा है कि देश में जितनी पार्टियों की सरकारें सत्ता पर काबिज हैं लगभग सभी सरकारें अपनें विरोधियों के दमनचक्र को पुरजोर तरीके से चला रहीं हैं. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इनके इस रवैये से देश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. इस दमनचक्र के ताजा शिकार जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी, गुजरात के आईपीएस संजीव भट्ट, मध्यप्रदेश इंदौर से प्रकाशित सांध्य दैनिक प्रभात किरण का मुस्सविर नाम से कार्टून बनाने वाले पत्रकार कार्टूनिष्ट हरीश यादव, बिहार विधान परिषद के कर्मचारी कवि मुसाफिर बैठा और युवा आलोचक अरुण नारायण तथा आदिवासी हकों के सपने देखने वाला लिंगाराम सहित अन्ना हजारे और बाबा रामदेव शामिल हैं. चाहे वह यूपीए के सरकार हो अथवा एनडीए की इसे संयोग ही कहेंगे कि सभी सत्ताधारियों का अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों के विरुद्ध दमनचक्र का तरीका एक ही है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी के खिलाफ मामला दर्ज किया है यह मामला दिल्ली स्थित नेहरु प्लेस के क्राईम ब्रांच नें दर्ज किया है. बताया या जा रहा है कि बीते जुलाई महीनें में सुब्रहमण्यम स्वामी नें एक अखबार में मुसलमानों के संबंध में एक लेख लिखा था. जिसके कारण समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंची थी. इसी मामले को लेकर अगस्त महीने में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा पटियाला हाउस कोर्ट में असगर खान नामक एक वकील द्वारा दर्ज कराई गई थी. पुलिस के मुताबिक उसी शिकायत के आधार पर सेक्शन १५३-अ, १५३-ब, और २९५-अ आदि धाराओं में मुकद्दमा दर्ज कराया गया है पुलिस के अनुसार पुलिस नें सीधे इस शिकायत को दर्ज नहीं की है. अगर आपको पता होगा तो बता दें कि १ लाख ७६ हजार करोड का २जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले को सुब्रहमण्यम स्वामी द्वारा ही अदालत में ले जाया गया है. जिसके कारण घोटाले में तमाम लोगों के संलग्न होने के प्रमाण सामने आते जा रहे है २जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए. राजा, कनिमोझी, सिद्धार्थ बेहरा, गौतम दोषी, करीम मोरानी, शाहिद बलवा, राजीव अग्रवाल, आदि जेल की हवा खा रहे है इस घोटाले को लेकर कहा जाता है कि डीएमके के दयानिधि मारन पर भी तलवार लटक रही है. तथा इस मामले की आंच से कपिल सिब्बल और पी. चिदंबरम भी नहीं बच पाए हैं इतना ही नहीं सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला में उनका अगला खुलासा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को लेकर हैं. स्वामी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में पहले पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए. राजा, डीएमके सांसद एम.के. कनिमोड़ी, पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन और गृह मंत्री पी. चिदंबरम की भूमिकाओं का खुलासा कराने के बाद अब उनका अगला खुलासा रॉबर्ट वाड्रा को लेकर है. संभवतः सुब्रहमण्यम स्वामी की सत्ताधारियों के विरुद्ध इसी सक्रियता के कारण इनके ऊपर एफआईआर दर्ज किया गया लगता है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;गुजरात के आईपीएस संजीव भट्ट पर आरोप है कि एक कांस्टेबल के. डी. पंत को धमकाया और झूठे हलफनामे पर हस्ताक्षर करवाया. गुजरात पुलिस नें संजीव भट्ट को उक्त कांस्टेबल को धमकाने और झूठे हलफनामें पर हस्ताक्षर करवाने के आरोप में घाटलोदिया पुलिस थाने मे एक प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया है शिकायतकर्ता कांस्टेबल नें आरोप लगाया है कि संजीव भट्ट नें उसे धमकाते हुए २७ फरवरी २००२ को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक में गलत हलफनामें पर हस्ताक्षर करवाया. गुजरात के पुलिस महानिदेशक चितरंजन सिंह का कहना है कि संजीव भट्ट के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के संबंध में भट्ट को पूछताछ के लिये बुलाया गया था. उनका बयान दर्ज किया जायेगा. वर्ष 2002 के दंगों के दौरान भट्ट के अधीन काम कर चुके कांस्टेबल के. डी. पंत ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि भट्ट ने एक सरकारी कर्मचारी यानी उन्हें धमकाया, सबूतों को गढ़ा और गलत तरीके से उन पर दबाव बनाया. पंत ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया कि उन्हें भट्ट ने 16 जून को फोन किया और उनसे किसी काम के सिलसिले में घर पर आने को कहा. जब पंत भट्ट के आवास पर पहुंचे तो आईपीएस अधिकारी ने उन्हें बताया कि मुकदमे में मदद करने के लिये उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त वकील 18 जून को आयेंगे और उन्हें बयान दर्ज कराने के सिलसिले में उनसे मुलाकात करनी होगी. पंत का आरोप है कि भट्ट ने उनसे कहा कि वकील को बताया जाये कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उनका बयान जबर्दस्ती दर्ज किया था. जब पंत ने इस बात का विरोध किया तो भट्ट ने कथित तौर पर उन्हें धमकी दी. भट्ट ने पंत से कहा कि अगर वह उनके कहे अनुसार काम करते हैं तो इसमें कोई चिंता की बात नहीं है. पुलिस कांस्टेबल पंत का यह भी दावा है कि भट्ट उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोधवाडिया के पास ले गये. कांग्रेस नेता ने भी पंत को आश्वासन दिया कि इसमें चिंता करने की बात नहीं है और उन्हें वही करना चाहिये जो भट्ट कह रहे हैं. मोधवाडिया से मिलने के बाद भट्ट पंत को गुजरात उच्च न्यायालय के निकट एक वकील और नोटरी के दफ्तर ले गये और उनसे दो हलफनामों पर हस्ताक्षर करवाये. ‘दरअसल भट्ट ने उच्चतम न्यायालय में दायर अपनें हलफनामे में आरोप लगाया है कि गोधराकांड के बाद गुजरात में हुए दंगों में मोदी की कथित तौर पर सहअपराधिता थी.’ यहाँ सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि पुलिस कांस्टेबल पंत अगर एक आईपीएस अधिकारी के कहने से हलफनामे पर हस्ताक्षर कर सकता है तो एक मुख्यमंत्री के कहनें पर एक आएपीएस अधिकारी पर झूठे आरोप नहीं लगा सकता ?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;मध्यप्रदेश इंदौर से प्रकाशित सांध्य दैनिक प्रभात किरण के पत्रकार कार्टूनिष्ट हरीश यादव जो कि मुस्सविर नाम से कार्टून बनाते हैं को गिरफ्तार कर लिया गया है. ज्ञात हो कि नरेंद्र मोदी के सद्भभावना अनशन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्से से आये लोग अपने यहां के प्रतीक चिन्ह के तौर पर वस्तुएं मोदी को भेंट कर रहे थे. मोदी उन चीजों को स्वीकार कर रहे थे और ये चीजें मामूली होते हुए भी उस इलाके की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है. इसी दौरान एक सामान्य मुसलमान जो कि पिछले दो दिनों से इंतजार कर रहा था कि वो भी नरेंद्र मोदी को कुछ दे और उसने नरेंद्र मोदी को टोपी दे दी और पहनने का आग्रह किया. ये बहुत ही संवेदनशील और भावुक क्षण था और अगर वो उसे पहनते, तो संभव था कि मुसलमानों के बीच बहुत ही अलग किस्म का सकारात्मक संदेश जाता लेकिन नरेंद्र मोदी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया जिससे उनके छद्म सद्भावना अनसन की पोल खुल गई. इसी थीम को लेकर मुस्सविर नाम से बनाया गया कार्टून प्रभात किरण में २० सितंबर को छपा और इस मामले में मोदी के कहने पर मध्यप्रदेश सरकार नें धार्मिक भावनाये भडकाने के आरोप में मल्हारगंज थाने में हरीश यादव के खिलाफ आईपीसी के धारा– 295 ए के तहत मुकदमा दर्ज कर हरीश यादव उर्फ मुस्सविर को गिरफ्तार कर लिया. दरसल जिस चांद-सितारे को कार्टून में दिखाया गया है, उसकी व्याख्या इस्लाम धर्म के जानकार बेहतर कर सकते हैं? क्या इस धर्म में चांद-सितारे की उसी अर्थ में व्याख्या है, जिस अर्थ में मुस्सविर पर धार्मिक भावनाएं भड़काये जाने के लिए सजा दी गयी? ये सिर्फ और सिर्फ उस एक सामान्य मुसलमान की भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जो कि नरेंद्र मोदी को टोपी भेंट में देना चाहता था. दरसल मुस्सिवर पर जो कानूनी कार्रवाई की गयी, वो शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर की गयी, जिस समय वो चीन के दौरे पर थे. नरेंद्र मोदी ने यहां तक कहा कि आप इंदौर में मामला दर्ज करवाएं नहीं तो फिर अहमदाबाद में करवाया जाएगा. शिवराज नें मोदी के दबाव के कारण रातोंरात कार्रवाई की इस कार्रवाई को दरअसल इस लिए भी आनन्-फानन में अंजाम दिया गया क्योंकि गुजरात और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;कमोबेस यही स्थिती बिहार की भी है. वहां भी अपने विरुद्ध उठ रही हर आवाज को राजग सरकार क्रूरता से कुचल देनें पर आमादा है. और इन परिस्थितियों में राजग सरकार को आईना दिखाने में सक्षम लोग अथवा बुद्धिजीवी या तो आपसी राग-द्वेष डूबे हुए है या फिर जाति-बिरादरी के नाम पर बंटकर बिहार की तानाशाही सरकार और उसके कर्ताधर्ता के इस नंगे नाच को देखकर भी चुप हैं. दिनांक १६ सितंबर २०११ को बिहार विधान परिषद नें अपने दो कर्मचारियों को केवल इस लिए निलंबित कर दिया क्योकि वे फेसबुक पर परिषद के अधिकारियों असंवैधानिक भाषा का प्रयोग करते है तथा उनके बारे में ‘दीपक तले अँधेरा’ जैसी लोकोक्ति का इस्तेमाल करते हैं और लिखते हैं कि बिहार विधान परिषद जिसकी मै नौकरी करता हूँ वहां विधानों की धज्जियाँ उडाई जाती हैं. अरुण नारायण के निलंबन के लिए भी कुछ इसी तरह के बहाने गढे गए. हिन्दी फेसबुक पर कवी मुसाफिर बैठा अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं. और अरुण नारायण नें पिछले एक महीने से फेसबुक पर अपना एकाउंट बनाया था. उपरोक्त टिप्पणियों का जिक्र इन दोनों को निलंबित करते हुए किया गया है. फेसबुक पर टिप्पणी करने के कारण संभवतः हिंदी प्रदेश का पहला उदाहरण है. मुसाफिर बैठा और अरुण नारायण ए दोनों हिंदी साहित्य की दुनिया के परिचित नाम हैं. मुसाफिर बैठा ‘हिंदी की दलित कहानी’ पर पीएचडी की है तथा अरुण नारायण का बिहार की पत्रकारिता पर एक महत्वपूर्ण शोधकार्य है. मुसाफिर और अरुण के निलंबन के तीन-चार महीने पहले बिहार विधान परिषद से उर्दू के कहानीकार सैयद जावेद हसन को नौकरी से निकाल दिया गया उनके ऊपर भी कुछ इसी तरह के आरोप लगाये गए थे. वस्तुतः इन तीनों लेखक कर्मचारियों का निलंबन, पत्रकारों को खरीद लेने के बाद बिहार सरकार द्वारा काबू में नहीं आने वाले लेखकों व पत्रकारों के विरुद्ध की गई है. बड़े अख़बारों और चैनलों को चांदी के जूते उपहार में देकर अपना पिट्ठू बना लेना तो बिहार सरकार के बस में है लेकिन अपनी मर्जी के मालिक और बिंदास लेखकों पर नकेल कसना राजग सरकार के लिए संभव नहीं हो रहा था परिणामस्वरूप इनको निलंबित किया गया.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;ठीक यही कहानी आदिवासी हकों के सपने देखने वाला लिंगाराम के साथ भी दुहराई गयी उसे नक्सलियों का सहयोगी बताकर छत्तीसगढ़ पुलिस नें गिरफ्तार कर लिया. लिंगाराम के बारे में बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ स्थित दंतेवाडा के पूर्व डीआयजी कल्लूरी और एसपी अमरेश मिश्रा नें जबरन एसपीओ बनाने के लिए ४० दिन तक दंतेवाडा थाने के शौचालय में भूखा रखा था जिसे स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार नें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से मुक्त कराया था. और मुक्त होने के बाद वह दिल्ली जाकर पत्रकारिता की पढाई करने लगा. उसी दौरान डीआयजी कल्लूरी और एसपी अमरेश मिश्रा नें एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि लिंगाराम कोडोपी कांग्रेसी नेता अशोक गौतम के घर हुए हमले का मास्टर माइंड है, लेकिन जब दिल्ली में शोर मचा कि लिंगाराम तो दिल्ली में है तो दंतेवाडा में कैसे हमला करेगा? तो तत्कालीन पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन नें कहा कि ए प्रेस विज्ञप्ति गलती से जारी हो गई थी. किन्तु अगर उस समय लिंगाराम छत्तीसगढ़ में रहा होता तो उसे नपने से कोई नहीं रोक सकता था. ! खैर गलती तो अक्सर प्रशासन से हो जाया करती है ! बहरहाल बताया जाता है कि दिल्ली से लिंगाराम अपना मिट्टी का घर बनाने गया था. वह अपने दादाजी के घर पर था कि कुछ सादे कपड़े में पुलिस वाले आकार उसे उठा ले गए और नक्सलियों को पैसा पहुँचाने के झूठे आरोप लगाकर उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया हाँ लिंगाराम का यह कसूर अवश्य है कि उसनें आदिवासियों के अधिकारों को शासन प्रशासन से मान्यता दिलवाने का सपना देखा. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;इसी तरह अन्ना हजारे के जनलोकपाल लाने संबंधी अनसन को न होने देने के लिए उन्हें जेल में डालने से लेकर. रामलीला मैदान में काले धन के बारे में बाबा रामदेव सहित उनके सोये हुए समर्थकों पर आधी रात के समय दिल्ली पुलिस द्वारा किये गए लाठीचार्ज जिसमें अभी हाल में एक महिला की मौत हो गई को अंजाम देना कहाँ तक उचित है. क्या कारण है कि लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से सत्ता पर काबिज हुए लोग उसी लोकतंत्र को दरकिनार कर अचानक तानाशाह बनते जा रहे हैं अतः अब समय रहते देश के नीति-निर्धारकों को इस तथ्य पर गंभीर विचार करते हुए कि मौजूदा सरकारें जो कि अपने विरोधियों को सिर्फ कानून के दुरूपयोग और हिंसा से कुचलने पर आमादा हैं उन्हें रोकने के उपाय करने होंगे. अगर समय रहते ऐसा नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे पड़ोसी देशों की तरह हमारा भी नाम भी लोकतान्त्रिक स्तर पर (फेल) नाकाम राष्ट्रों में सुमार कर दिया जाएगा. नीतिगत विरोधियों के सम्मान की रक्षा भी सरकार का दायित्व है ये वही लोग हैं जो सरकार और शासन प्रशासन के जनविरोधी नीतियों का विरोध करते हुए उसमे व्यापक सुधार की मांग करते हैं. जो कि फौरी तौर पर भले ही सरकार और शासन प्रशासन के विरुद्ध दिखें लेकिन वस्तुतः वे दीर्घकालिक तौर पर सरकारों को अलोकप्रिय होने से बचाते हैं और उन्हें जन विरोधी फैसले लेने से रोककर आगामी चुनाओं में जनता को चेहरा दिखाने लायक बना देते हैं. किन्तु यही सरकारें दुर्भावनावश वस उन्हें प्रताड़ित करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने नहीं देती. अगर ये सभी विसलव्लोवर अपने-अपने कामों का बहिष्कार कर दें तो समाज की गति थम जाएगी. और यह देश निरंकुशता के भंवर में फंस जायेगा. यह माना कि अपने विरोधियों के दमन की मानसिकता जो कि सदियों से सत्ताधारियों के दिमाग में अपनी विक्षिप्तता के साथ घर कर गई हैं को एक झटके में हटा पाना आसान नहीं है, परतु यह काम असंभव भी नहीं है.&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-896711879704460727?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/896711879704460727/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=896711879704460727&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/896711879704460727'/><link rel='self' type='application/atom+xml' 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Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-xicT7XZO2FQ/Tpw3y67llpI/AAAAAAAAAOk/pZN26YtIcQw/s72-c/DR_SUBRAMANIAN_SWAM_292918f_346012414.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-6447800890115006798</id><published>2011-10-17T07:07:00.000-07:00</published><updated>2011-10-17T07:07:20.338-07:00</updated><title type='text'>32 रूपये में कैसे जियेंगे मनमोहन जी?</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-P5F6qnOaVRE/Tpw2gWn26FI/AAAAAAAAAOc/0iSD_8FBPTk/s1600/54200_indias_prime_minister_manmohan_singh_attends_the_indian_labo_537546633.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="186" oda="true" src="http://2.bp.blogspot.com/-P5F6qnOaVRE/Tpw2gWn26FI/AAAAAAAAAOc/0iSD_8FBPTk/s320/54200_indias_prime_minister_manmohan_singh_attends_the_indian_labo_537546633.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;देश के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री की अध्यक्षता के अंतर्गत आधारभूत संरचना और मानव विकास के लिए पुख्ता योजनाये बनाने का दावा करने वाली केन्द्र सरकार की संस्था योजना आयोग ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि खानपान पर शहरों में 965 रुपये और गांवों में 781 रुपये प्रति महीना खर्च करने वाले व्यक्ति को गरीब नहीं माना जा सकता है. गरीबी रेखा की नई परिभाषा तय करते हुए योजना आयोग ने कहा कि इस तरह शहर में 32 रुपये और गांव में हर रोज 26 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति बीपीएल परिवारों को मिलने वाली सुविधा को पाने का हकदार नहीं है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अपनी यह रिपोर्ट योजना आयोग ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष हलफनामे के तौर पेश की है. इस रिपोर्ट पर खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हस्‍ताक्षर किए हैं. योजना आयोग ने गरीबी रेखा पर नया मापदंड सुझाते हुए कहा है कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नै में चार सदस्यों वाला परिवार यदि महीने में 3860 रुपये खर्च करता है, तो वह गरीब नहीं कहा जा सकता.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;योजना आयोग के इस हास्यास्पद परिभाषा पर हो-हल्ला मचना शुरू हो चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन में एक आदमी प्रति दिन अगर 5.50 रुपये दाल पर, 1.02 रुपये चावल-रोटी पर, 2.33 रुपये दूध, 1.55 रुपये तेल, 1.95 रुपये साग-सब्‍जी, 44 पैसे फल पर, 70 पैसे चीनी पर, 78 पैसे नमक व मसालों पर, 1.51 पैसे अन्‍य खाद्य पदार्थों पर, 3.75 पैसे रसोई गैस व अन्य ईंधन पर खर्च करे तो वह एक स्‍वस्‍थ्‍य जीवन यापन कर सकता है. साथ में एक व्‍यक्ति अगर 49.10 रुपये मासिक किराया दे तो आराम से जीवन बिता सकता है और उसे गरीब नहीं कहा जाएगा. योजना आयोग की मानें तो स्वास्थ्य सेवा पर 39.70 रुपये प्रति महीने खर्च करके आप स्वस्थ रह सकते हैं। शिक्षा पर 99 पैसे प्रतिदिन खर्च करते हैं तो आपको शिक्षा के संबंध में कतई गरीब नहीं माना जा जायेगा. यदि आप 61.30 रुपये महीनेवार, 9.6 रुपये चप्पल और 28.80 रुपये बाकी पर्सनल सामान पर खर्च कर सकते हैं तो आप आयोग की नजर में बिल्कुल भी गरीब नहीं कहे जा सकते.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;योजना आयोग ने गरीबी की इस नई परिभाषा को तय करते समय 2010-11 के इंडस्ट्रियल वर्कर्स के कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स और तेंडुलकर कमिटी की 2004-05 की कीमतों के आधार पर खर्च का लेखा-जोखा दिखाने वाली रिपोर्ट पर गौर किया है. हालांकि, रिपोर्ट में अंत में कहा गया है कि गरीबी रेखा पर अंतिम रिपोर्ट एनएसएसओ सर्वेक्षण 2011-12 के बाद पेश की जाएगी. ज्ञात हो कि उच्चतम न्यायालय ने गत 29 मार्च को 2004 के लिए निर्धारित मानदंडों के आधार पर वर्ष 2011 में गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का निर्धारण करने पर मनमोहन सरकार को आड़े हाथ लिया था. कोर्ट ने योजना आयोग की सिफारिशों के आधार पर गरीबी की रेखा से नीचे रहने वालों की आबादी 36 प्रतिशत होने के सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए सरकार से इसका विवरण माँगा था. न्यायाधीशों का कहना था कि 2004 में दिहाड़ी मजदूरी 12 रु. और 17 रु. थी, लेकिन क्या आज यह वास्तविकता है. इतने पैसे में आज क्या होता है? न्यायाधीशों का यह भी कहना था कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में भी साल में कम से कम दो बार बदलाव होता है, लेकिन गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने में मानदंडों में सात साल में कोई बदलाव नहीं करना आश्चर्य पैदा करने वाला है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;आज देश का गरीब आदमी अपने ही नीतिनिर्धारकों द्वारा तय किये गए 'नव आर्थिक उदारीकरण' की मार झेल रहा है. उसकी जमीन, पानी और रोजी-रोटी राज्य द्वारा कब्जाई जा रही हैं ताकि सब कुछ बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और धन्ना-सेठों की खनन, सेज और दूसरे बड़े-बड़े प्रोजेक्टों, आदि के लिए दी जा सकें. जहाँ एक ओर पिछले 10 सालों में देश के कारपोरेट घरानों को 22 लाख करोड रूपये ( टेक्स आदि में छूट के माध्यम से) दे दिया गया वहीं देश के गरीब आदमी को सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी को खत्म करने की सोची-समझी रणनीति के तहत, योजना आयोग, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में काम कर रहा है. अब ऐसे में उस उच्चतम न्यायालय को उन गरीबों की मदद के लिए आगे आना चाहिए, जिनके अधिकार छीनने की मंसा से योजना आयोग उच्चतम न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है. कोई मनमोहन, मोंटेक अर्थशास्त्रीद्वय, की मंडली से कोई यह पूछे की आपकी झक्क सफेदी जो कि आप सभी के पहनावे में झलकती है और क्रीच टूट जाने पर तत्काल बदल दी जाती है ( दिन में 3 बार) कितना खर्च आता है ? ( संभवतः 23 रूपये से कई गुना ज्यादा होगा) तो आपने यह कैसे मान लिया कि देश का आम आदमी केवल 32 रूपये रोज गुजारा कर लेगा ?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;जब देश में वैश्वीकरण की नीतिया लागू की जा रहीं थी उस समय तमाम बुद्धिजीवियों नें जो आशंका व्यक्त की थी कि अगर वैश्वीकरण की नीतियों पर चल कर उदारीकरण और ग्लोबलीकरण को अपनाया गया तो अधिक से अधिक लोग हाशिए पर धकेल दिए जाएंगे. नतीजतन, एक ऐसी परिस्थिति निर्मित होगी जिसमें बहुत ही थोड़े से लोग अपना अस्तित्व बचा पाएंगे. गरीबों को यह चुनाव करना होगा कि वे फांसी लगाकर मरेंगे या कीटनाशक पीकर अथवा सरकारी सुरक्षाबलों के बंदूक की गोली से. क्या स्थितियां उससे अलग नजर आ रहीं हैं ? राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता की अधोगति तथा आर्थिक व राजनीतिक प्रक्रिया से दूर रखे जाने की प्रवृत्ति के कारण कई युवा गुमराह होकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मजबूरन आतंकवाद और हिंसा तथा अन्य गैरकानूनी रास्ता अपनाने को बाध्य हुए हैं. इन स्थितियों के मद्देनजर क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि नक्सलवाद और कुछ नहीं, बल्कि अस्तित्व के संघर्ष में गरीबों के जवाबी प्रतिरोध का पर्याय मात्र है. सवाल यह है कि आखिर योजना आयोग के योजनाकारों के समझ में यह क्यों नहीं आता कि जिस देश में महंगाई दर 10 फीसदी की दर से बढ़ रही हो वहां का आम आदमी 32 रूपये में कैसे गुजारा कर सकता है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;वह वर्ल्ड बैंक जिसके बारे में कहा जाता है कि वह आम आदमी के बारे में नहीं सोचता वह केवल अपने निवेशकों के बारे में सोचता है नें भी गरीबी रेखा के ऊपर की न्यूनतम आय 2 डॉलर यानि 96 रूपये तय किया है और हमारे नीति निर्धारकों की नजर में प्रतिदिन 32 रूपये की आय अर्जित करने वाले गरीबी रेख के निचे नहीं हैं. वैसे तो यूपीए 2 का घोषित लक्ष्य देश के आम आदमी और खासकर देश की गरीब आबादी के लिए ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध करवाकर उनका जीवन स्तर सुधारना था, लेकिन अब वही यूपीए2 की सरकार देश के चंद पूंजीपतियों व निजी कंपनियों का हितसाधक बन गई है. इसी के मद्देनजर गरीबी निर्धारण के भ्रामक आंकड़े उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है. कुल मिलाकर उच्चतम न्यायालय को हलफनामे के रूप में दी गई योजना आयोग की रिपोट से यह स्पष्ट होता है कि मौजूदा दौर में बट्टा भारी हो गया है और आदमी हल्का हो गया है. सरकार की इन्ही नीति निर्धारण के मद्देनजर चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, और आवास की बातें करना बेमानी है देश की गरीब जनता के सामने तो अब दो जून की रोटी का सवाल मुंह बाए खड़ा हो गया है.&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-6447800890115006798?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/6447800890115006798/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=6447800890115006798&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6447800890115006798'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6447800890115006798'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/10/32.html' title='32 रूपये में कैसे जियेंगे मनमोहन जी?'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-P5F6qnOaVRE/Tpw2gWn26FI/AAAAAAAAAOc/0iSD_8FBPTk/s72-c/54200_indias_prime_minister_manmohan_singh_attends_the_indian_labo_537546633.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-4710234559275946585</id><published>2011-10-17T07:00:00.000-07:00</published><updated>2011-10-17T07:00:42.415-07:00</updated><title type='text'>सरकार की ढिठाई से बेलगाम होती महंगाई</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-eqzH_p7ROhQ/Tpw03oPFdJI/AAAAAAAAAOU/W2hAnVvD1o8/s1600/indias_inflation_rate1_772266186.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="195" oda="true" src="http://4.bp.blogspot.com/-eqzH_p7ROhQ/Tpw03oPFdJI/AAAAAAAAAOU/W2hAnVvD1o8/s320/indias_inflation_rate1_772266186.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; text-align: justify;"&gt;महंगाई कम करने का जादुई तरीका रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इजाद किया है जब-जब महंगाई बढती है तो आरबीआई अपने जादुई तरीके को अपनाते हुए रेपो रेट और रिवर्स रोपो रेट को बढा देती है परिणाम स्वरूप सभी बैंक व्याज दर में इजाफा कर देती है जिसका असर होम लोन, कार लोन, गूड्स करियर लोन, बिजनेस लोन, पर पड़ना तय है इसके लिए ज्यादा रूपये किस्त के रूप में बैंक को चुकता करना पड़ेगा. अब अगर विभिन्न कारणों से व्याज के रूप में ज्यादा पैसा बैंक को अदा करना पड़े तो महंगाई कैसे रुकेगी?&lt;/div&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;लगातार बढ़ रही महंगाई से पहले से ही परेशान आम भारतीयों के बजट पर सरकार नें इस सप्ताह फिर से एक बार कुठाराघात किया. इधर पेट्रोलियम कंपनियों नें पेट्रोल के दाम ३.१४ रूपये बढ़ाये तो उधर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आम आदमी को राहत देने के बजाय सभी तरह के लोन को महंगा करने की व्यवस्था कर दी ऊपर से तुर्रा यह कि यह सब महंगाई को काबू करने के लिए किया जा रहा है. महंगाई को काबू करने के नाम पर पिछले १८ महीनों में १२ बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नें रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में २५-२५ बेसिस पाइन्ट्स की बढोत्तरी कर दी इस समय रेपो रेट ८.२५ और रिवर्स रेपो रेट ७.२५ पाइन्ट्स हो गया है. दरसल रेपो रेट का मतलब रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को रेपो रेट पर उधार देता है और रिवर्स रेपो रेट का मतलब रिजर्व बैंक रिवर्स रेपो रेट पर अन्य बैंकों से उधार लेता है. जब हम महंगाई दर की चार्ट पर नजर डालते है तो हमें पता चलता है कि अगस्त के महीने में महंगाई दर बढ़कर ९.७८ फीसदी के साथ १२ महीने के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची है. खाद्य महंगाई दर भी ३ सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में लगातार छठवे सप्ताह भी ९ फीसदी के ऊपर रहते हुए ९.४७ फीसदी पर रही. बेकाबू हो रही महंगाई को रोकने में नाकाम सरकार अपने हाँथ खड़े कर रही है. और सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं को महँगा करना अपनी मजबूरी बता रही है. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;सरकार द्वारा लगातार महंगाई बढ़ाना क्या जनविरोधी कदम नहीं है ? गुरुवार रात से पेट्रोल के दाम ३.१४ रूपये बढा दिए गए इसी के साथ इस साल जनवरी से लेकर अब तक लगभग १० रूपये पेट्रोल के दाम में बढ़ोत्तरी कर दी गई है. पेट्रोल के दाम बढ़ाये जाने को लेकर सरकार द्वारा जो बार-बार बहाना बनाया जाता है वह है पेट्रोलियम कंपनियों को लगातार घाटा होना. जिस तरह से पेट्रोलियम कंपनियों के घाटे की बात की जाती है उसके हिसाब से अब तक पेट्रोलियम कंपनियों को दिवालिया हो जाना चाहिए था. किन्तु ऐसा न होकर पेट्रोलिय की कीमतें बढाये जाने के कारण आम आदमी लगातार आर्थिक रूप से दिवालिया हो रहा है. पेट्रोलियम पदार्थों के कीमतों की बढ़ोत्तरी के पीछे अनुमानत: औद्योगिक घराने ही हैं. क्योकिं इन औद्योगिक घरानों के पेट्रोलियम पदार्थों के (रिटेल चेन) पेट्रोल पम्प इस लिए बंद करने पड़े थे क्योकि कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को बेलआउट देती थी जिससे उनका नुकसान जो कि सब्सिडी देने पर होता था उसकी भरपाई हो जाती थी और प्राइवेट कंपनियों के नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही थी. अब सरकार उन्ही कंपनियों के हितों के मद्देनजर लगातार पेट्रोलियम के दाम बढाती जा रही है. जिससे कि एक बार फिर से पेट्रोलियम के कारोबार में लगे औद्योगिक घराने पेट्रोलियम पदार्थों के (रिटेल चेन) पेट्रोल पम्प खोल सकें.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;व्याज दर बढ़ाकर महंगाई कम करने का जादुई तरीके को समझना मुश्किल है. प्राप्त जानकारी के अनुसार महंगाई कम करने के नाम पर आरबीआई नें पिछले ३ वर्षों में कुल १२ बार व्याज दरों में बढ़ोत्तरी की लेकिन क्या महंगाई कम हुई. वस्तुत: महंगाई कम नहीं होगी उसके कारण सीधे और स्पष्ट हैं भारत सरकार को अनाज, दालें, खाने के तेल, फल आदि, बहुराष्ट्रीय निगमों के (रिटेल चेन) शापिंग माल में बेचने और मुनाफा कमाने का अवसर देना जो है. अब अगर १०-२० रूपये किलो अनाज, दालें, खाने के तेल, फल आदि बेचे जायेगे तो शापिंग माल बनाने में किये गए पूंजी निवेश का रिटर्न या माल के कर्मचारियों की तनख्वाह और रखरखाव तो छोडिये शापिंग माल में लगे सेन्ट्रल एसी के लिए उपभोग की गई बिजली का बिल नहीं भरा जा सकेगा. जमाखोरी के विरुद्ध आपने आढ़तियों के गोदामों पर छापेमारी करते हुए खाद्यान विभाग के अधिकारियों को देखा होगा लेकिन क्या कभी आपने यह भी सुना कि रिटेल चेन के कारोबार में संलग्न बहुराष्ट्रीय निगमों के वेयरहाउसों (जहाँ खाद्यान का बंफर स्टाक जमा करके रखा जाता है) में खाद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा छापेमारी की गई?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अब सरकार यह कहती नजर आ रही है कि महंगाई से हो रही जनता की तकलीफों के लिए हमें खेद है लेकिन चीजों के दाम बढ़ाना हमारी मजबूरी है, सरकार में बैठे लोगों से सवाल किया जाना चाहिए कि महंगाई बढ़ाना आपकी मजबूरी है, भ्रष्टाचार में आपके संतरी से लेकर मंत्री तक सभी आकंठ डूबे हुए है इसलिए भ्रष्टाचार आप मिटा नहीं सकते, आतंकवाद से निपटना आपके बूते का नहीं तो आप सत्ता से क्यों चिपके है. इधर महंगाई सुरसा की तरह बढ़ रही है और उधर आपके मंत्रियों की संपत्ति में हजार-हजार प्रतिशत का इजाफा हो रहा है ! आखिर माजरा क्या है ? छठे वेतन आयोग को लागू करने के भार से अभी केन्द्र सरकार उबर नहीं पायी थी कि केन्द्र सरकार नें १ जुलाई २०११ से अपने कर्मचारियों को ७ प्रतिशत डीए बढा दिया है. इस फैसले से केन्द्र सरकार के ५० लाख कर्मचारी और ४० लाख पेंशनर को फायदा मिलेगा इससे सरकार पर सालाना ७,२२८,७६ करोड रूपये का अतिरिक्त भार होगा. यहाँ यह समझ में आता है कि सरकार का एकमेव उद्देश्य रह गया है... महंगाई बढाओ, आम जनता को लूटो, सरकारी खजाने भरो, और फिर उसे सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों, पार्षदों, विधायकों, सांसदों, और मंत्रियों में बंदरबाँट करो.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;१९९१ से लेकर आज तक केवल और केवल देश की सार्वजनिक निगमों को जिसे नवरत्न कहा जाता था. उन्हें पूजीपतियों के पक्ष में न केवल हलाल किया गया वरन एनडीए शासनकाल में (डिस्इन्वेस्टमेंट) विनिवेश मंत्रालय बनाकर औद्योगिक घरानों के हवाले किया गया, जनहित से जुड़े क्षेत्र एक-एक कर औद्योगिक घरानों के हवाले किया जा रहा है, चाहे वह बैंकिंग का क्षेत्र हो, शिक्षा का क्षेत्र हो, चिकित्सा का क्षेत्र हो, खनन का क्षेत्र हो, यहाँ तक कि बिजली और पानी भी. उधर मंदी से अमेरिका का दम निकल रहा है अमेरिकी बांडों की साख लगातार गिर रही है फिर भी क्या कारण है कि डालर के सामने रूपया (रूपये का अवमूल्यन हो रहा है) लगातार टूट रहा है. आखिर इस समय रूपये के अवमूल्यन का रहस्य क्या है? क्या रूपये का अवमूल्यन निर्यात के व्यवसाय से जुड़े पूंजीपतियों के इशारे पर किया जा रहा है? रइस मंत्रियों के तले देश का दम घुट रहा है और आम आदमी को हासिए पर फेंक दिया गया है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;अब सरकार की नीतियां और सोच मुनाफा बनाने तक ही सीमित हो गई है मुनाफा बनाना ही विकास है. “कल्याणकारी राज्य” अब “मुनाफाखोर राज्य” में तब्दील होता दिख रहा है. सरकार अभी और भी कड़े फैसले लेने की बात कर रही है. रसोई गैस और रेल यात्री/माल किराये में वृद्धि. यानि आम आदमी अभी और अपनी आर्थिक रीढ़ पर महंगाई का वार सहने को को तैयार रहें. अरे सरकार उनके हितों की सुरक्षा के लिए क्यों कड़े फैसले नहीं ले रही है जिसके मतो से वह सत्ताशीन हुई है. स्पष्ट दीखता है कि भारतीय लोकतंत्र को सरकार नहीं बल्कि देश के कुछ चुनिन्दा वकीलों के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने मन मुताबिक हांक रही हैं. महंगाई बढ़ाकर आम आदमी का जेब काटने से लेकर किसानों और आदिवासीयों के हिस्से का जल, जंगल और जमीन लूटने की कयावद जारी है. किन्तु यूपीए सरकार की कैबिनेट द्वारा तेज टिकाऊ और समग्र विकास का जुमला फेंका जा रहा है अब इस जुमले का आम आदमी क्या करे ? वैसे तो यह सभी को पता है कि सत्ता हाँथ में आते ही जैसे कांग्रेस के पिछले जुमले “कांग्रेस का हाँथ गरीब के साथ” को पलट दिया था वैसे ही आम आदमी तेज टिकाऊ और समग्र विकास को अपने साथ जोड़कर न देखे क्योंकि यह जुमला सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों, पार्षदों, विधायकों, सांसदों, और मंत्रियों और पूंजीपतियों के लिए है आम आदमी के लिए नहीं.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-4710234559275946585?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/4710234559275946585/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=4710234559275946585&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4710234559275946585'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4710234559275946585'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='सरकार की ढिठाई से बेलगाम होती महंगाई'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-eqzH_p7ROhQ/Tpw03oPFdJI/AAAAAAAAAOU/W2hAnVvD1o8/s72-c/indias_inflation_rate1_772266186.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7487976217609902819</id><published>2011-09-07T08:04:00.000-07:00</published><updated>2011-09-07T10:33:06.499-07:00</updated><title type='text'>सोती सरकारें मरते लोग</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-xM-jKtq4xrk/TmeppsGoUfI/AAAAAAAAAN8/ZgkoZ7g_GeA/s1600/delhi.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; FLOAT: left; HEIGHT: 225px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5649670791238275570" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-xM-jKtq4xrk/TmeppsGoUfI/AAAAAAAAAN8/ZgkoZ7g_GeA/s400/delhi.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;आज सुबह १० बजकर १५ मिनट पर दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नं ५, पर जोरदार बम धमाका हुआ है । बताया जा रहा है कि इस् बम धमाके में कम से कम ११ लोगों की मौत हो गयी है और लगभग ७६ से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। आज बुधवार का दिन था। आज का दिन दिल्ली हाईकोर्ट के पीआईएल (पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन) का दिन होता है यह बम धमाका दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नं ४ और ५, के बीच जहाँ लिटीगेंस/ विजिटर्स का पास बनाया जाता है लिटीगेंस /विजिटर्स का पास बनाने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी। सुबह कोर्ट खुलने का समय होने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नं ५, के आस-पास वकीलों और उनके मुवक्किलों की भारी भीड़ जमा थी। चश्मदीदों के अनुसार यह बम ब्रीफकेस में रखकर लाया गया था और इसे ठीक उस वक्त ब्लास्ट कराया गया जब दिल्ली हाईकोर्ट के गेट नं ५ पर भारी भेद जमा थी। भारत सरकार के गृह सचिव के मुताबिक इस् धमाके में आईईडी और टाइमर का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। धमाके में अमोनियम नाईट्रेट का भी इस्तेमाल किये जाने की खबर है। इस् बीच खबर आयी है कि हरकतुल इस्लामी जेहाद के नाम का मेल मीडिया को भेजकर एक आतंकी गुट नें इस आतंकी कार्रवाई की जिम्मेदारी ली है। गृह मंत्रालय के अनुसार इस मामले के जाँच की जिम्मेदारी नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एन.आई.ए) के हवाले कर दी गयी है। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम नें संसद में दिए गये अपने बयान में यह क़ुबूल कर लिया है कि यह एक आतंकवादी हमला है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने की रस्म अदायगी भी की साथ ही धमाके की जगह का ८ मिनट ( इतने कम समय में पी चिदंबरम नें घटनास्थल का दौरा कर क्या हासिल करना चाहते थे ए वे ही जानें) का दौरा कर यह जताने की भरपूर कोशिश की है कि सरकार इस आतंकी कार्रवाई में मारे गये लोगों और घायलों के प्रति संवेदनशील है। दिल्ली की मुखिया शीला दीक्षित भी १.१५ बजे घायलों का हाल-चाल जानने डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंची। जाहिर है कि इस धमाके से संबंधित और इस तरह के मामलों को रोकने के लिए जिम्मेदार दोनों नेताओं नें लगभग अपनी-अपनी औपचारिकतायें पुरी कर ली हैं संभव है कि इन दौरों के पश्चात् मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे भी घोषित कर दिए जाय। शीला दीक्षित की आगवानी के लिए डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल का अमला हाँथ बांधे खड़ा नजर आया किन्तु आश्चर्य यह होता है कि घायलों और मृतकों के परिजन पागलों की तरह अपनें लोगों को ढूढ़ रहे थे किन्तु उन्हें जानकारी देने वाला किसी भी अस्पताल में कोई नहीं था। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;ज्ञात हो कि इसी वर्ष २५ मई को दिल्ली हाईकोर्ट की पार्किंग में आतंकियों द्वारा बम धमाका किया गया था किन्तु उस धमाके में न किसी की मौत हुई थी और न ही कोई हताहत हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर गेट नं ५ पर आज किये गये बम धमाके उन आतंकियों के मनोबल और हमारी सुरक्षा एजेंसियों के नकारेपन का पता चलता है। बताया जाता है कि दिल्ली पुलिस के आलावा दिल्ली हाईकोर्ट की सुरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के हवाले है। सवाल यह पैदा होता है कि ये सभी सुरक्षा एजेंसियों ने २५ मई को दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में हुए बम धमाके के बाद सुरक्षा के लिहाज से क्या कदम उठाया । क्या उस जगह पर जहाँ २५ मई को बम धमाका हुआ था वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाये जा सकते थे ? अगर पिछले धमाके से सबक लेते हुए उस स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गये होते तो आज के धमाके की जांच में कुछ न कुछ मदद जरूर मिलती, कुछ न कुछ सुराग सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से जरूर मिलते। आम तौर पर कहा जाता है कि आतंकी उस जगह को दुबारा निशाना नहीं बनाते जिस जगह को वे एक बार निशाना बना चुके होते है किन्तु आज के बम धमाके के मामले में आतंकियों द्वारा इस् सोच को पलट दिया गया दीखता है।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;देश में जहाँ जहाँ आतंकियों द्वारा बम धमाके किये गये है वहां के सुरक्षा के बारे में अगर एक नजर डालें तो हमें पता चलता है कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भारी लापरवाही की जा रही है। सवाल यह उठता है कि किसी भी आतंकवादी कार्रवाई के पश्चात प्रेकॉशन के लिए कौन कौन से स्टेप उठाये गये। क्या मुखबिरी के नेटवर्क को मजबूत किया गया ? क्या तकनीक के इस्तेमाल के लिए जरूरी कदम उठाये गये ? अथवा क्या इसे नियती मानकर देश की सुरक्षा एजेंसियों की मजबूरी को मान्यता दे दी जाय ? बांग्लादेश के दौरे पर गये देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी बयान आ चुका है उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के पास हुए इस आतंकी कार्रवाई को 'कायरता पूर्ण कार्रवाई' बताया है। उन्होंने कहा है कि "हम इस आतंकवाद के आगे झुकेंगे नहीं, ये एक लंबी लड़ाई है जिसमे सभी राजनैतिक दलों और नागरिकों को मिलकर लड़ना होगा" प्रधानमंत्री जी देश का आम आदमी आपसे पूछ रहा है कि आतंकियों के विरुद्ध इस लड़ाई को लड़ने के लिए आपकी क्या तैयारी है ? इसका जवाब है आपके पास ? क्या इस लड़ाई में आप लगातार आम आदमी को झोकते रहेंगे आखिर इन आतंकवादी कार्रवाई को रोकनें में आप अक्षम क्यों हैं ? इन आतंकी कार्रवाईयों में आम जनता मरने को अभिशप्त क्यों है। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;वकील के लबादे में और वकील की हैसियत से दिल्ली हाईकोर्ट में घटनास्थल पर पहुंचे कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी नें मीडिया से पहले ही अपनी असहमती दर्ज करा दी उन्होंने कहा कि वे मीडिया से असहमत हैं । (ध्यान रहे कि उस समय मीडिया के लोग ऐसे धमाकों को न रोक पाने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे थे ) अब अभिषेक मनु सिंघवी से यह कौन पूछे की इस् भारी चूक की जिम्मेदार सरकार और संबंधित एजेंसियां नहीं हैं तो और कौन है? शीला दीक्षित नें मृतकों और घायलों के परिजनों के प्रति सहानुभूति जताती नजर आयी। लेकिन शीलाजी आपकी सहानुभूति का आम आदमी क्या करे, उसे ओढ़े या बिछाए, क्या आपके सहानुभूति से उन लोगों के परिजनों के जीवन हानि या वे जिन्होंने धमाके में अपनें हाँथ-पाँव खो दिए है उनके नुकसान की भरपाई हो पायेगी, आपनें तो चूक की जिम्मेदारी इन्क्वायरी के गड्ढे में डाल दिया। अब शायद is चूक की गाज किसी छोटे-मोटे अधिकारी पर गीरेगी और उसे नाप दिया जायेगा। और जैसा कि लगभग सभी आतंकी कार्रवाई के बाद एक सवाल उठ खड़ा होता है कि क्या इस् आतंकी कार्रवाई के बाद हमारी सरकार और संबंधित एजेंसियां सबक ले लेंगी? क्या आइन्दा इस तरह की घटनाओं को रोकने का तरीका निकाल लिया जायेगा ? या इस घटना के बाद भी सरकारें और संबंधित एजेंसियां सोती रहेंगी और देश का आम आदमी इन आतंकी कार्रवाईयों का शिकार होकर लगातार मरता रहेगा। और इस तरह के धमाकों को रोकने के लिए (गलत) नीतियां बनाने के जिम्मेदार लोग सत्ता के गलियारे में उसी पुराने ठसक के साथ सत्ता की मलाई खाने में मशगूल हो जायेंगे या देश की आम जनता इन्हें इनकी जिम्मेदारियों का एहसास करायेगी। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7487976217609902819?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7487976217609902819/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7487976217609902819&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7487976217609902819'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7487976217609902819'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/09/blog-post_07.html' title='सोती सरकारें मरते लोग'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-xM-jKtq4xrk/TmeppsGoUfI/AAAAAAAAAN8/ZgkoZ7g_GeA/s72-c/delhi.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-926687842249799604</id><published>2011-09-04T00:27:00.000-07:00</published><updated>2011-09-04T22:11:50.756-07:00</updated><title type='text'>कुपोषण के काल के गाल में नौनिहाल</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; FLOAT: left; HEIGHT: 246px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5648403621997170018" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-aP_MJ9OZjUs/TmMpKu0rzWI/AAAAAAAAAN0/xiys2_P5XGA/s400/child_a_506461248.jpg" /&gt;भिवंडी, शाहपुर, वाडा, मोखाड़ा, पालघर, दहाणू, व तलासरी के इलाके देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से १०० किलोमीटर के दायरे में पड़ते है। लेकिन १०० किलोमीटर दूर मुंबई अगर अपने ऐशो आराम के लिए जानी जाती है तो मुंबई से सटे ये इलाके इन दिनों किसी और कारण से चर्चा में है। यह कारण है अबोध बच्चों की कुपोषण से मौत। भारी संख्या में बसे आदिवासी और उनके बच्चे भूख और कुपोषण के चलते कीड़े-मकोड़ों की तरह मरने को अभिशप्त है। बीते महीने अगस्त के आख़िरी सप्ताह में खबर आयी कि इन उपरोक्त इलाकों में कम से कम १५० आदिवासी बच्चों की कुपोषण से मौत हो गई तथा हजारों की संख्या में बच्चे आब भी कुपोषण के कारण मौत के कगार पर हैं।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;यह खबर भी तब आ रही है जब देश भर में १ से ७ सितंबर के बीच राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जा रहा हैराष्ट्रीय पोषण सप्ताह के बीच कुपोषण से मौत की ख़बरें स्तब्ध कर देने वाली है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून २०११ तक कुपोषण से ठाणे जिले में कुल १५८ मृत्यु दर्ज की गई। इसमें ११९ बच्चों की उम्र केवल १ वर्ष है तथा बाकी बच्चों की उम्र ६ वर्ष तक है। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में ५५, मई में ४९, और जून में ५४ बच्चों की मृत्यु कुपोषण से हुई इस वर्ष के आंकड़ों के अनुसार भिवंडी में ३, वसई में १, मुरबाड में ३, शाहपुर में १४, वाडा में ६, दहाणू में ७, मोखाड़ा में ५, जव्हार में ६, और विक्रमगढ़ में १, बच्चे की मौत कुपोषण के कारण हुई। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;इन कुपोषण से लगातार हो रही मौतों के संबंध में अगर ठाणे जिले के स्वास्थ्य विभाग के दावे को माने तो कुपोषण से हो रही इन मौतों में ३०% की कमी आयी है प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मोखाड़ा तालुका में ही कुल ९४३७ बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। बताया जाता है कि मोखाड़ा तालुका में सामान्य कुपोषित बच्चों की संख्या ५९९०, तथा मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या ३१६५ और तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या २८२ सहित कुल ९४३७ बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। उन २८२ कुपोषित बच्चों की हालत दिनों-दिन बद-से बदतर होती जा रही है और जिले का स्वास्थ्य विभाग आंकड़े इकट्ठे करने और उसकी तुलना पिछले वर्ष कुपोषण से हुई मौतों से करने में मशगुल है। जबकि स्वास्थ्य विभाग को यह मालूम रहता है कि कुपोषण का गंभीर खतरा सबसे अधिक बच्चों के गर्भ में आने से लेकर ३३ महीने तक रहता है। और कुपोषणग्रस्त इलाकों में कम से कम ६ वर्ष तक नजर रखना आवश्यक होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि फुला हुआ पेट, थका हुआ चेहरा और बेहद पतले हांथ-पैर बच्चों में कुपोषण के आम लक्षण हैं। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;आपको याद दिला दें कि दिसंबर २०१० में एक खबर आयी थी कि देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई शहर में १४ बच्चे भुखमरी और कुपोषण के कारण काल के गाल में समा गए थे। इस भूखमरी और कुपोषण से प्रशासन और सरकार बेखबर थी जब मीडिया के द्वारा खबरें निकलकर आयी तो पता चला कि मुंबई के गोवंडी इलाके में पांच साल और उससे कम उम्र के १४ बच्चे भूख और कुपोषण के शिकार हो गए। पता चला था कि गोवंडी के झोपड़पट्टी में ६५% बच्चे कुपोषण के शिकार थे। इस मामले का खुला तब हुआ जब मुंबई की टाटा इंस्टीट्युट ऑफ़ सोशल साईंस से जुडी एक स्वयंसेवी संस्था नें जब गोवंडी झोपड़पट्टी का सर्वे किया। कुल ६०० परिवारों का सर्वे करनें पर उन्हें पता चला कि इन ६०० परिवारों के बीच कुल १४ बच्चे कुपोषण के वजह से मौत के शिकार हुए और गोवंडी की झोपड़पट्टी में ६५ % कुपोषण के शिकार बच्चे कमजोरी के कारण नियुमोनिया, मेनेंजाईटीस, और डायरिया से जूझ रहे थे। अब अगर पिछले साल ही सही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का यह हाल था तो मुंबई से सटे ठाणे जिले के आदिवासी इलाके के १५८ बच्चों की भूख और कुपोषण से हुई मौत आश्चर्य तो नहीं किन्तु शासन और प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर चिंता का सबब बनता है। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;हमारे शासकों द्वारा बताया जा रहा है कि भारत तेजी से विश्व की एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हो रहा है और इस विकास दर को ८.५ का बताया जा रहा है । देश के नीतिनिर्धारकों के लिए क्या यह शर्म की बात नहीं है कि इस तेजी से विकसित हो रहे देश में बच्चों की एक बड़ी आबादी कुपोषण के कारण तिल-तिल कर मरने को मजबूर है आंकड़े बताते हैं कि देश में प्रति वर्ष ६,००,००० बच्चों की मौत कुपोषण के कारण हो जाती है। वैश्विक संस्थाओं, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और तमाम गैर सरकारी संगठनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में बाल कुपोषण की खतरनाक स्थिति का पता चलता है। देश में ४३% बच्चे कुपोषण के वजह से सामान्य से कम वजन के हैं। और ५ वर्ष से कम उम्र के करीब ७०,००,००० बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार हैं। वैश्विक भूख सूचकांक नें भी २०१० की अपनी रिपोर्ट में भारत में कुपोषण की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी वैश्विक भूख सूचकांक की रिपोर्ट में शामिल १२२ विकासशील देशों की सूची में भारत ६४ वें स्थान पर था इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व के सामान्य से कम वजन वाले बच्चों में से ४२ % बच्चे भारत में ही हैं।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;सरकार और उसके नुमाइन्दों द्वारा आमतौर पर यह तर्क दिया जाता है कि कुपोषण की समस्या का मूल कारण आबादी है पर अगर हम अपनी तुलना चीन से करेंगे तो हमारी सरकार और उसके नुमाइन्दों का तर्क हमें खोखला और बेमानी लगने लगता है क्योंकि चीन की जनसंख्या हमारे देश से कहीं अधिक है। फिर भी वहां कुपोषण के शिकार बच्चे हमारे देश से छह गुणा कम है। सरकार नें बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए कई योजनायें और जागरूकता कार्यक्रम भी चलायें हैं। छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए समेकित बाल विकास योजना शुरू कई गई। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन खाद्य एवं पोषण बोर्ड लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के लिए हर साल १ से ७ सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह आयोजित करता है। इस् वर्ष भी इस् सप्ताह के दौरान देश भर में कार्यशालाओं, शिविर, प्रदर्शनी आदि का आयोजन कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है। लेकिन लगातार कुपोषण से हो रही मौतों के आकड़ें ऐसे प्रयासों, कार्यक्रमों और नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-926687842249799604?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/926687842249799604/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=926687842249799604&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/926687842249799604'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/926687842249799604'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='कुपोषण के काल के गाल में नौनिहाल'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-aP_MJ9OZjUs/TmMpKu0rzWI/AAAAAAAAAN0/xiys2_P5XGA/s72-c/child_a_506461248.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7452996281171547330</id><published>2011-08-28T01:52:00.000-07:00</published><updated>2011-08-28T02:26:49.652-07:00</updated><title type='text'>अरे रे... स्वामी अग्निवेश.. ए क्या कर रहे हो महाराज च.. च..</title><content type='html'>&lt;iframe height="344" src="http://www.youtube.com/embed/MlbrlfhqVKo?fs=1" frameborder="0" width="425" allowfullscreen=""&gt;&lt;/iframe&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;ये है स्वामी अग्निवेश का असली चेहरा....स्वामी अग्निवेश भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे और देश के उन करोड़ों आन्दोलनकारियों के आन्दोलन का हिस्सा बनकर किस तरह सरकार के भेदिये का काम कर रहे है । इसका खुलासा या यूं ट्यूब का सवा मिनट का विडियो करता है इस् विडियो में स्वामीजी संभवतः कपिल सिब्बल से बात कर रहे है। उन्हें समझा रहे है कि कैसे सरकार जितना झुकती जा रही है उतना ही ये लोग अर्थात अन्ना हजारे के लोग सिर पर चढ़ रहे है। इसे आप खुद सुनें और अपने विचारों से हमें अवगत करायें। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7452996281171547330?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7452996281171547330/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7452996281171547330&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7452996281171547330'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7452996281171547330'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/swami-agnivesh-kapil-sibal-caughtflv.html' title='अरे रे... स्वामी अग्निवेश.. ए क्या कर रहे हो महाराज च.. च..'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://img.youtube.com/vi/MlbrlfhqVKo/default.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-1254825307798589403</id><published>2011-08-22T04:55:00.000-07:00</published><updated>2011-08-22T07:31:44.793-07:00</updated><title type='text'>उम्मीद की लौ</title><content type='html'>&lt;div align="center"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-StTqHIR2h_Y/TlJEPi9hGNI/AAAAAAAAANs/k2OWW8aI9hk/s1600/HAZARENEW.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 513px; DISPLAY: block; HEIGHT: 371px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5643648316922206418" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-StTqHIR2h_Y/TlJEPi9hGNI/AAAAAAAAANs/k2OWW8aI9hk/s400/HAZARENEW.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;अब संसद के पीछे &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;छिपने लगे है नेता &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;और जनता सड़क पर &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;उतर गयी है&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;१२० करोड़ जनता नें &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;तय कर लिया है&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;कि वे जगाकर रहेंगे ५४५ &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;सोये हुए लोगों को &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;अन्ना का &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;स्वास्थ्य गिर रहा है &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;गिर रही है सरकार की &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;लोकप्रियता भी &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;हे ईश्वर &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;सलामत रखना &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;अन्ना को और उनके &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;स्वास्थ्य को भी&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;क्योंकि उन्होंने &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;जनता के मन में &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;उम्मीद की लौ&lt;br /&gt;जला दी है &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-1254825307798589403?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/1254825307798589403/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=1254825307798589403&amp;isPopup=true' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1254825307798589403'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1254825307798589403'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_22.html' title='उम्मीद की लौ'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-StTqHIR2h_Y/TlJEPi9hGNI/AAAAAAAAANs/k2OWW8aI9hk/s72-c/HAZARENEW.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-8980500137692341119</id><published>2011-08-20T04:43:00.000-07:00</published><updated>2011-08-20T05:01:04.049-07:00</updated><title type='text'>स्विस बैंक तथा अन्य बैंकों में जमा भारतियों के काले धन की सूची</title><content type='html'>स्विस बैंक तथा अन्य बैंकों में जमा भारतियों के काले धन की सूची जुलियस अन्साजे नें अपने वेब साईट विकीलीक्स के माध्यम &lt;span&gt;से दिनांक &lt;span&gt;०२/०८/२०११ को&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; जारी की है। इस् सूची की जानकारी हमें &lt;a href="http://www.newsofdelhi.com/featured-post/wikileaks-releases-some-of-the-indian-black-money-holders-list"&gt;न्यूज़ ऑफ़ डेल्ही डाट काम&lt;/a&gt; पर मिली। इसे आप भी देखें और अपनी टिप्पणी से हमें अवगत कराएँ। &lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-IU5Mtx0beIc/Tk-eO7rtM1I/AAAAAAAAANg/jGfAgx5XuEY/s1600/Wikileaks-Black-Money-Holders-India.png"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 536px; DISPLAY: block; HEIGHT: 384px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5642902837494887250" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-IU5Mtx0beIc/Tk-eO7rtM1I/AAAAAAAAANg/jGfAgx5XuEY/s400/Wikileaks-Black-Money-Holders-India.png" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-8980500137692341119?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/8980500137692341119/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=8980500137692341119&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/8980500137692341119'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/8980500137692341119'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_20.html' title='स्विस बैंक तथा अन्य बैंकों में जमा भारतियों के काले धन की सूची'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-IU5Mtx0beIc/Tk-eO7rtM1I/AAAAAAAAANg/jGfAgx5XuEY/s72-c/Wikileaks-Black-Money-Holders-India.png' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-1673898904194985172</id><published>2011-08-19T22:50:00.000-07:00</published><updated>2011-08-19T23:41:41.102-07:00</updated><title type='text'>यह परिवर्तन की लहर है...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;यह परिवर्तन की लहर है। आजादी की दुसरी लड़ाई है। अहिंसा से क्रांति पुरी होकर रहेगी। क्रांति कैसी होती है, नौजवानों ने दिखा दिया है । शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलकर लोग यूं ही साथ देते रहें। उपवास से मेरा वजन घट रहा है मगर युवा शक्ति देखकर उतनी ही उर्जा भी मिल रही है। हम सबको सुखद भविष्य के सपने पूरे करने हैं । जीत हमारी ही होगी । भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सभी को कमर कसनी है । तभी हम मंजिल तक पहुंचेगें । &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="right"&gt;अन्ना &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="right"&gt;&lt;/div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-yWGuP8cghps/Tk9Tc6geXeI/AAAAAAAAANY/FNCkkE3b3wU/s1600/anna%2Bhazare.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 467px; DISPLAY: block; HEIGHT: 463px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5642820614325427682" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-yWGuP8cghps/Tk9Tc6geXeI/AAAAAAAAANY/FNCkkE3b3wU/s400/anna%2Bhazare.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-1673898904194985172?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/1673898904194985172/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=1673898904194985172&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1673898904194985172'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1673898904194985172'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_19.html' title='यह परिवर्तन की लहर है...'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-yWGuP8cghps/Tk9Tc6geXeI/AAAAAAAAANY/FNCkkE3b3wU/s72-c/anna%2Bhazare.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-8993147931314019246</id><published>2011-08-18T01:31:00.000-07:00</published><updated>2011-08-28T02:41:46.203-07:00</updated><title type='text'>भ्रष्टाचार ख़त्म हो अड़ा है आदमी</title><content type='html'>सत्ता की जिद्द से&lt;br /&gt;लड़ा है आदमी&lt;br /&gt;जीत के मुहाने पर&lt;br /&gt;खड़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह देश आज मांगता है&lt;br /&gt;आपसे समर्थन&lt;br /&gt;देखो नया इतिहास&lt;br /&gt;गढ़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह जता दिया है&lt;br /&gt;अन्ना के अनसन नें&lt;br /&gt;सांसद, सरकार से&lt;br /&gt;बड़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जनता की जीत हो&lt;br /&gt;इस जनांदोलन में&lt;br /&gt;स्वेक्षा से कूद&lt;br /&gt;पड़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चाहे इंडिया गेट हो या&lt;br /&gt;हो तिहाड़ जेल&lt;br /&gt;अहिंसा का पाठ&lt;br /&gt;पढ़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शहर-२ से कर रहा है&lt;br /&gt;दिल्ली को कूच&lt;br /&gt;तिरंगा लहराकर&lt;br /&gt;बढ़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;युवा चल दिया है आज&lt;br /&gt;बापू की राह&lt;br /&gt;भ्रष्टाचार खत्म हो&lt;br /&gt;अड़ा है आदमी&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-8993147931314019246?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/8993147931314019246/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=8993147931314019246&amp;isPopup=true' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/8993147931314019246'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/8993147931314019246'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_18.html' title='भ्रष्टाचार ख़त्म हो अड़ा है आदमी'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7465247303245116343</id><published>2011-08-16T04:35:00.000-07:00</published><updated>2011-08-16T04:49:48.680-07:00</updated><title type='text'>इस देश को बचाना है</title><content type='html'>एलाने-जंग हो गया&lt;br /&gt;मोह भंग हो गया&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब जंग भ्रष्टाचार से&lt;br /&gt;केंद्र की सरकार से&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह पुनीत कार्य है&lt;br /&gt;क्या तुम्हे स्वीकार्य है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राष्ट्र की पुकार सुन&lt;br /&gt;अन्ना की हुंकार सुन&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमर सपूत हो अगर&lt;br /&gt;उठो चलो धरो डगर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मां भारती का कर्ज है&lt;br /&gt;हम सबका यही फर्ज है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस देश को बचना है&lt;br /&gt;जेल में भी जाना है&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7465247303245116343?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7465247303245116343/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7465247303245116343&amp;isPopup=true' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7465247303245116343'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7465247303245116343'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_16.html' title='इस देश को बचाना है'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7624326220238272533</id><published>2011-08-15T04:47:00.000-07:00</published><updated>2011-08-15T05:02:56.297-07:00</updated><title type='text'>दिल्ली की सरकार संभल जा</title><content type='html'>दिल्ली की सरकार संभल जा&lt;br /&gt;वो गांधी का अनुयायी है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहते है सब अन्ना उसको&lt;br /&gt;वह देश का बड़ा भाई है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तन मन धन सब दान दिया&lt;br /&gt;भारत माता का लाल है वो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मानो मांग जनलोकपाल की&lt;br /&gt;वर्ना फिर महा काल है वो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अनसन पर गर बैठ गया तो&lt;br /&gt;समझो शामत आ जायेगी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और महंगा होगा जेल भेजना&lt;br /&gt;दिल्ली की सत्ता जायेगी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मत करो उपेक्षा जनहित की&lt;br /&gt;अब अपना मुह मत मोड़ो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जनअधिकारों को मान्य करो&lt;br /&gt;आसुरी प्रवित्ति छोडो&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7624326220238272533?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7624326220238272533/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7624326220238272533&amp;isPopup=true' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7624326220238272533'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7624326220238272533'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_15.html' title='दिल्ली की सरकार संभल जा'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-6022824902669025832</id><published>2011-08-11T07:19:00.000-07:00</published><updated>2011-08-11T07:30:29.238-07:00</updated><title type='text'>रक्षा करो अन्नदाता की</title><content type='html'>अरे किसान की कौन सुने&lt;br /&gt;सत्ता का खेल जारी है&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;जंगल जमीन सब छीन रहे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;अब पानी की बारी है &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;सुन सकते हो लालबहादुर &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;क्या हुआ तुम्हारा नारा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;जो अधिकारों की मांग करे &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो मारा जाय बेचारा &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;पुलिस कर रही हत्याएं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;और सरकारें सोती हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;आह, चार को मार दिए &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;भारत माता भी रोती हैं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;वो किसान हैं कहाँ जांय&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;क्या करें तुम्ही बतलाओं &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;रक्षा करो अन्नदाता की &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;स्वर्ग से वापस आओ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-6022824902669025832?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/6022824902669025832/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=6022824902669025832&amp;isPopup=true' title='6 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6022824902669025832'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6022824902669025832'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post_11.html' title='रक्षा करो अन्नदाता की'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-6275730315323975892</id><published>2011-08-04T07:23:00.000-07:00</published><updated>2011-08-04T07:51:50.380-07:00</updated><title type='text'>बहुत हुआ यह अत्याचार</title><content type='html'>आम जनों को पता नहीं था&lt;br /&gt;महंगाई की मार पड़ेगी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कालेधन और लोकपाल पर&lt;br /&gt;मनमोहन सरकार अड़ेगी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर आमजन जाग गया तो&lt;br /&gt;तुम चुनाव जाओगे हार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकारों अब दिशा बदल दो !&lt;br /&gt;बहुत हुआ यह अत्याचार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भुला दिया तुमने जनता को&lt;br /&gt;धनपशुओं का रख्खा ध्यान&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनके ही शोषण में फंसकर&lt;br /&gt;फांसी लगाकर मरें किसान&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐश कर रहे नेता-मंत्री&lt;br /&gt;खूब कर रहे पापाचार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकारों अब दिशा बदल दो !&lt;br /&gt;बहुत हुआ यह अत्याचार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अधिकारी घुसखोर हो गये&lt;br /&gt;जनप्रतिनिधि चोर हो गये&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जनता त्राहि त्राहि करती है&lt;br /&gt;भूख कुपोषण से मरती है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दलित, किसान व मजदूरों के&lt;br /&gt;छिने जा रहे है अधिकार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकारों अब दिशा बदल दो !&lt;br /&gt;बहुत हुआ यह अत्याचार !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-6275730315323975892?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/6275730315323975892/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=6275730315323975892&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6275730315323975892'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6275730315323975892'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='बहुत हुआ यह अत्याचार'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-3799186005402276798</id><published>2011-07-28T01:38:00.000-07:00</published><updated>2011-07-28T01:44:55.548-07:00</updated><title type='text'>मुंबई शहर की समेकित बाल विनाश योजना</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-mS4qgHOmA_k/TjEhWvaZZFI/AAAAAAAAANQ/7Qgy3QmysWk/s1600/girl_making_toys_mumbai.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5634321283385222226" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 267px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-mS4qgHOmA_k/TjEhWvaZZFI/AAAAAAAAANQ/7Qgy3QmysWk/s400/girl_making_toys_mumbai.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के कार्यक्रम अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा हेतु तमाम अन्य योजनाओं के माध्यम से सरकार द्वारा करोड़ों का बजट आबंटित किया जा रहा है. ज्ञात हो कि इस मद में वर्ष २००९-१० में ८१७२ करोड़ तथा वर्ष २०१०-११ में ८७०० करोड़ रुपया आबंटित किया गया किन्तु क्या यह आपको पता है कि आईसीडीएस कार्यक्रम के लिए आबंटित इस भारी भरकम धनराशि का लाभ उन ३ करोड ५० लाख बच्चों को मिल पा रहा है, सरकार द्वारा जिन्हें लाभान्वित होने का दावा किया जा रहा है ? समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत मुंबई में चल रही आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) को केंद्रित करके जब हमने इस विषय का अध्ययन किया तो काफी चौकाने वाले तथ्य उभर कर सामने आये जोकि काफी चिंताजनक हैं.&lt;br /&gt;समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) और उसी की तर्ज पर ही महाराष्ट्र राज्य में संचालित योजना “एकात्मिक बाल विकास योजना” के तहत कुल ८८ हजार २ सौ ७२ आँगनवाड़ियों को संचालित किया जा रहा है और बताते है कि महाराष्ट्र में इस योजना से ८६ लाख ३२ हजार बच्चे लाभान्वित हो रहे है किन्तु जब हमने इस आँगनवाड़ी योजना को लेकर मुंबई की स्थिति की जानकारी इकट्ठी की तो हमने पाया कि इन आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) की आड में भारी पैमाने पर गडबडियां की जा रही हैं. इन आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) से संबंधित गडबड़ियों एवं भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबे प्रकल्प अधिकारियों ( Project Officer) से लेकर आँगनवाडी कार्यकर्ता सभी शामिल है. इस योजना के मुंबई में संचालन का जिम्मा कुल ३२ प्रकल्प अधिकारियों ( Project Officer) पर है प्रत्येक प्रकल्प अधिकारी के अंतर्गत २० से २५ आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) प्रत्येक आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) में अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे कम से कम ३० और अधिक से अधिक ५० बच्चे है. इस तरह मुंबई में सरकार द्वारा चलाई जा रही इन आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) में लगभग २८ हजार बच्चे अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे है.&lt;br /&gt;इन आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) के प्रत्येक बच्चे के लिए पूरक पोषाहार के रूप में मध्यान्ह भोजन ( Mid Day Meal) के रूप में प्रत्येक बच्चों के लिए १०० ग्राम प्रतिदिन पोषक तत्वों से भरपूर पका हुआ भोजन जिसमें एनपी एनएसपीई २००६ के संशोधित नियम के अनुसार पोषण सामग्री जिसमें ४५० कैलोरी, १२ प्रोटीन एवं सूक्ष्म आहार के रूप में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन-ए, इत्यादि सक्षम आहारों की पर्याप्त मात्रा हो, दिया जाना चाहिए. मुंबई के जिस आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) में ५० बच्चे अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं उन्हें पोषक तत्वों से भरपूर पका हुआ भोजन १०० ग्राम के हिसाब से ५ किलो मिलना चाहिए किन्तु किन्तु आलम यह है कि इन केन्द्रों पर ठेकेदार संस्थाओं द्वारा दो से ढाई किलो ही पका हुआ खाना आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) के बच्चों में वितरित कर रहे है तथा इस चोरी के एवज में आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) कार्यकर्ता को ५० रूपये प्रतिदिन रिश्वत के रूप में दे रहे है.&lt;br /&gt;५० रूपये रिश्वत पा जाने पर आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) कार्यकर्ता पोषक आहार मुहैया कराने वाले ठेकेदार के ५ किलो के चालान पर आँख बंद करके हस्ताक्षर कर रहे है. अगर आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) के बच्चों को दिया जाने वाला पका हुआ भोजन आधा से अधिक चोरी कर रहे हैं. तो पौष्टिक आहार के (Composition) जैसे कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन-ए, आदि सक्षम आहारों के समिश्रण के अनुपालन का तो भगवान ही मालिक है. पोषक आहार उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों द्वारा प्रकल्प अधिकारी ( Project Officer) को उनके रिश्वत का हिस्सा पहुंचाया जाता है. बताया जाता है कि आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) कार्यकर्ताओं के ऊपर पर्यवेक्षक का एक पद होता है. एक पर्यवेक्षक के अनुसार उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता. जो पर्यवेक्षक इन आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) में नियमतः काम करवाना चाहते है उन्हें या तो शीर्षस्थ अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित कर चुप करा दिया जाता है या तो उनका स्थानांतरण कर दिया जाता है.&lt;br /&gt;मुंबई में चल रहे आँगनवाड़ियों (बालवाड़ी) की योजना में करोड़ों रूपये का घोटाला केवल हुआ ही नहीं बल्कि लगातार हो रहा है. बावजूद इसके इस योजना का महाराष्ट्र में पिछले ५ वर्षों से ऑडिट नहीं किया गया है. भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबे अधिकारियों की रिपोर्ट को सही मानकर योजना की धनराशि बढाकर मुहैया करा दी जाती है और इस योजना से भ्रष्टाचार का परनाला लगातार बहता रहता है. उस पर तुर्रा यह कि अभी हाल में ही आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) कर्मियों के मानदेय को दुगना कर दिया गया पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडल समिति की बैठक में आँगनवाड़ी कर्मियों को दिये जा रहे मानदेय को १५०० रूपये प्रति माह से बढ़ा कर ३००० हजार करने को मंजूरी दी गई. कैबिनेट की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा कि अर्ध आँगनवाड़ी कर्मियों को समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के तहत अब ७५० रूपये प्रतिमाह के स्थान पर १५०० रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया जायेगा. सवाल यह है कि क्या इस बढे हुए मानदेय के मद्देनजर आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) कार्यकर्ता भारी पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार से अलग कर लेंगे, शायद नहीं.&lt;br /&gt;“निरक्षरता हमारे लिए पाप और शर्मनाक है इसका नाश किया जाना चाहिए” महात्मा गांधी के इसी आदर्श वाक्य के मद्देनजर तथा भारत सरकार की राष्ट्रीय बाल नीति जिसमें कि बच्चों को राष्ट्र की परम महत्वपूर्ण संपत्ति माना गया है, से हुआ. इस योजना का नाम समेकित बाल विकास योजना रखा गया इसकी नीव १९७४ में रखी गई तथा इसकी शुरूवात महात्मा गांधी के जन्म दिवस २ अक्टूबर को वर्ष १९७५ की गई प्रयोग के तौर पर यह कार्यक्रम उस समय संपूर्ण भारत के केवल ३३ खण्डों में चलाया गया किन्तु आज के समय में इसका विस्तार पुरे देश में व्यापक रूप से हो चुका है इस कार्यक्रम का उद्देश्य छ: साल तक के आयु के बच्चों पोषण व स्वास्थ्य में सुधार लाना, बच्चों के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक व बौद्धिक विकास की नीव रखना, बाल मृत्यु दर व बच्चों के कुपोषण में कमी लाना, बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर [ ड्राप आउट] {राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की ओर से २००९ में किए गए अध्ययन के मुताबिक ८१.५० लाख बच्चों ने स्कूली शिक्षा अधूरी छोड़ी जो ६-१३ आयुवर्ग के बच्चों की आबादी के ४.२८ प्रतिशत है} में कमी लाना, गर्भवती व दूध पिलाने वाली माताओं के स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार लाना, महिलाओं में स्वास्थ्य व पोषण के बारे में जागृती लाकर उन्हें इस काबिल बनाना कि वे अपने परिवार तथा विशेषतौर से अपने बच्चों की पोषाहार व स्वास्थ्य की जरूरतों को स्वयं पूरा कर सकें. इन समेकित बाल विकास योजना के तहत संचालित आँगनवाडियों के माध्यम से दी जाने वाली सेवाएं निम्नलिखित है जैसे पूरक पोषाहार, अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जां, पोषाहार एवं स्वास्थ्य शिक्षा ( महिलाओं के लिए) और संदर्भ सेवाएं प्रमुख है.&lt;br /&gt;इस समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत चलाई जा रही आँगनवाड़ियों के माध्यम से बच्चों को दी जा रही अनौपचारिक स्कूल पूर्व शिक्षा जिसे मुंबई में बालवाड़ी योजना के नाम से जाना जाता है, में चल रहे भारी भ्रष्टाचार को देखकर यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि इस योजना का मुंबई जैसे शहर में जहाँ अत्यधिक जागरूक नागरिक बसते है, यह हाल है तो भारत के दूर-दराज के गाँव में क्या होता होगा इसमें कोई शक नहीं कि भारत के दूर-दराज के गाँव में आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) केवल कागजों पर ही होती होंगी. ऐसे में भारत सरकार की राष्ट्रीय बाल नीति जिसमें कि बच्चों को राष्ट्र की परम महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है, के क्या मायने है और आखिर यह सवाल किससे किया जाना चाहिए कि बच्चों के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक व बौद्धिक विकास की नीव रखने की जिम्मेदारीयुक्त आँगनवाड़ी (बालवाड़ी) में चल रहे भारी भ्रष्टाचार और उनके पोषक आहार पर डाले जा रहे डाके को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह लेख विस्फोट.कॉम पर २७ जुलाई २०११ को प्रकाशित हो चुका है&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-3799186005402276798?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/3799186005402276798/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=3799186005402276798&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3799186005402276798'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3799186005402276798'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/07/blog-post.html' title='मुंबई शहर की समेकित बाल विनाश योजना'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-mS4qgHOmA_k/TjEhWvaZZFI/AAAAAAAAANQ/7Qgy3QmysWk/s72-c/girl_making_toys_mumbai.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-6928195002847828784</id><published>2011-03-04T03:18:00.000-08:00</published><updated>2011-03-04T03:32:23.151-08:00</updated><title type='text'>कैसे होगा मानवाधिकारों का संरक्षण ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-2JSpagTpZO4/TXDMBz0PpsI/AAAAAAAAAM4/trbWAZVbPnA/s1600/balakrishnan.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5580184269773317826" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 302px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-2JSpagTpZO4/TXDMBz0PpsI/AAAAAAAAAM4/trbWAZVbPnA/s400/balakrishnan.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;देश के मानवाधिकार आयोगों में बैठे लोगों के कारण मानवाधिकार आयोगों की भारी किरकिरी हो रही है मौजूदा समय में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के। जी. बालाकृष्णन के ऊपर लगातार हो रहे आरोपों की बौछार से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जो स्थिती है वह किसी से छुपी नहीं है के. जी. बालाकृष्णन के तीन रिश्तेदारों के खिलाफ चल रहे आय से अधिक सम्पति के आरोपों की जांच में उनके पास काला धन होने की खबर आने से भी के. जी. बालाकृष्णन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद से चिपके हुए है इन विवादों के चलते पूर्व चीफ जस्टिस जे. एस. वर्मा ने २७ फरवरी २०११ को बालाकृष्णन से एनएचआरसी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर पूर्व चीफ जस्टिस को हटाने के लिए राष्ट्रपति को मामले में दखल देनी चाहिए. वर्मा ने कहा कि अगर आरोप सच नहीं हैं तो उन्हें गलत साबित करने की जिम्मेदारी भी बालाकृष्णन की ही है. ऐसे वक्त में चुप्पी साधना कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर पूर्व सीजेआई चुप रहने का विकल्प चुनते हैं और खुद को बेदाग नहीं साबित करते तो उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जानी चाहिए. इस मामले में कोच्चि के डायरेक्टर जनरल ऑफ इनकम टैक्स (इन्वेस्टिगेशन)ई. टी. लुकोसे का कहना है कि जहां तक पूर्व सीजेआई बालाकृष्णन का सवाल है तो अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकता लेकिन जहां तक उनके रिश्तेदारों का सवाल है तो हमने उनके मामले में ब्लैक मनी की मौजूदगी पाई है. यह अफ़सोसजनक है कि इस नई संस्कृति का शिकार अब नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए बने संस्थान हो रहे है, मानवाधिकार आयोग हो, सूचना आयोग, महिला आयोग, बाल अधिकार आयोग या न्यायपालिका सबकी स्थिति लगभग एक जैसी ही है सभी जगहों पर सत्ता के एजेंट ही बैठे है और उनका तालमेल अद्भुत है, मजाल कही आम आदमी के लिए कोई एक छेद भर भी गुंजाईस हो. चोरी और सीनाजोरी की यह व्यवस्था मुकम्मिल तौर पर इस सत्ता और उसके एजेंटो की है ना कम ना ज्यादा पूरी की पूरी जमीनी लूट से उपरी न्यायपालिका और आसमानी सत्ता तक अब बालकृष्णन से आप क्या आशा कर सकते है, न्याय की, नहीं आप तो केवल सत्ता की वफ़ादारी की ही आशा कीजिये, इसी मे आपकी समझदारी है और उनकी सुविधा भी.&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;मुंबई के अख़बारों में दिनांक २५ फरवरी २०११ को एक छोटी सी खबर छपी थी कि मुंबई में अशोक ढवले नामक एक पुलिस अधिकारी को ब्राउन शूगर के साथ रंगे हाँथ पकड़ा गया इस विषय पर जानकारी हासिल करने की उत्सुकता तब और बढ़ी जब यह पता चला कि अशोक ढवले महाराष्ट्र पुलिस में डीवायएसपी के पद पर था और तब आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब यह पता चला कि यह मादक पदार्थों का तस्कर पुलिस अधिकारी महाराष्ट्र राज्य मानव अधिकार आयोग के उस विभाग में डीवायएसपी के पद पर तैनात था जो विभाग नागरिकों से प्राप्त मानवाधिकार हनन के मामलों की जाँच करता है अशोक ढवले नामक मादक पदार्थों का तस्कर पुलिस अधिकारी को रंगे हाथ पकडनें पर मै मुंबई पुलिस को बधाई देता हूँ लेकिन मुंबई पुलिस द्वारा जारी किये गये प्रेस नोट जिसमें यह बताया गया था कि अशोक ढवले “प्रोटेक्शन ऑफ़ सिव्हिल राईट” विभाग में काम कर रहा था की निंदा करता हूँ मुंबई पुलिस नें सीधे सीधे अपने प्रेस नोट में यह क्यों नहीं बताया कि अशोक ढवले महाराष्ट्र राज्य मानव अधिकार आयोग के जाँच विभाग ( इन्क्वायरी विंग) में तैनात था आखिर मुंबई पुलिस नें महाराष्ट्र राज्य मानव अधिकार आयोग का नाम इस मामले में छुपाने का प्रयास क्यों किया जहाँ यह तस्कर अधिकारी तैनात था। यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि एक पुलिस अधिकारी ब्राउन शूगर की तस्करी करते रंगे हाथों पकड़ा गया मुद्दा ऐसे रंगे सियारों का मानवाधिकार आयोगों में बिठाये जाने का है यह चिंता का विषय है कि मौजूदा समय में ऐसा प्रतीक होता है कि भारत के मानवाधिकार आयोग अपराधियों के शरण स्थली बनते जा रहे है. &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;इसके पहले भी मुंबई से ही एक खबर आयी थी कि महाराष्ट्र राज्य के मानवाधिकार आयोग में तैनात पूर्व आईएएस अधिकारी सुभाष लाला नामक सदस्य आदर्श हाऊसिंग सोसायटी घोटाले में संलिप्त है आदर्श हाउसिंग सोसायटी मामले में अपनी भूमिका को लेकर आरोपों के घेरे में आए सुभाष लाला ने राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य के पद से इस्तीफा भी दे दिया। बताया जाता है कि सुभाष लाला महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के कृपापात्र नौकरशाहों में एक ( पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के पूर्व निजी सहायक) थे और इन्हें विलासराव देशमुख के ही कृपा से महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में सदस्य की कुर्सी मिली थी महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में सुभाष लाला को लेकर एक बात प्रचलित थी इन्हें महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में सरकार एवं पुलिस के विरुद्ध आयी शिकायतों पर सरकार एवं पुलिस के लिए सेप्टी वाल्व की तरह काम करने के लिए नियुक्त किया गया है महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायतों को लेकर जाने वाले स्वयंसेवी संगठन बताते है कि आयोग में आयी सामान्य और गंभीर दोनों किस्म की जितनी शिकायतों को सुभाष लाला नें कार्रवाई के लिए अयोग्य बताकर निरस्त किया उतनी शिकायतें किसी अन्य सदस्य नें निरस्त नहीं किया सुभाष लाला के बारे में बताया जाता है कि इनके पास मुंबई में कई बेनामी संपत्तियां और फ्लैट्स है जिससे लाखों रूपये किराये के रूप में प्राप्त होते है हालाँकि आदर्श मामले में सुभाष लाला नें सफाई दी थी कि उनके दिवंगत पिता संग्राम लाला सैन्य इंजीनियरिंग सेवा में कार्यरत थे इसीलिए आदर्श सोसायटी के मुख्य प्रमोटर आर सी ठाकुर नें उन्हें आदर्श सोसायटी में सदस्य बनाया था. वस्तुतः आदर्श सोसायटी कारगिल के शहीदों के परिजनों को आवासीय सहायता के नाम पर अवैध तरीके से बनाई गयी थी अतः सुभाष लाला के इस सफाई का क्या औचित्य है.&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;इतना ही नहीं पिछले दिनों महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के कार्य कलापों को के विरुद्ध मुंबई के एक व्यवसायी व समाजसेवी पुष्कर दामले नें मुंबई हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी यह याचिका मानवाधिकार आयोग में मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में प्राप्त शिकायतों पर कोई करवाई न किए जाने और आयोग के सदस्यों द्वारा नियमित तौर पर की गई अनियमितताओं की जाँच के लिए दायर की गयी थी। इस याचिका के लिए सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त की गई सूचनाओं से पता चला था कि जून २००८ तक २८,०८३ मामले दायर किए गए थे । परन्तु आयोग नें कारवाई का आदेश केवल ३९ मामलों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ दिया है. ये मामले राज्य के विरुद्ध थे जिसमें सरकारी अधिकारी भी शामिल थे. आयोग नें २४०७१ मामले निपटाए तथा जून २००८ तक ४०१२ मामले निपटाने बाकी थे याचिका में कहा गया था कि २४०३२ मामलों को विचारणीय न माना जाना अजीब लगता है. इसका अर्थ यह हुआ कि केवल ०.१६ प्रतिशत मामलों में ही मानवाधिकार उल्लंघन के केस साबित हो पाए क्या बाकी बकवास थे ? यह याचिका हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार तथा एस.सी. धर्माधिकारी की खंडपीठ में सुनवायी हेतु आयी थी । खंडपीठ नें इस याचिका पर राज्य सरकार से ३ सप्ताह के भीतर उत्तर देने को कहा था. याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार नें वर्ष १९९३ के मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के वर्ष २००६ के संशोधन के प्रावधानों को लागू करने का कोई प्रयास नहीं किया इस परिवर्तन से किसी भी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता तथा ४ सदस्यों वाले आयोग में मात्र एक अध्यक्ष तथा दो सदस्य रखे जाने थे पर वर्ष २००६ में आयोग केवल एक सदस्य अध्यक्ष सी.एल. थूल ( सेवानिवृत्त जिला जज) की अध्यक्षता में ६ माह तक काम करता रहा. याचिका में आरोप लगाया गया है कि २३.११.२००६ में इसके लागू होने से पूर्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित कमेटी नें ३ सदस्यों का चयन किया इनकी नियुक्ति राज्यपाल नें वास्तव में १०.११.२००६ में की थी. अब तक जो सदस्य कार्यरत रहे उनमें टी.सिंगार्वेल ( नागपुर के पूर्व पुलिस आयुक्त ) सुभाष लाला ( मुख्यमंत्री के पूर्व निजी सहायक) तथा विजय मुंशी ( उच्च न्यायलय के पूर्व जज ) याचिका में कहा गया है कि परिवर्तित एच.आर. एक्ट अभी तक महाराष्ट्र सरकार नें लागू नहीं किया है. याचिका में कहा गया था कि अपनी नियुक्ति के एक दिन बाद ही एक सदस्य कैंसर सर्जरी के लिए अवकाश पर चला गया. इस सदस्य के इलाज पर राज्य सरकार के ६.२५ लाख रूपये खर्च हुए एक अन्य सदस्य नें निर्देशों का उल्लंघन करके अपनी पत्नी के साथ अत्यधिक देश-विदेश की यात्रायें की थी इस जनहित याचिका का जिक्र करने का आशय यह नहीं कि उक्त याचिका पर मुंबई हाई कोर्ट के माध्यम से कार्रवाई की गयी या नहीं. आशय आयोगों के क्रियाकलापों को उजागर करना है.&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;मानव अधिकार आयोगों के संबंध में समय-समय पर एक बात और उजागर हो रही है कि वे नागरिक अधिकार आंदोलनों, सामाजिक और मानवाधिकार संगठनों को कुचलने का काम कर रहे है इनके क्रियाकलापों तथा जनसंगठनों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु प्रशासन और पुलिस को भेजे जा रहे पत्रों को देखकर ऐसा प्रतीक होता है कि इन सरकारी आयोगों का गठन सरकारों नें नागरिक अधिकार आंदोलनों को कुचलने के लिए ही किया है. जबकि मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम १९९३ में यह कलमबद्ध किया गया है कि मानव अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनो, संस्थाओं को मानव अधिकार आयोगों द्वारा प्रोत्साहित किया जायेगा किन्तु स्थिति इससे उलट है "मानव अधिकार जो कि आम नागरिक का मुद्दा है उसे व्यवस्था नें हड़प लिया है" तथा मानव अधिकार के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनो तथा संस्थाओं पर इन्ही आयोगों के माध्यम से हमले तेज कर दिए है उनके इन हमलों से पता चलता है कि सरकारों को ऐसे नागरिक अधिकार आन्दोलन, स्वयंसेवी संगठन, तथा संस्थाएं नहीं चाहिए जो आयोगों के क्रियाकलापों पर नजर रख सकते है उनके द्वारा गलत किये जाने पर ऊँगली भी उठा सकते. उन्हें चाहिए सरकारी मानवाधिकार आयोगों में बैठे भ्रष्ट एवं आपराधिक प्रवित्ति के लोग जो कि मानवाधिकारों के संरक्षण के नाम पर सत्ता के एजेंट के रूप में काम करें.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-6928195002847828784?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/6928195002847828784/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=6928195002847828784&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6928195002847828784'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6928195002847828784'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='कैसे होगा मानवाधिकारों का संरक्षण ?'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-2JSpagTpZO4/TXDMBz0PpsI/AAAAAAAAAM4/trbWAZVbPnA/s72-c/balakrishnan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-9046023757573147970</id><published>2011-02-11T18:17:00.000-08:00</published><updated>2011-02-11T18:53:12.206-08:00</updated><title type='text'>अच्छा है मानवाधिकार</title><content type='html'>अंजाम देखा आपने&lt;br /&gt;हुस्ने मुबारक का&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;था मिस्र का भी वही&lt;br /&gt;जो है हाल भारत का&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;परजीवियों के राज का&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; तख्ता पलट कर दो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जन में नई क्रांति का&lt;br /&gt;जोश अब भर दो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उठो आओ हिम्मत करो&lt;br /&gt;क्रांति का परचम धरो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मत भूलो यह सरोकार&lt;br /&gt;अच्छा है मानवाधिकार&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-9046023757573147970?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/9046023757573147970/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=9046023757573147970&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/9046023757573147970'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/9046023757573147970'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='अच्छा है मानवाधिकार'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7856202562167071023</id><published>2011-01-28T00:46:00.000-08:00</published><updated>2011-01-28T01:28:22.415-08:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TUKECKagX1I/AAAAAAAAAMM/u94pvcKGjCY/s1600/Yashwant.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5567157262073487186" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 258px; CURSOR: hand; HEIGHT: 350px" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TUKECKagX1I/AAAAAAAAAMM/u94pvcKGjCY/s400/Yashwant.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;गणतंत्र दिवस के पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र स्थित नाशिक जिले के अतिरिक्त जिलाधिकारी यशवंत सोनवणे की हत्या से महाराष्ट्र राज्य ही नहीं वरन पूरे देश का प्रशासन और प्रबुद्ध नागरिक भौचक्क है। महाराष्ट्र राज्य के ८० हजार राजपत्रित अधिकारी (गजटेड आफिसर) यशवंत सोनवणे की हत्या के विरोध में गुरुवार को हड़ताल पर चले गये. वास्तव में यह घटना पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. एक राजपत्रित अधिकारी को जलाकर मार डालने का दुस्साहस करने वाला तेल माफिया पोपट दत्तू शिंदे और उसके साथियों को पुलिस नें पकड़ लिया है. इस जघन्य अपराध में पोपट दत्तू शिंदे के आलावा उसका साला सीताराम भालेराव और सहायक राजू शिरसाट, काचरू सुरोद, विकास शिंदे, दीपक वोरास, तोसिफ शेख, अल्ताफ शेख एवं पोपट शिंदे का लड़का कुणाल शामिल हैं.&lt;br /&gt;अतिरिक्त जिलाधिकारी यशवंत सोनवणे की हत्या कोई साधारण घटना नहीं है यह एक आश्चर्यजनक घटना है. आखिर एक मिलावटखोर तेल माफिया एक राजपत्रित अधिकारी को जलाकर मार डालने की हिमाकत कैसे की यह जाँच का विषय है. अगर इमानदारी से इस मामले की जाँच हो जाय तो पोपट शिंदे महाराष्ट्र के किसी बड़े राजनेता के संरक्षण में अपने इस काले कारोबार को फैला रहा है इसका खुलासा हो जायेगा. लेकिन यकीन मानिए जाँच वहां तक पहुंचने ही नहीं पायेगी और पोपट शिंदे के संरक्षक पर किसी तरह की कोई आंच नहीं आयेगी. इस पोपट शिंदे के जेल या सजा हो जाने पर वह राजनेता किसी नये पोपट शिंदे को पैदाकर उसके संरक्षण में संलग्न हो जायेगा जिससे अगला पोपट शिंदे उस राजनेता के राजनैतिक और आर्थिक हवस की पूर्ति करता रहे और जरूरत पड़ने पर किसी प्रशासनिक अधिकारी की जघन्य हत्या से भी गुरेज न करे.&lt;br /&gt;गुंडाराज के मामले में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का नाम लिया जाता था किन्तु अब महाराष्ट्र राज्य के नाम का भी उसमे सुमार हो गया है यशवंत सोनवणे की हत्या भ्रष्टाचारियों और मिलावटखोरों के मनोबल को दर्शाता है इस विषय पर गुरुवार को ही केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री जयपाल रेड्डी और राज्यमंत्री आर.पी.एन. सिंह नें एमओपीएनजी और तेल विपणन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और पेट्रोलियम उत्पादों तथा रियायती ऑटो इंजन में मिलावट की समीक्षा की. यह समीक्षा मालेगांव (महाराष्ट्र) के अतिरिक्त जिलाधिकारी यशवंत सोनवणे की हत्या के मद्देनज़र की गयी जो कि पेट्रोलियम उत्पादों की चोरी रोकने के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मारे गये. मंत्री महोदय द्वय नें यशवंत सोनवणे के संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए तेल कंपनियों की ओर से उनके परिवार को २५ लाख रूपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की.&lt;br /&gt;महाराष्ट्र में जब भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट सतीश शेट्टी की हत्या की गयी उसी समय सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता नें इस तरह की हत्याओं के लिए जमीन तैयार कर दी थी. सतीश शेट्टी की हत्या में भी दबी जुबान राज्य के बड़े नेता का नाम लिया जा रहा था उस समय भी आम जन सतीश शेट्टी की हत्या से विचलित थे किन्तु सरकार चुप थी सतीश शेट्टी की बर्बर हत्या का विरोध आम जन को सड़क पर उतर कर करना चाहिए था. जो कि नहीं किया गया. सतीश शेट्टी नें भी अवैध कारोबार रोकने की कोशिश की थी और यशवंत सोनवणे नें भी किन्तु दोनों मामलों के बीच फर्क यह रहा कि यशवंत सोनवणे की हत्या के विरोध में प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के लाखों कर्मचारी हड़ताल पर चले गये तथा राज्य और केंद्र सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाने में कामयाब रहे लेकिन दुर्भाग्य बस सतीश शेट्टी के मामले में ऐसा नहीं हुआ.&lt;br /&gt;मोदी के "वाईब्रेंट गुजरात" में कुछ इसी तरह की घटना घटी यहाँ पर भी आरटीआई एक्टिविस्ट अमित जेठवा की जघन्य हत्या की गयी बताया जाता है कि अमित जेठवा भाजपा सांसद दीनू सोलंकी के काले कारनामों को उजागर कर रहे थे. जिससे क्षुब्ध होकर दीनू सोलंकी नें अपने भतीजे द्वारा अमित जेठवा की हत्या करवा दी. पांच वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में तैनात इंडियन आयल कारपोरेशन के सेल्स मैनेजर षग्मुगम मंजुनाथन की गोली मारकर हत्या भी ऐसे ही तेल माफियाओं द्वारा ही की गयी थी. वे भी लखीमपुर खीरी के कुख्यात मिलावटखोर से मिलावटखोरी बंद कराने के लिए उलझ गये थे इन हत्याओं से पेट्रोल और डीजल में मिट्टी का तेल मिलाकर मोटी कमाई करने वाले तेल माफियाओं का मनोबल कितने खतरनाक स्थिति तक बढ़ चुका है पता चलता है.सवाल यह है कि इन मिलावटखोरों, भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने के लिए किसी समाज सेवक या अफसर के शहीद होने के बाद ही सरकार की नींद टूटेगी अगर ऐसा है तो वह दिन दूर नहीं जब इन भ्रष्टाचारी मिलावटखोरों, माफियाओं को रोकने की बजाय समाज सेवक या अफसर अपनी रोजी-रोटी, परिवार तथा जीवन की फ़िक्र ज्यादा करेंगे और इनके सामने चल रहे भ्रष्टाचार या मिलावटखोरी को अनदेखा कर देंगे या शायद इस काले धंधे में हिस्सेदार भी बन जायेंगे.&lt;br /&gt;हत्या चाहे षग्मुगम मंजुनाथन और यशवंत सोनवणे जैसे कर्तव्यनिष्ठ अफसरों की हो या सतीश शेट्टी अमित जेठवा जैसे सामाजिक व्हिसल व्लोवर्स की हो इन हत्याओं के कारण समाज और सरकारी कर्मचारियों में जो संदेश जा रहा है और इस संदेश के कारण उनके भीतर जो भय व्याप्त हो रहा है वह देश के कानून और व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है अब अगर सरकारें समय रहते ऐसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लगायीं तो वह दिन दूर नहीं जब भ्रष्टाचारी, मिलावटखोर माफियाओं के द्वारा किये जा रहे हत्याओं की जद में देश के राजनेता भी होंगे. उस समय स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है. यशवंत सोनवणे की हत्या के मामले में जितना दोषी पोपट शिंदे और उसका मिलावटखोर गैंग है उससे कम दोषी उन तेल कंपनियों के अधिकारी और स्थानीय पुलिस प्रशासन नहीं है जिन्होंने पोपट शिंदे से मिलीभगत/भ्रष्टाचार करके उसे मिलावट करने की खुली छूट दी. इनसे भी अधिक दोषी वे राजनेता है जिनका वरदहस्त पोपट शिंदे जैसे मिलावटखोरों पर है. क्या इनके विरुद्ध भी यशवंत सोनवणे की हत्या के लिए परिस्थितियों के निर्माण में सहयोग करने का दोषी मानकर कार्रवाई होगी ? अगर नहीं तो आने वाले दिनों में इस तरह के अनेकों भयावह मंजर से भारतीय समाज को रूबरू होना होगा साथ ही इन तेजश्वी समाज सेवकों और अधिकारियों की हत्याओं को न रोक पाने के कलंक को ढ़ोना होगा. भारतीय लोकतंत्र के लिए यह शर्मनाक स्थिति होगी.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7856202562167071023?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7856202562167071023/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7856202562167071023&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7856202562167071023'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7856202562167071023'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2011/01/blog-post.html' title=''/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TUKECKagX1I/AAAAAAAAAMM/u94pvcKGjCY/s72-c/Yashwant.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-4038962194913517752</id><published>2010-09-14T09:14:00.000-07:00</published><updated>2010-09-14T09:19:53.637-07:00</updated><title type='text'>उसके घर का न्याय हो रहा... देखो तो</title><content type='html'>उसके घर का&lt;br /&gt;न्याय हो रहा&lt;br /&gt;देखो तो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रहसन का&lt;br /&gt;पर्याय हो रहा&lt;br /&gt;देखो तो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसका घर,&lt;br /&gt;जो कण-कण में है&lt;br /&gt;उसका घर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसका घर,&lt;br /&gt;जो जल में भी है&lt;br /&gt;थल में भी है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;है उस&lt;br /&gt;नील गगन में भी&lt;br /&gt;उसका घर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसका घर,&lt;br /&gt;तुम क्या बनवाओगे&lt;br /&gt;जो तुम्हे बनाया&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;a href="mailto:rajesh.aihrco@gmail.com"&gt;&lt;/a&gt; &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-4038962194913517752?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/4038962194913517752/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=4038962194913517752&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4038962194913517752'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4038962194913517752'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='उसके घर का न्याय हो रहा... देखो तो'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7853256408550149888</id><published>2010-08-12T02:52:00.000-07:00</published><updated>2010-08-12T03:09:36.947-07:00</updated><title type='text'>डूबते जहाज से मुंबई के पर्यावरण को गंभीर खतरा</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGPF7o5lrII/AAAAAAAAAL4/dvdwdN7rySw/s1600/MSC+Chitra.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5504460797958794370" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 210px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGPF7o5lrII/AAAAAAAAAL4/dvdwdN7rySw/s400/MSC+Chitra.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGPE44HHXDI/AAAAAAAAALw/dVcJ9guJ_0I/s1600/MSC+Chitra.jpg"&gt;&lt;/a&gt;मुंबई के समुद्री तट के पास जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) से करीब 5 (नॉटिकल) समुद्री मील की दूरी पर अरब सागर में 7 अगस्त शनिवार की सुबह 9.30 बजे पनामा के दो मालवाहक जहाज एमएससी चित्रा और एमवी खलिजिया की जोरदार टक्कर हुई इस हादसे में जहाज में सवार 33 क्रू मेंबरों को बचा लिया गया किन्तु इस टक्कर से एमएससी चित्रा के ईंधन टैंक में दरार आ जाने से जहाज (एमएससी चित्रा) डूब रहा है. और शनिवार से मुंबई के तटवर्तीय समुद्री क्षेत्र में तेल का रिसाव शुरू हो गया था बताया जा रहा है कि चित्रा के ईंधन टैंक से लगभग लगभग 500 से 800 टन तेल का रिसाव हो चूका है. चित्रा में कुल 2662 टन इंधन 283 टन डीजल और 88 टन लुब्रिकेटिंग तेल मौजूद था. भारी मात्रा में हुए तेल रिसाव से मुंबई के तटीय अरब सागर में 102 मील से अधिक के दायरे फ़ैल रहे तेल के कारण स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितिकी तंत्र और मैंग्रोव को बड़ा खतरा पैदा हो गया है. इस घटना से भारी मात्रा में मछलियों के मारे जाने की आशंका सहित समुद्री जीवन के भोजन के स्रोत स्थाई तौर पर नष्ट हो जायेंगे और भोजन नहीं मिलने से कई समुद्री प्रजातियाँ लुप्त हो जायेंगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राहत और बचाव के लिए कोस्टगार्ड के तरफ से "ऑपरेशन चित्रा" अभियान चलाया हुआ है जिसमें संकल्प, अमृत कौर, सुभद्रा कुमारी चौहान, कमला देवी, और सी-145 जहाजों को तैनात किया गया है तथा कोस्टगार्ड डोर्नियर हेलीकाप्टरों से प्रदूषण निरोधक अभियान चलाया जा रहा है. राहत और बचाव कार्यों में ओएनजीसी और जेएनपीटी की मदद ली जा रही है. मुंबई के येलोगेट पुलिस थाने में दोनों मालवाहक जहाजों के कैप्टन और चालक दल के सदस्यों के खिलाफ आईपीसी की धारा 280 (लापरवाही से जहाज चलाने), धारा 336 (दूसरों की जान जोखिम में डालने) और धारा 427 (शरारत के जरिए क्षति पहुंचाने) तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. इतना ही नहीं इनके विरुद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 7-8 और 9 के तहत मुकद्दमा दर्ज किया गया है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एमएससी चित्रा पर 1219 कंटेनर लदे हुए थे. इसमें से 31 कंटेनर में घातक रसायन थे. पिछले तीन दिनों में करीब 400 कंटेनर समुद्र में डूब गए हैं. हालांकि जहरीले रसायन वाले कितने कंटेनर डूबे हैं इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन ये कंटेनर सबसे नीचे रखे थे इसलिए इनके पानी में डूबने की आशंका कम है. दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में मैंग्रोव को भारी खतरा है साथ ही मानसून का यह वही समय है जब मछलियाँ ब्रीडिंग के लिए किनारे पर मैंग्रोव वनों तक आती है. ज्ञात हो कि भारत में मैंग्रोव कुल 3,60,000.हेक्टेयर में फैला हुआ है जोकि विश्व के कुल ज्वारीय वन का 3 % है मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, ठाणे, रायगड़ और रत्नागिरी स्थित तटीय इलाकों में मैंग्रोव बहुतायत में पाया जाता है इसी मैंग्रोव या ज्वारीय वन से जैवविविधता और तटीय परिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रहता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एमएससी चित्रा के डूबने से समुद्रीय जल में घुलने वाले तेल, रसायन, कीटनाशक तटीय मैंग्रोव वनों और उसमें रहने वाले जीवों के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है. तटीय जीवों के संबंध में कहा जाता है कि प्राय: जीव ज्वारीय विस्तार एवं ज्वारीय आयाम से संबंधित होते है. मैंग्रोव वनों में पाए जाने वाले वन्य जीवन अद्भुत विविधता लिए होता है. मैंग्रोव वनों में पाए जाने वाले जीवों में मुख्यत: अकशेरुकी जीव तथा कीट आते है. पोरीफेरा, स्नाईडेरिया, आर्थोपोडा वर्गों के जीव जड़ों के आस-पास पाए जाते है. मैंग्रोव क्षेत्रों अति महत्वपूर्ण जीवों की सैकड़ों-सैकड़ों प्रजातियाँ पायी जाती है जैसे केकड़ो की लगभग 275 प्रजातियाँ. समुद्री मछलियों की अनेक प्रजातियाँ केवल मैंग्रोव क्षेत्रों तक ही सीमित और निर्भर रहती हैं.मैंग्रोव क्षेत्रों में छोटी मछलियों के जीवन के लिए अति आवश्यक भोजन तथा आश्रय प्राप्त होते है. मूंगे की चट्टानों (कोरल रीफ) में पाए जाने वाले तमाम जीवों के जीवन चक्र में मैंग्रोव क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. तटीय क्षेत्रों पर पायी जाने वाली मछलियों की संख्या पर मैंग्रोव वनों का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंग्रोव की जड़े मछलियों के लार्वा तथा छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान करती हैं. मछलियों एवं अन्य अति महत्वपूर्ण समुद्री जीवों की कई ऐसी प्रजातियाँ हैं जिनका वयस्क जीवन तो सामान्यत: गहरे समुद्र तथा अन्य स्थानों पर गुजरता है किन्तु उनके बच्चे मैंग्रोव वनों में ही बड़े होते हैं. मैंग्रोव क्षेत्रों की स्वस्थ बहुतायत का मछलियों की संख्या से सीधा अनुपात देखने को मिलता है. मैंग्रोव क्षेत्रों में पायी जाने वाली मछलियों का इस वातावरण के तापमान तथा भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के साथ अनुकूलन अति आवश्यक है. कुछ अति महत्वपूर्ण समुद्रीय प्रजातियों ने स्वयं को मैंग्रोव वनों के वातावरण के इतना अनुकूल बना लिया है कि मैंग्रोव वनों के बिना उन प्रजातियों की कल्पना ही नहीं की जा सकती विस्तृत क्षेत्र में पायी जाने वाली द्विलिंगी किलीफिश ( रिवुलस मारमोरेटस) इसका अच्छा उदाहरण है. डूबते एमएससी चित्रा से हुए तेल और जहरीले रसायनों के रिसाव से मुंबई और आस-पास के मैंग्रोव वनों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है. यह खतरा जितना बड़ा मैंग्रोव वनों के लिए है उतना ही बड़ा उन सभी प्रजातियों के लिए है जो मुंबई और आस-पास के मैंग्रोव वनों के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं.और जितना बड़ा खतरा मैंग्रोव वनों के पारिस्थितिकी तंत्र और जैवविविधता को है, मानवीय जीवन के लिए उतना ही बड़ा खतरा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब हम मैंग्रोव के उपयोगिता को समझेंगे तब हमें पता चलेगा कि मुंबई और उसके आस-पास डूबते हुए जहाज से रिसने वाला तेल और जहरीला रसायन कितना विनाशक है. वस्तुत: मैंग्रोव वन विभिन्न प्रकार के समुद्री जीवों और वनस्पतियों के लिए अद्वितीय पारिस्थितिक पर्यावरण उपलब्ध कराते हैं. बहुत से जीव मैंग्रोव का विविध प्रकार से उपयोग करते हैं. मैंग्रोव के पौधों के पत्तों की टहनियां टूटी शाखाएं, बीज तथा फल विभिन्न प्रकार के जीवों के लिए भोजन उपलब्ध कराते हैं. ये क्षेत्र मूंगे की चट्टानों में तथा उसके आस-पास रहने वाले जीवों के छोटे बच्चों के लिए आदर्श शरणस्थल उपलब्ध कराते हैं. मैंग्रोव पौधों की आपस में गुथी हुई जलमग्न जड़ें अनेक प्रकार की मछलियों झींगे, पपड़ी वाले जीवों तथा कछुओं के लिए परभक्षियों से सुरक्षित आश्रय तथा प्रजनन ( ब्रीडिंग) स्थल का कार्य करती हैं. मैंग्रोव वन ज्वारीय दलदली क्षेत्रों के पोषक तत्त्व जैसे नाइट्रोजन फास्फोरस भारी धातुओं तथा सूक्ष्म तत्वों जो स्थलीय क्षेत्रों से नदियों द्वारा बहाकर लाये जाते है, के भण्डारण स्थल के रूप में कार्य करते है. सड़ती-गलती वनस्पतियों तथा अन्य जीव-जंतुओं से निकलने वाले तत्वों जैसे कार्बन, फास्फोरस तथा अन्य तत्वों के पुन: चक्रों में मैंग्रोव वनों का अद्वितीय योगदान होता है ये ज्वार भाटे के समय तटीय मिट्टी के कटाव को रोकते हैं ज्वार भाटे द्वारा मैंग्रोव वनों से पोषक तत्व समुद्र में ले जाये जाते है जहाँ समुद्री प्राणियों द्वारा इनका उपयोग होता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैंग्रोव के वृक्षों से गिरने वाले पत्तियों, शाखाओं आदि का जीवाणुओं द्वारा अपघटन होता है इन प्रक्रिया में पोषक तत्व निकलते हैं जो आस-पास के पानी को उपजाऊ बनाते हैं अपघटित कार्बनिक पदार्थ तथा जीवाणु जैवद्रव्यमान ( बायोमास) को संयुक्त रूप से अपरद परिवर्तित करते हैं यह मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र में पैदा होने वाला यह एक मुख्य उत्पाद है. इसमें प्रोटीन का स्तर अधिक होता है और यहाँ जीव-जंतुओं के एक बड़ी संख्या के लिए भोजन प्रदान करता है जो पानी में से इस अपरद को छान कर अलग कर लेते हैं इस अपरद को खाने वाली छोटी मछलियों का शिकार बड़ी मछलियों द्वारा किया जाता है. मैंग्रोव वनों द्वारा उत्पन्न पोषक तत्व अन्य कोमल पारिस्थितिक तंत्रों जैसे प्रवाल भित्तियों, समुद्री शैवालों तथा समुद्री घास आदि को पोषण उपलब्ध कराते हैं. वर्षाऋतु के दौरान अधिक शुद्ध जल और अधिक करकट पात के परिणाम स्वरूप पोषक तत्वों की आपूर्ती बढ़ जाती है करकट पात के अपघटन से अपरद बनता है. अपरद पर सूक्ष्म जीवों की क्रिया से छोटे झींगों और मछलियों के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं मैंग्रोव के पेड से गिरने वाली पत्तियों में जीवाणुओं के गतिविधियों के कारण अनेक जीवन के लिए भोजन की तथा प्राकृतिक आवास की व्यवस्था होती है. मैंग्रोव के इन प्राकृतिक आवासों में संसार की सबसे महत्वपूर्ण सामुद्रिक जैविक नर्सरी विद्यमान है. मुंबई और आस-पास के तटीय क्षेत्र भी मैंग्रोव के इसी स्वस्थ पारिस्थितिकी के हिस्सा हैं जो इस समय इस औद्योगिक हादसे यानि समुद्री मालवाहक जहाज एमएससी चित्रा से रिसने वाले तेल और जहाज से समुद्र में गिरे कंटेनरों जिसमें खतरनाक कीटनाशक रसायन से होने वाले रिसाव से गंभीर खतरे में पड़ गए हैं. समुद्र की सतह पर फैले इस जहरीले तेल और रसायन की अगर तत्काल और युद्ध स्तर पर सफाई नहीं की गई तो इस हादसे के कारण मुंबई का तटीय समुद्री इको सिस्टम भयानक पर्यावरणीय विनाश का गवाह बनेगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुंबई के निकट दो समुद्री मालवाहक जहाजों की टक्कर मामूली घटना नहीं है. इस हादसे से यह तो बखूबी समझ में आता है कि मुंबई के तटीय समुद्र में सामान्य यातायात के नियमों के पालन की अनदेखी हो रही है. सवाल हार्बर ट्रैफिक मैनेजमेंट का है. क्यों हार्बर ट्रैफिक मैनेजमेंट इतना कमजोर है कि दो मालवाहक जहाज आपस में टकरा जा रहे हैं और सवाल सुरक्षा का भी, ऐसा तब हो रहा है जब भारतीय गुप्तचर एजेंसियों ने मुंबई पर समुद्री रास्तों से आतंकी हमले की आशंका जाहिर की हो और महाराष्ट्र सरकार अपनी तैयारियों को पूरा करने का दम भरती हो. आखिर इसे किस परिपेक्ष्य में देखा जाय. इससे भी बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के दुर्घटनाओं से निपटने के लिए जरूरी संसाधनों और प्रभावी टेक्नोलाजी के मद्देनजर हम कहाँ खड़े हैं ? इस औद्योगिक दुर्घटना के कारण मुंबई के तटीय समुद्री पर्यावरण के इस गंभीर संकट की घड़ी में विदेशी तकनीक और मदद का मोहताज होना पड़ रहा है. दुर्घटनाग्रस्त जहाज से हो रहे तेल रिसाव पर काबू पाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों को बुलाया गया जिसमें नीदरलैंड की कंपनी एलएमआईटी साल्वेज और सिंगापूर की एक कंपनी के विशेषज्ञों के दल का समावेश है. इस हादसे के राहत और बचाव कार्यों के लिए विदेशी विशेषज्ञों को बुलाने की मजबूरी हमारे देश के आपदा प्रबंधन की पोल खोलती है.&lt;br /&gt;.&lt;br /&gt;.&lt;br /&gt;राजेश सिंह&lt;br /&gt;लेखक- नागरिक विकल्प के संपादक हैं&lt;br /&gt;मो-919833004571&lt;br /&gt;&lt;a href="mailto:rajesh.aihrco@gmail.com"&gt;rajesh.aihrco@gmail.com&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7853256408550149888?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7853256408550149888/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7853256408550149888&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7853256408550149888'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7853256408550149888'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/08/blog-post_6667.html' title='डूबते जहाज से मुंबई के पर्यावरण को गंभीर खतरा'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGPF7o5lrII/AAAAAAAAAL4/dvdwdN7rySw/s72-c/MSC+Chitra.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-2240716987797191922</id><published>2010-08-12T01:59:00.000-07:00</published><updated>2010-08-12T02:43:45.949-07:00</updated><title type='text'>तेल के नाम पर खतरनाक खेल</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGO-0whBYvI/AAAAAAAAALo/n85ywtc2mgo/s1600/petrol-pump_s800x800.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5504452983162757874" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGO-0whBYvI/AAAAAAAAALo/n85ywtc2mgo/s400/petrol-pump_s800x800.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;हम सभी को समझना होगा कि भारत में एक लीटर पेट्रोल की कींमत 53 रूपये है ऐसा क्यों? और सरकार लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी करती जा रही है. आखिर तेल के नाम पर अपने देश के हुक्मरान कौन सा खतरनाक खेल खेल रहे हैं?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;5 जुलाई को विपक्षी दलों नें भारत बंद का आयोजन किया, मुख्य मुद्दा था सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों के बेतहासा दाम बढ़ाया जाना. विपक्षी दलों नें इस भारत बंद को बेहद सफल बताया तो कार्पोरेट संस्था एसोचेम नें इस बंद के कारण 10 000 करोड़ रूपये के अनुमानित नुकसान होने की बात कही, वही पेट्रोलियम मंत्रालय जो कि मूल्य वृद्धी के पहले सार्वजनिक पेट्रोलयम कंपनियों के घाटे का रोना रोती है, उन्होंने करोड़ों रूपये का मीडिया को विज्ञापन देकर आम जनता को यह बताने की कोशिश की कि पेट्रोलियम पदार्थों के कीमतों का बढ़ाया जाना गलत नहीं है. इन सबके मद्देनजर आम जनता अवाक् होकर यह ड्रामा देखती रही. उसे पता है कि अब महंगाई कम होने वाली नहीं है. आश्चर्य तो यह है कि देश का प्रबुद्ध वर्ग इस पेट्रोलियम मूल्य वृद्धी घोटाले पर अवाक् है या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन चुप जरूर है. संभव है कि आगे चलकर पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि " पेट्रोलियम पदार्थ मूल्य वृद्धी घोटाला" के नाम से जाना जाये यह मूल्य वृद्धी हमें "पन्ना-मुक्ता-तेलक्षेत्र'' घोटाले की याद दिला रहा है जिसमें सरकार नें लगभग पूरा का पूरा तेल क्षेत्र मुफ्त में निजी कंपनियों को दे दिया. पन्ना-मुक्ता-तेलक्षेत्र का पता लगाने हेतु सारी मेहनत ओएनजीसी नें की थी किन्तु सरकार नें अपनी ही कंपनी को निकम्मा साबित करते हुए रिलायंस को काबिल बताया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले दिनों रिलायंस नें पूरे देश में 1432 और एस्सार नें 1100 पेट्रोल पम्प खोले थे किन्तु भारत सरकार की तरफ से लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में इजाफे के कारण उक्त निजी कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों कंपनी इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम लिमिटेड को सरकार के तरफ से सरकारी अनुदान मिल रहा था. वर्ष 2007-08 में इसी वजह से रिलायंस को 800 करोड़ रूपये का घाटा उठाना पड़ा. और रिलायंस को पेट्रोल पम्प बंद करने का निर्णय लेना पड़ा किन्तु रिलायंस पेट्रोल पम्प का डीलरशीप लेने वाले व्यापारी लगातार रिलायंस पेट्रोलियम के प्रबंधन पर "रिलायंस पेट्रोल पम्प डीलर्स एसोसियेशन" के बैनर तले दबाव डालते रहे कि या तो कंपनी फिर से पेट्रोल पम्पों को शुरू करने का तरीका ढूढे अथवा पेट्रोल पम्प डीलर द्वारा रिलायंस के पेट्रोल पम्पों में किये गए निवेश को वापस करे. इधर डीलर मालिकों और संचालकों (डीओडीओ) नें मिलकर एक प्रस्ताव पारित किया था कि भूमि के पट्टे को रद्द कर पेट्रोल पम्पों में लगे उपकरणों को बाजार के कीमत पर कंपनी खरीदे अथवा पेट्रोल पम्प फिर से शुरू कराए. सूत्रों के अनुसार रिलायंस समूह के अध्यक्ष परिमल नाथवानी नें "रिलायंस पेट्रोल पम्प डीलर्स एसोसियेशन" से इस समस्या के समाधान के लिए कुछ समय ( 6 माह ) माँगा था. अगर रिलायंस के पेट्रोल पम्प को सुरू करने जैसे समाधान पर विचार करें तो वह केवल और केवल सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर से सब्सिडी हटवाने के शिवाय और कुछ था ही नहीं. रिलायंस नें एक वर्ष में करीब 40 लाख टन डीजल बेंचकर बाजार के 15 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा बना लिया था किन्तु कंपनी को कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उछाल के बीच सरकार नियंत्रित मूल्य पर डीजल, पेट्रोल बेंचना घाटे का सौदा हो गया था. अत: रिलायंस के पेट्रोल पम्प फिर से शुरू करने हेतु पेट्रोलियम पदार्थों से सब्सिडी हटाकर बाजार के नियंत्रण पर छोडना जरूरी था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह हम सभी को समझना होगा कि भारत में एक लीटर पेट्रोल की कींमत 53 रूपये है ऐसा क्यों? भारत में एक लीटर पेट्रोल की लगत 16।50 रूपये पड़ती है. एक लीटर पेट्रोल पर 11.80 रूपये केन्द्रीय कर, 9.75 रूपये एक्साईज ड्यूटी, 8 रूपये से लेकर 12 रूपये प्रति लीटर राज्य सरकारों का कर और 4 रूपये सेस वसूला जाता है. इन आंकड़ों को देखते हुए सरकार की दलील पर कैसे यकीन किया जा सकता है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है. रिकार्ड बताते है कि वर्ष 2008-09 में इन्डियन आयल कार्पोरेशन को 2950 करोड़ रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, 31 मार्च 2010 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में आईओसी को शुद्ध मुनाफा 10998 करोड़ रूपये हुआ, एचपीसी और बीपीसी नें क्रमश: 544 और 834 करोड़ रूपये का शुद्ध मुनाफा कमाया वर्ष 2009-10 में पेट्रोलियम सेक्टर द्वारा कर,ड्यूटी,लाभांस इत्यादि के रूप में सरकारी खजाने में 90 000 करोड़ रूपये जमा हुए और वर्ष 2010-11 में सरकार को पेट्रोलियम सेक्टर से 1 20 000 करोड़ रूपये से ज्यादा आय होने का अनुमान है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार कहती है कि पेट्रोलियम पर जितना खर्च हो रहा है उतने की वसूली नहीं हो पा रही है सरकार यह भी कह रही है कि पेट्रोल,डीजल, रसोई गैस और मिट्टी के तेल को बड़ी मात्रा में सब्सिडाईज करना पड़ रहा है केन्द्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार सरकारी राशन की दुकानों से वितरित किये जाने वाले मिट्टी के तेल पर 2006-07, 2007-08 और 2008-09 में क्रमश: 970, 978 और 974 करोड़ रूपये की सब्सिडी दी गई बदले में इन्ही वर्षों में केन्द्र सरकार नें क्रमश: 17883, 19102 और 28225 करोड़ रूपये सरकारी राशन की दुकानों के जरिये वसूले. इसी तरह रसोई गैस पर केंद्र सरकार नें 2006-07, 2007-08 और 2008-09 में क्रमश: 1554, 1663 और 1714 करोड़ रूपये की सब्सिडी दी बदले में इन्ही वर्षों में केन्द्र सरकार नें क्रमश: 10701, 15523 और 17600 करोड़ रूपये वसूल किये यानि मिट्टी के तेल और रसोई गैस से कुल मिलाकर 2006-07, 2007-08 और 2008-09 में क्रमश: 2524, 2614 और 2688 करोड़ रूपये दिए और इन्ही वर्षों 2006-07, 2007-08 और 2008-09 में मूल्य वृद्धि करके क्रमश: 28584, 34625 और 45825 करोड़ रूपये वसूले. इसी तरह डीजल में 2006-07, 2007-08 और 2008-09 में क्रमश: 18776, 35166 और 52286 करोड़ रूपये और पेट्रोल में 2006-07, 2007-08 और 2008-09 में क्रमश: 2027, 7332 और 5181 करोड़ रूपये वसूले.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पेटोलियम पदार्थों को बाजार के नियंत्रण पर छोडऩे वाली यूपीए सरकार का विरोध करने का स्वांग रचने और भारत बंद में अग्रणी भूमिका निभाने का दावा करने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा अपने कार्यकाल में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को यूपीए सरकार की ही तरह बेतहासा बढ़ाया था। वर्ष 1998 में जब एनडीए के माध्यम से भाजपा सत्ता की बागडोर संभाली तो पेट्रोल 23 रूपये लीटर डीजल 10.25, रूपये रसोई गैस 136 रूपये और मिट्टी का तेल 2.50 रूपये था किन्तु वर्ष 2004 में पेट्रोल 34 रूपये, डीजल 21.74 रूपये, रसोई गैस 242 रूपये और मिट्टी का तेल 9 रूपये हो गया यानि पेट्रोल 50 फीसदी, डीजल 111 फीसदी, रसोई गैस 90 फीसदी और मिट्टी के तेल में 300 फीसदी बढोत्तरी की इस लिहाज से कांग्रेस 2004 में जब सत्ता संभाली तो पेट्रोल की कींमत 34 रूपये प्रति लीटर थी वह अब 53 रूपये, डीजल 21.74 रूपये थी अब 41 रूपये रसोई गैस 242 रूपये थे अब 345 रूपये, मिट्टी के तेल की कींमत 9 रूपये से अब 12 रूपये अर्थात पेट्रोल 50 फीसदी, डीजल 90 फीसदी, रसोई गैस 45 फीसदी और मिट्टी के तेल में 33 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है.&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;यह लगभग सभी को पता है कि क्यों और किसके लिए इस तेल के खेल को खेला जा रहा है. यह मूल्यवृद्धि कांग्रेस की लोकप्रियता के कींमत पर की जा रही है इस मूल्य वृद्धि से मनमोहन का कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योकि यह उनकी आखिरी पारी है किन्तु कांग्रेस और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को यह आत्ममंथन करने का समय है कि कांग्रेस की उर्बरा शक्ति कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और देश के आम नागरिकों के लिए है कांग्रेस की उर्बरा शक्ति मनमोहन और उनकी चौकड़ी के माध्यम से पूंजीपतियों के लिए देश के संसाधनों के अबाध लूट का रास्ता बनाने के लिए है. जब मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बनाये गए थे तो देश की आम जनता को यह बताया गया था कि हमें अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मिला है राष्ट्र आर्थिक संवृद्धि के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगा. राष्ट्र का तो पता नहीं हाँ सरकार नें ताबडतोब महंगाई बढ़ाकर जरूर आम आदमी को बुरी तरह चूसने का कीर्तिमान स्थापित किया. राष्ट्र को आर्थिक संवृद्धि मिली या नहीं मिली किन्तु पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों की आर्थिक संवृद्धि में चार चाँद जरूर लग गए देश का एक चौथाई संसाधन 100 पूंजीपति के कब्जे में चला गया, इधर देश के 22 करोड़ लोग भूखे पेट सोने को अभिसप्त है 5 करोड बच्चों को पर्याप्त पोषक पदार्थ नहीं मिल रहा है अब तेल की कीमतें बढ़ी है तो जाहिर है कि (ट्रांसपोटेशन) खाद्यान ढुलाई भाड़ा बढ़ेगा तो खाद्यान की कीमतें अपने आप बढ़ेंगी 22 करोड भूखे पेट सोने वालों का आकड़ा बढकर 32 करोड़ हो जायेगा 5 करोड़ कुपोषित बच्चों का आकड़ा 10 करोड़ के आकडे को छू लेगा इस बीच मनमोहन जब भी बोलेंगे तो ओबामा समेत सभी अंतर्राष्ट्रीय नेता सुनेंगे जिन्हें मनमोहन की जनविरोधी नीतियों का फायदा पहुँच रहा है अगर कोई नहीं सुन पायेगा तो वो भारत का आम आदमी क्योंकि कुपोषण से उसके कान के पर्दे सूख चुके होंगे।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;.&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;यह लेख विस्फोट.कॉम पर १२ जुलाई को प्रकाशित हो चुका है &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-2240716987797191922?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/2240716987797191922/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=2240716987797191922&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2240716987797191922'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2240716987797191922'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/08/blog-post_12.html' title='तेल के नाम पर खतरनाक खेल'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TGO-0whBYvI/AAAAAAAAALo/n85ywtc2mgo/s72-c/petrol-pump_s800x800.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7806673743851990402</id><published>2010-08-01T10:06:00.000-07:00</published><updated>2010-08-01T10:07:38.878-07:00</updated><title type='text'>चिट्ठाजगत को बचाओ !</title><content type='html'>सावधान ! चिट्ठा जगत पर आज-कल अश्लील  सामग्री प्रकाशित हो रही है शर्म, शर्म, शर्म,....... ! कृपया चिट्ठा जगत को बचाओ&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7806673743851990402?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7806673743851990402/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7806673743851990402&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7806673743851990402'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7806673743851990402'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='चिट्ठाजगत को बचाओ !'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-6847626863460957876</id><published>2010-07-08T09:13:00.000-07:00</published><updated>2010-07-08T09:21:00.365-07:00</updated><title type='text'>पान बनाम लोहे के खान की जंग</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5491570845407520994" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 350px; CURSOR: hand; HEIGHT: 248px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TDX6lptoKOI/AAAAAAAAALg/afet9O4gsDA/s400/Posko.bmp" border="0" /&gt;दक्षिण कोरियाई और विश्व की अग्रणी स्टील निर्माता बहुराष्ट्रीय कंपनी पोस्को के उडीसा स्थित जगतसिंहपुर जिले के प्रस्तावित स्टील फैक्ट्री परियोजना का पारादीप के समीप के गांओं में पान की खेती करने वाले किसानों नें भारी विरोध करना शुरू कर दिया है. ज्ञात हो कि स्थानीय किसान पान की खेती कर मालदीव, पाकिस्तान, सउदी अरब, श्री लंका और बांग्लादेश जैसे देशों को निर्यात कर अपना जीवन यापन करते है. इलाके में पान की खेती के कारोबार के वजह से लगभग 6000 लोगों को रोजगार मिला हुआ है किसानों का कहना है कि उन्हें एक पान के पत्ते से एक रूपये की आय होती है किसान बताते है कि एक एकड़ जमीन पान के पत्ते के उपज से वार्षिक 1,00,000,00-/ रूपये की आय होती है. धिनिकिया ग्राम पंचायत के सरपंच सिसिर महापात्रा और अन्य पान की खेती करने वाले किसान कहते है- हम अपने उपजाऊ जमीन का एक इंच हिस्से का अधिग्रहण नहीं होने देंगे, हमारी कृषि अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है और सतत है .' महापात्रा पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिती के सदस्य भी है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पोस्को परियोजना का विरोध कर रही महिला कार्यकर्ता मनोरमा खटुआ का कहना है कि धिनकिया के पान के पत्तों की अपनी अहमियत है मुंबई और कानपूर के लोगों में भी इसकी अच्छी खासी मांग है. प्रस्तावित परियोजना को दुसरी जगह ले जाये जाने की मांग करते हुए पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिती नें उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को दिए ज्ञापन में कहा है कि "पान की खेती के कारण पूर्व में बलीपाल से इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज को बालेश्वर जिले के चांदीपुर ले जाया गया " इतना ही नहीं इस क्षेत्र के किसानों नें 1993...94 में आईओसीएल की प्रस्तावित रीफाइनरी को पारादीप स्थानांतरित करने को मजबूर कर दिया था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज से 5 वर्ष पहले उपरोक्त कंपनी पोस्को ने उडीसा सरकार के साथ 22 जून 2005 को उडीसा के जगतसिंहपुर जिले में स्टील फैक्ट्री लगाने के सहमति पत्र पर दस्तखत किया था. दक्षिण कोरिया की उक्त स्टील निर्माता कंपनी जगतसिंहपुर के अपने प्रस्तावित परियोजना में 51,000/- करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा था कंपनी को १.२ करोड़ टन स्टील सालाना उत्पादन के लिए ४००० एकड़ जमीन की जरूरत थी. उक्त सहमति पत्र ( एम्ओयू) की मियाद 5 वर्ष की थी जो कि 22 जून 2010 को ख़त्म हो गयी विभिन्न शर्तों वाली उक्त एम्ओयू में पांचवी शर्त या भी थी कि इस एम्ओयू की मियाद बढाई जा सकती है लेकिन इसके लिए पोस्को को इन ५ वर्षों में ढ़ांचा खड़ा करने के आलावा प्लांट स्थापना, मशीनों की फिक्सिंग, के अलावां पूजी विनियोग आवश्यक होगा अगर ऐसा नहीं किया गया तो एम्ओयू की मियाद कत्तई नहीं बढाई जायेगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शर्त के मुताबिक पोस्को नें प्लांट स्थापना, मशीनों की फिक्सिंग, और पूजी विनियोग तो दूर की बात है, एक इंच जमीन भी अपने नाम हस्तांतरित नहीं करवा सकी है. ऐसे में एम्ओयू रद्द हो जाना चाहिए. एमओयू की आठवीं शर्त यह थी कि नियत समय पर प्रकल्प का कार्य शुरू न होने की स्थिति में कंपनी को लोहा पत्थर खदान की लीज, कोयला की लीज व अन्य जो भी प्रोत्साहन सरकार देगी वो खुद-ब-खुद खत्म मानी जाएगी. इस स्थिती में पोस्को के पास सिवाय पुरानी हो चुकी एम्ओयू के अलावा कुछ भी नहीं बचा होना चाहिए। एमओयू की शर्त के अनुसार सरकार द्वारा दी गई तमाम सहूलियतें अपने आप एक्सपायर हो गई हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पोस्को द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे, पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिती सहित अन्य जनसंगठनों का कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए जमीन अधिग्रहण करने पर आमादा नवीन पटनायक सरकार जनता के हितों के साथ समझौता कर रही है, परियोजना का विरोध करने वाले आदिवासियों के विरूद्ध बढ़ रही पुलिस की नृशंसता पर पटनायक सरकार की मौन सहमती है. विस्थापन विरोधी कार्यकर्ताओं का कहना है कि परियोजना के लिए किसानों से 4000 एकड़ कृषि योग्य जमीन छिन जाने से जिले की तीन पंचायतों नवगांव, धिनकिया, गडकुजंगा और एरसामां ब्लाक के 30,000 लोग विस्थापित होंगे. स्थानीय किसान किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ जमीनों को अधिग्रहण न करने देने पर अड़े हुए है. उनका कहना है कि इस परियोजना के लिए हमारी उपजाऊ जमीन को अधिग्रहित करने को प्रतिबद्ध सरकार यह बखूबी जानती है कि यहाँ की आबादी की रोजी-रोटी खेती पर ही निर्भर है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विस्थापन विरोधी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पटनायक सरकार किसानों की जमीन को जबरन हड़प कर पोस्तो के हवाले करना चाहती है. सरकार अपने इस घिनौने खेल में स्थानीय अदालतों को भी शामिल कर लिया है परियोजना का विरोध करने वाले आन्दोलनकारियों का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ताओं के विरुद्ध झूठे आरोपों के तहत स्थानीय अदालतों द्वारा धडाधड वारंट जारी हो रहे है उन अदालती वारंटों के माध्यम से पुलिस द्वारा विस्थापन विरोधी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न शुरू कर दिया गया है. उनके अनुसार परियोजना के नाम पर स्थानीय जनता से उनके रोजगार को छिन कर उनके जमीनों से उन्हें बेदखल करने के लिए भिन्न-भिन्न हथकंडों का प्रयोग किया जा रहा है यह गंभीर और चिंताजनक है. जनता के मतों से सत्ताशीन हुई सरकारें बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ मिलकर जनता को ही लूटने और तबाह करने हेतु सरकारी संसाधनों का प्रयोग कर रही हैं. परियोजनाओं की आड़ में बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ मिलकर इसी जन के शोषण का जो घिनौना खेल खेल रही है उसे देख कर बड़े-बड़े क्रूर माफिया भी शरमा जाय.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार के सहयोग से जबरन जमीन हड़पने का सबसे विनाशकारी रास्ता कॉरपोरेट पूंजी अपना रही है. जबरन भूमि अधिग्रहण, कारपोरेट नेतृत्व, विकास का सबसे मारक हथियार बना हुआ है.ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता द्वारा निर्मित 1894 ई. का 'भूमि अधिग्रहण अधिनियम' को आजाद भारत के कर्ताधर्ताओं ने 1952, 1963 ओर 1984 में संशोधित कर और कठोर किया 2006 में इसमें पुनः संशोधन किया गया और साथ में पहली बार पुनर्वास और पुर्नस्थापन नीति भी बनी. किन्तु इस नीति को जमीन में उतारने को राज्य सरकारें इच्छुक नहीं दिखती. दूसरी ओर वही राजसत्ता 'जनहित' में कारॅपोरेट पूंजी के लिए उडीसा, छत्तीसगढ, झारखंड, मध्यप्रदेश, बंगाल में भूमि छीनने को आतुर है. मुआवजे की दर बिना किसानों, जमीन मालिको सें बात किये एकतरफा तय की जाती है. जबरन अधिग्रहण हेतु सशस्त्र पुलिस बल तक उतारा जा रहा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत में 1991 के वाद कॉरपोरेट घराने और पूजीपति विकास के नाम पर 'विकास का आतंकवाद' फैला रहे है निजीकरण और उदारीकरण के नाम पर हमारी सरकार नें 1992 के बाद लगातार औद्योगिक नीतियों को कॉरपोरेट हित में कमजोर किया 1992, 1996, 2001 और 2004 के बाद पूंजी निवेश को बढावा देने के लिए भूमि, राजस्व, खनन, श्रम आदि कानूनों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अनुकूल और जन-विरोधी बनाया गया। केन्द्र और राज्य सरकारों ने पूँजी निवेश बढाने के लिए कई तरह कर (टैक्स) रियायतों की घोषणा की, जैसे, भूमि के लिए बीमा किश्त भरने से मुक्ति, 100 के.वी. तक मुफ्त बिजली, पानी टैक्स पर 30 से 40 प्रतिशत तक की छूट, केन्द्रीय शुल्क के भुगतान पर छूट, आयतित कच्चे माल पर शुल्क की छूट, व्यापारिक करों में 50 प्रतिशत तक की छूट. इस प्रकार भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों नें इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भरपूर मुनाफा कूटने का मौका दिया हुआ है.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;आखिर ये जनकल्याण की बात करते नहीं थकने वाले, जनता द्वारा चुने हुए जनसेवक सत्ता पर काबिज होते ही बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ मिलकर उनके दलाल की तरह व्यवहार करते हुए जन के शोषण का खेल क्यों शुरू कर देतें है ? क्या इनका शोषण ही देश की जनता की नियती बन चुकी है ? क्या पोस्को की दलाली के सामने उन 30,000 लोगों का कोई मायने नहीं है जो इस परियोजना के बाद विस्थापन के शिकार होंगे ? आखिर क्यों उडीसा की पटनायक सरकार अपनी ही रियाया के विरुद्ध खलनायक भूमिका में उतर आयी है ? आखिर इन सवालों का जवाब किसके पास है ? इसका जवाब उन लाखों लाख आन्दोलनकारियों को कौन देगा जो पोस्को और अन्य बहुराष्ट्रीय निगमों के खूनी अपराध के शिकार है संवैधानिक रूप से जनता के प्रति उत्तरदायी सरकार, इन प्रश्नों का जवाब देनें से रही, क्योंकि जनता के हित में सरकारों का संचालन करने वाले ए लोग बहुराष्ट्रीय निगमों के गोद में जा बैठे हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-6847626863460957876?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/6847626863460957876/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=6847626863460957876&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6847626863460957876'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/6847626863460957876'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='पान बनाम लोहे के खान की जंग'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TDX6lptoKOI/AAAAAAAAALg/afet9O4gsDA/s72-c/Posko.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-2029785665303537657</id><published>2010-06-25T09:38:00.000-07:00</published><updated>2010-06-26T10:26:36.644-07:00</updated><title type='text'>आप मर गये हो ? माफ़ करना मुझे नहीं पता था !</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TCY3D9m06NI/AAAAAAAAALY/Ky7m4tknK_k/s1600/cuts-both-ways.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5487133737214077138" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TCY3D9m06NI/AAAAAAAAALY/Ky7m4tknK_k/s400/cuts-both-ways.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;आप जनता हों ? अच्छा ! इसीलिए आप इतना हल्ला मचा रहे है. इतना हल्ला मत मचाओं. क्या आपको पता नहीं कि सरकार यह सब आपके भले के लिए कर रही है आप कमोडिटी का व्यवसाय शुरू कीजिये, सट्टेबाजों के साथ मिलकर पेट्रोलियम पदार्थों के फ्यूचर ट्रेडिंग के बारे में सोचिये, मुनाफा कमाईये. अनायास महंगाई-महंगाई चिल्ला रहे हो. भाई बाजार का जमाना है बेचारी भोली-भाली हमारे देश की सरकार पेट्रोलियम को बाजार के हवाले कर दिया है. आपको नहीं पता क्या कि विश्व बैंक का दबाव है भाई राजकोषीय घाटा कम करने का. अगले 12 महीनों में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3 फीसदी पर आ जाएगा। क्या आपको नहीं पता कि भारत सरकार ने 3 जी व ब्रॉडबैंड की नीलामी से 1.10 लाख करोड़ जुटा लिए। और 40,000 करोड़ रुपए सरकारी कंपनियों के विनिवेश से आ जायेंगे उर्वरक और तेल मूल्यों पर नियंत्रण हटने से सरकार के ऊपर से सब्सिडी का भारी बोझ हट जाएगा। 2010 तक जीडीपी को 12 % तक ले जाना है. आपकी वजह से स्विश बैंक के खाते नें जंग थोड़ी लगानी है..... कुछ न कुछ तो डालना ही पड़ेगा. सरकार सत्ता और उसके बैभव को छोड़कर सभी चीजों से अपना नियंत्रण हटा रही है तो तेल से भी हटा रही है तो आपके ऊपर कौन सा पहाड़ गिर गया.......&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;आप डरो मत आप सरकार के सम्मानित उपभोक्ता है सरकार आपकी चीरचुप्पी की कायल है इसीलिए सरकार नें आपके ऊपर दरियादिली दिखाते हुए आपको नागरिक से उपभोक्ता बना दिया है आप ऐसा कभी मत सोचना कि सरकार आपके बारे में चिंतित नहीं है देखते नहीं सरकार आपको बीपीएल के रूप में देखने का सपना देख रही है.आपको पता नहीं क्या अगर सरकार ऐसा नहीं करेगी तो सरकार पिछड़ जायेगी उसकी बदनामी होगी. एनडीए से पीछे क्यों रहे एनडीए ने 1998 से 2004 के बीच पेट्रोल के दाम में पचास फीसदी से भी ज्यादा, डीजल के दाम में करीब 111 फीसदी, रसोई गैस में करीब नब्बे फीसदी और केरोसिन तेल के दाम में तीन सौ फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी की।जब 1998 में एनडीए ने सत्ता की बागडोर संभाली पेट्रोल करीब 23 रुपये लीटर था जो 2004 में 34 रुपये लीटर तक पहुंचा। डीजल 10.25 रुपये से बढ़कर 21.74 रुपये तक पहुचा इसी तरह रसोई गैस के दाम 136 से उछल कर 242 रुपये तक पहुंचे। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी केरोसिन के तेल में ढाई रुपये से सीधे नौ रुपये हुई जो तीन सौ फीसदी से भी ज्यादा है ................&lt;br /&gt;आपने नहीं सुना था क्या अमेरिकियों का चिंतायुक्त बयान कि भारतीय अच्छा खाना खाने लगे है उसी को तो रोक रहे है मनमोहन जी........... इसमें गलत क्या है......... आप इतना अच्छा क्यों खाते हैं ? आप अगर अपने आप पर कंट्रोल नहीं करेंगे तो सरकार तो करेगी ही क्योंकि आपने ही इसका दायित्व सरकार को दिया है. आपका पेट भरा है, आप स्वस्थ है ऐसा अनैतिक क्यों कर रहे है आप ? आप भूंखे रहिये, आप बीमार हो जाईये इसी में आपकी नैतिकता है ।&lt;br /&gt;आपको पता नहीं है कि अमेरिका में मंदी है आखिर आप ही बताओं बिना आपके लूटे सरकार अमेरिका के बैभव वापस लाने में कैसे अपना योगदान दे पायेगी. अगर अमेरिका का बैभव वापस नहीं आएगा तो आप अमेरिका में बसने का सपना कैसे देखेगे ? आखिर यह सब आपके भले के लिए ही हो रहा है न.........&lt;br /&gt;आप तो जानते है न कि मनमोहन विश्वबैंक में नौकरी कर चुके है विश्व बैंक की नीति ही है कि गरीबों का निवाला छीन कर अमीरों की थाली में सजाना. आप गरीब क्यों है आप अमीर क्यों नहीं बनते ? इतना अच्छा मौका आपको दुबारा नहीं मिलेगा यह आपकी खुशकिस्मती आपको अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मिला है.............. देखते नहीं आप तेल के लिए अमेरिका कितनों को तबाह कर दिया शुक्र है आप बचे हुए हो. लेकिन आप तो चुप हो आप क्यों कुछ बोलते नहीं....... महंगाई नें आपका तेल निकाल दिया है... ओ हो........ आप भारत की जनता हो आप मर गये हो माफ़ करना मुझे नहीं पता था नहीं तो मै इतनी उल्टियाँ नहीं करता. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-2029785665303537657?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/2029785665303537657/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=2029785665303537657&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2029785665303537657'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2029785665303537657'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_25.html' title='आप मर गये हो ? माफ़ करना मुझे नहीं पता था !'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TCY3D9m06NI/AAAAAAAAALY/Ky7m4tknK_k/s72-c/cuts-both-ways.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-3198190939185882935</id><published>2010-06-24T21:04:00.000-07:00</published><updated>2010-06-24T21:16:30.513-07:00</updated><title type='text'>कब रुकेगी इज्जत के खातिर मौत (ऑनर किलिंग) का सिलसिला</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5486560097208241122" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 267px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TCQtVuDuC-I/AAAAAAAAALQ/fsFZWkjfMZA/s400/Kuldeep+%26+Monika.bmp" border="0" /&gt;इज्जत के खातिर मौत (ऑनर किलिंग) का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है । यह सब सम्मान के नाम पर हो रहा है । सम्मान के नाम पर प्रति वर्ष सैकड़ों युवक और युवतियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है । देश में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान ऐसे राज्य है जहां से लगातार ऑनर किलिंग की घटनाएँ सामने आ रही हैं । बीते रविवार को दो प्रेमी जोड़े को ऑनर किलिंग के भेट चढ़ा दिया गया यह घटना दिल्ली में कुलदीप और मोनिका के साथ तथा हरियाणा में रिंकू और मोनिका के साथ घटी । दिल्ली के अशोक विहार में कुलदीप और मोनिका की जघन्य हत्या कर दी गयी वहीं हरियाणा के भिवानी में रिंकू और मोनिका की हत्या कर फाँसी पर लटका दिया गया ।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;इसी बीच महिलाओं और बच्चों के हितों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन [एनजीओ] शक्ति वाहिनी द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय नें काफी सख्त रूख अपनाते हुए केंद्र सरकार और ८ राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है । उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश आर।एम. लोढ़ा और न्यायाधीश ए. के. पटनायक नें केंद्र तथा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखण्ड, बिहार, हिमांचल प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को जवाब-तलब किया है । गैर सरकारी संगठन शक्ती वाहिनी नें उक्त जनहित याचिका के माध्यम से आरोप लगाया था कि केंद्र और राज्य सरकारें इस तरह के अपराधों के रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठा रही हैं । और न ही ऐसे प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा देने के लिए कोई पॉलिसी या मैकेनिज्म तैयार कर रही हैं । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;गैर सरकारी संगठन नें जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकारें इस अपराध को चुप्पी साधे मूक दर्शक की तरह देख रही हैं । इनके खिलाफ कानून बनाये जाने के बारे में भी कोई कदम नहीं उठा रहीं है । याचिका के माध्यम से गैर सरकारी संगठन के वकील रविकांत ने मांग की है कि सरकारें इस बावत तैयार की गई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय योजना का खुलासा करें साथ ही सरकारें ऑनर किलिंग के रोकथाम और इसे बढ़ावा देनें वालों (खाप पंचायतों तथा अन्य) के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने हेतु प्रभावित राज्यों के प्रत्येक जिलों में एक स्पेशल सेल बनाएं जहां ऐसे नव विवाहित युवा जोड़े अपनी सुरक्षा के लिए गुहार कर सकें, तथा ऑनर किलिंग रोकनें में मदद मिल सके । इस याचिका में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;इस मामले पर पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोईली नें बताया है कि केंद्र सरकार अगले माह संसद के मानसून सत्र में ऑनर किलिंग मामले पर एक विधेयक लाने पर विचार कर रही है । वीरप्पा मोईली नें बताया है कि इस विधेयक का प्रारूप तैयार कर लिया गया है । इस विधेयक में कई धाराओं को संशोधित कर दोषियों को उचित और आवश्यक सजा देनें के प्रावधान को उल्लेखित किया गया है । उन्होंने कहा है कि इस विधेयक के लागू हो जाने पर ऑनर किलिंग को रोकने में काफी मदद मिलेगी । ऑनर किलिंग के लिए पूरी पंचायत को दोषी ठहराने संबंधी कानून का समावेश इस विधेयक में होना लगभग तय माना जा रहा है । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;ऑनर किलिंग केवल भारत की ही समस्या है ऐसा नहीं है, यह एक वैश्विक समस्या है । पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र संघ नें संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष नामक एक रिपोर्ट जारी की थी । उस रिपोर्ट में बताया गया था कि विश्व में 5000 से भी अधिक प्रेमी जोड़े ऑनर किलिंग के शिकार हो जाते है । कई पश्चिमी देशों में ऑनर किलिंग की घटनाएँ देखने को मिल रही हैं इसमें फ़्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन आदि देश शामिल हैं । यह बात दीगर है कि यहां दुसरे देशों से आने वाले समुदाय के लोग ही ऑनर किलिंग के शिकार होते है । भारत के आलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, इजिप्ट, लेबनान, टर्की, सीरिया, मोरक्को, इक्वाडोर, युगांडा, स्वीडन, यमन, तथा खाड़ी के देशों में ऑनर किलिंग जैसे अपराध प्रचलन में हैं ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;दरसल सगोत्रीय और अंतरजातीय विवाह ही इस ऑनर किलिंग समस्या की जड़ में है । उत्तर भारत में सामाजिक मान्यता है कि सगोत्रीय और अंतरजातीय विवाह नहीं होने चाहिए । यहां समान गोत्र में विवाह परंपरा के विरुद्ध माना जाता है तो अंतरजातीय विवाह अपराध। सवाल यह है कि अगर एक गोत्र के लड़कों को भाई-बहन माना जाय तो फिर अंतरजातीय विवाह से क्या समस्या है ? समाज को दोनों से ही समस्या है । अगर एक सगोत्रीय परिवार के युवा आपस में विवाह करते है तो पंचायतें उन युवाओं की हत्या का फतवा जारी कर देती है, साथ ही उन युवाओं के परिवारों से सजातीय समाज द्वारा रोटी-बेटी का संबंध तोड़ लेने की चेतावनी दी जाती है । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;वहीं अंतरजातीय विवाह करने वाले युवाओं के परिवारों को क्रूर सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है । इस स्थिती में सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा परिवार ( जिसमें परिवार के अन्य युवाओं की सजातीय विवाह रुक जाना भी शामिल है) इस स्थिती के लिए अपने ही बच्चे को दोषी मानने लगता है, और मौका मिलने पर ऑनर किलिंग जैसा जघन्य अपराध कर बैठता है । सगोत्रीय विवाह के बारे में कुछ लोगों का तर्क है कि हिन्दू धर्म के लोगों की पहचान गोत्र से होती है । इसका मतलब यह निकाला जाता है कि एक गोत्र के सभी लोग एक परिवार के होते है । वे इस मामले में विज्ञान का हवाला देते हुए कहते है कि एक गोत्र का मतलब जेनिटिक्स समानता । अगर एक ही परिवार या गोत्र में विवाह होता है तो उनके बच्चों में जेनिटिक्स विकृतियाँ उत्पन्न हो सकती है । यह तर्क सगोत्रीय विवाह के विरोधियों का है किन्तु इस तरह का कोई वैज्ञानिक शोधपत्र अभी तक तो सामने नहीं आया है ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;दरसल ऑनर किलिंग समस्या का एक बड़ा कारण राजनैतिक है । अपने वोट बैंक को मजबूत करने के खातिर राजनैतिक पार्टियों और राजनेताओं द्वारा देश में जातीयता को बढ़ावा दिया जा रहा है । सगोत्रीय विवाह के सवाल पर रोहतक में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खाप पंचायतों के साथ खड़े नजर आते है और खाप पंचायतों को गैर सरकारी संगठन साबित करते है । तो कही नवीन जिंदल हिन्दू विवाह कानून में संशोधन कर सगोत्रीय विवाह पर रोक लगाने जैसी खाप पंचायतों की मांग को पार्टी में उठाने का आश्वासन देते नजर आते है ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;इज्जत के खातिर मौत देने का सिलसिला आखिर कब रुकेगा ? आखिर कब तक मान सम्मान के नाम पर युवाओं की हत्या होती रहेगी ? कौन है ! जो इस जघन्य कृत्य को चुनौती देने की हिम्मत करेगा ? इसका जवाब कानून नहीं है, इसका जवाब हम सभी को अपने आप से पूछना है, इस समाज से पूछना है, जिसके बीच हम रहते है ।. हमें अपने आप को बदलना होगा, रूढ़िवादिता के चंगुल से स्वयं को और समाज को छुड़ाना होगा, जातिवाद के दलदल से बाहर आकर, ऊँच-नीच के भेद-भाव को ख़त्म करना होगा, और सबसे बड़ी बात तो यह है कि उन परिवारों को भरोसा देना होगा कि अगर तुम्हारे बच्चे सगोत्रीय या अंतरजातीय विवाह करते है तो तुम्हे अपने समाज में सामाजिक बहिष्कार का दंश नहीं झेलना होगा. परिवार के दुसरे बच्चे के विवाह को लेकर सजातीय बहिष्कार नहीं किया जायेगा. तुम्हे किसी तरह की छीटाकशी और तानाकशी का सामना नहीं करना पड़ेगा. अगर हम यह सब नहीं कर पाए तो शायद आने वाला विधेयक या कानून भी ऑनर किलिंग पर लगाम लगाने में सक्षम नहीं होंगें ? &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-3198190939185882935?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/3198190939185882935/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=3198190939185882935&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3198190939185882935'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3198190939185882935'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_24.html' title='कब रुकेगी इज्जत के खातिर मौत (ऑनर किलिंग) का सिलसिला'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/TCQtVuDuC-I/AAAAAAAAALQ/fsFZWkjfMZA/s72-c/Kuldeep+%26+Monika.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-4356607477221335454</id><published>2010-06-22T09:49:00.000-07:00</published><updated>2010-06-22T09:56:21.821-07:00</updated><title type='text'>४९८ (ए) का शिकार एक और परिवार</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;महिलाओं को दहेज उत्पीड़न के सुरक्षाकवच के रूप में ४९८ (ए) एक ऐसा हथियार मिल गया है कि वे अब इसका जरूरत से ज्यादा दुरूपयोग करने लगी हैं इस समय देश में दहेज उत्पीड़न के मुकदमों की बाढ़ सी आ गई है दहेज उत्पीड़न के मुकदमें दर्ज कराने में महिला संगठन अग्रणी भूमिका निभा रही हैं इसकी एक बानगी देखने को मिली जब सुबह १० बजे ऑफिस में आया। अभी आफिस पहुंचा भी नहीं था कि एक घबराया हुआ युवक ऑफिस में आया नाम पूछने पर पता चला कि उसका नाम विकी डे था । वह बंगलूरू स्थित एक्सेंचर नामक आउटसोर्सिंग कंपनी में काम करता है उसने इंटरनेट पर हमारे बारे में पता करके हमारे पास आया था।&lt;br /&gt;पूछने पर उसने जो अपने परिवार के उत्पीड़न की कहानी बताई उससे मेरे सामने दहेज उत्पीड़न ४९८ (ए) के माध्यम से बेकसूर ससुराल वालों को एक महिला द्वारा सामाजिक और मानसिक प्रताड़ना की एक कहानी फिर से आ गई  कि आखिर एक महिला झूठी शिकायत करती है तो पति और उसके बूढ़े माँ- बाप और रिश्तेदार फ़ौरन ही बिना किसी विवेचना के गिरफ्तार कर लिए जायेंगे और गैर-जमानती टर्म्स में जेल में डाल दिए जायेंगे, भले चाहे की गई शिकायत फर्जी और झूठी ही क्यों न हो ! आप शायद उस गलती की सज़ा पायेंगे । जो आपने की ही नहीं और आप अपने आपको निर्दोष भी साबित नहीं कर पाएँगे अगर आपने अपने आपको निर्दोष साबित कर भी लिया तब तक शायद आप समाज में एक जेलयाफ्ता मुजरिम कहलायेंगे ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;विकी डे नें बताया कि कि उसके भाई विक्रम डे की पत्नी और उसकी भाभी प्रिया मोंडल नें भाई विक्रम सहित उसके बूढ़े माता-पिता और दो बहनों के विरुद्ध वहाँ की एक स्थानीय महिला समिति के सहयोग से दहेज उत्पीडन का स्थानीय पुलिस थाना ऑल वूमन पुलिस थाने में एफआईआर क्रमांक ५९/२०१० भा।द.वि. ४९८ (ए), ३४  के तहत मुकदमा दर्ज कराया है । विकी डे ने बताया कि उसके भाई विक्रम की शादी जब प्रिया से हुई थी उस समय वह दसवी में पढ़ रही थी । उस समय दोनों परिवारों ने यह तय किया था कि बारहवीं तक की पढ़ाई प्रिया अपने मायके में ही रह कर करेगी सो उसने बारहवीं तक की पढ़ाई अपने मायके में ही रह कर की । इस बीच विक्रम की गोवा में अच्छी नौकरी लग गई जब वह विक्रम के घर आई तो विक्रम और प्रिया दोनों ने यह तय किया कि थोड़े दिनों बाद गोवा में घर लेकर वहाँ शिफ्ट हो जायेंगे ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;विकी डे का भाई विक्रम प्रिया के साथ कुछ दिन गुजारने के बाद गोवा चला गया प्रिया विक्रम के माँ-बाप और दोनों बहनों के साथ गुवाहाटी में रहने लगी किन्तु इसी बीच प्रिया के पास किसी अनजान आदमी का फोन आने लगा जिसपर वह घंटों बात करती थी । जब बात करने का सिलसिला ज्यादा बढ़ गया तो विक्रम के माता-पिता को यह नागवार लगने लगा । फोन पर इस गुफ्तगूं से विक्रम की माँ नाराज होकर प्रिया को एक दिन काफी खरी-खोटी सुनायी और कहा कि आइंदा किसी भी आदमी का तुम्हारे पास फोन नहीं आना चाहिए । इस पर प्रिया ने भी विक्रम की माँ का जवाब दिया और वह अपना सामान लेकर अपने मायके चली गई । उसके जाते समय विक्रम की माँ-पिताजी और बहनों ने रोकने की कोशिश की किन्तु प्रिया नहीं मानी । वह विक्रम के परिवार को झिड़क कर अपने मायके चली गई ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;१ मई २०१० को ऑल वूमन पुलिस थाने गुवाहाटी से विक्रम के घर पर शाम को ४।०० बजे पुलिस आई और विक्रम के माँ-बाप को उठाकर थाने ले गई विक्रम की बहन निर्मला डे के काफी अनुरोध करने के बाद तथा १०,००० रूपये लेकर पुलिस ने रात को १० बजे विक्रम के माँ-बाप को निर्मला डे से यह कहते हुए छोड़ा कि बाहर के बाहर मामले को निपटा लो अथवा अपने भाई को गोवा से बुला लो, उसके आने के बाद तुम लोग पुलिस स्टेशन में आ जाओ मैं प्रिया और उसके परिवार को बुलाकर समझौता करवा दूँगा । विक्रम की बहन निर्मला डे ने गोवा फोन कर विक्रम को सारी स्थिती की जानकारी दी और जल्दी से गुवाहाटी आने को कहा लेकिन कंपनी से विक्रम को देर से छुट्टी मिलने के कारण ९ मई २०१० को वह गुवाहाटी पहुँचा । वहाँ पहुँचकर वह सीधे ससुराल यानि प्रिया के माता-पिता के पास गया और उसने समाज में अपने और अपने परिवार के मान-सम्मान का हवाला देते हुए केस उठाने के लिए अनुरोध किया ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;विक्रम ने प्रिया से यह भी कहा कि अगर वह माँ और पिता जी के साथ नहीं रहना चाहती तो हमारे साथ गोवा चलो और वहाँ हमारे साथ रहो किन्तु प्रिया ने विक्रम के साथ कहीं भी जाने से मना कर दिया इतना ही नहीं प्रिया की माँ दुर्गा मोंडल और भाई कार्तिक मोंडल नें विक्रम को बेइज्जत करके अपने घर से निकाल दिया तथा विक्रम के गोवा से आने की सुचना पुलिस को दे दी, पुलिस ने विक्रम और उसके माँ-बाप को थाने में बुलाकर गिरफ्तार कर लिया । तथा विक्रम डे की दोनों बहनों क्रमशः निर्मला डे उम्र २८ वर्ष और बबली डे उम्र १७ वर्ष को गिरफ्तार करने के लिए ढूढ़ने लगी तो निर्मला डे नें बंगलूरू स्थित भाई विकी डे से संपर्क किया । विकी डे नें बंगलूरू से २५,००० रुपया भेजा । जिससे निर्मला डे और बबली डे की अग्रिम जमानत गुवाहाटी उच्च न्यायालय से हो सकी किन्तु अभी भी विकी की माँ सीता रानी डे और पिता निरमोय डे तथा भाई विक्रम डे की अभी भी जमानत नहीं हो सकी है । विकी डे के अनुसार उसकी माँ सीता रानी डे की उम्र ५७ वर्ष और उसके पिता निरमोय डे की उम्र ६३ वर्ष है उम्र के अंतिम पड़ाव पर हमारे माता-पिता को मेरे भाभी प्रिया के कारण यह दिन देखना पड रहा है विकी डे के अनुसार प्रिया और उसके मायके के लोगों ने जान-बूझ कर उसके माता-पिता, भाई और बहनों को झूठे मुकदमें में फंसाया है ।&lt;br /&gt;विकी डे यह कहते कहते कि हमारी भाभी ने हमारे बूढ़े माँ-बाप और भाई को जेल में डलवा दिया है । हमारी बहनों को अग्रिम जमानत लेनी पडी, आखिर उनका क्या दोष है ? क्या भाभी के गलती करने पर हमारे माँ-बाप उसे डाट नहीं सकते इतना कहते कहते उसके ऑख में आँसू आ जाते हैं और वह फफक कर रो पड़ता है । विकी डे बताता है कि उसके भाई की अच्छी-खासी नौकरी जेल में जाने के वजह से चली गई । उसके बहन की भी नौकरी भी झूठे मुकद्दमें के वजह से रोज-रोज के भाग-दौड के कारण खतरे में है विकी डे कहता है कि वह अपने कंपनी में जहां काम करता है वह यह नहीं बता सकता कि उसका पूरा परिवार दहेज उत्पीड़न के झूठे मुकदमें के कारण जेल में है इसलिए उसने अपनी कंपनी से अपनी माँ के बीमारी का बहाना करके छुट्टी लेकर माँ-बाप और भाई को छुड़ाने गुवाहाटी जा रहा है ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;बहरहाल हमने विकी डे और उसके माँ-बाप भाई बहनों के साथ दहेज उत्पीड़न के नाम पर किये जा रहे अत्याचार में विकी और उसके परिवार का गुवाहाटी में संस्था के माध्यम से मदद करने का निर्णय लिया है । हमने संस्था के आसाम राज्य इकाई के पदाधिकारियों से कहा है कि आसाम इकाई के संस्था के वकील के माध्यम से विकी डे की मदद करें और उसके परिवार की जमानत कराएँ । यह मामला संस्था के समक्ष आने पर विकी और उसके परिवार की हमारे तरफ से उन्हें जमानत पर तो रिहा करा दिया जायेगा परन्तु उन लाखों विकी डे और उनके परिवारों की कौन मदद करेगा जो आये दिन ४९८ (ए) के झूठे मुकदमों में फंसाकर प्रताड़ित किये जा रहे हैं ।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-4356607477221335454?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/4356607477221335454/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=4356607477221335454&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4356607477221335454'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4356607477221335454'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_22.html' title='४९८ (ए) का शिकार एक और परिवार'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-2871631070060731010</id><published>2010-06-17T01:24:00.000-07:00</published><updated>2010-06-17T01:25:54.722-07:00</updated><title type='text'>डॉ महंगाई सिंह की सरकार का एक अहम् पैतरा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;एंडरसन को विदेश भगाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले लोगों के तरफ से देशवासियों का ध्यान बटाने के लिए डॉ महंगाई सिंह की सरकार नें एक अहम् फैसला लिया है पेट्रोल और डीजल का दाम बढ़ा दो जिससे आम आदमी और मीडिया का ध्यान भोपाल गैस त्रासदी से हटा कर बढ़े हुए पेट्रोल और डीजल के दाम के बहस में उलझा दिया जाय आप लोगों नें देखा होगा कि सरकार जब यह देखती है कि किसी खास मुद्दे पर मीडिया और देश की जनता सरकार को घेर रही है तो सरकार तत्काल उस मुद्दे को पीछे धकेलने के लिए एक नया मुद्दा उछाल देती है&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-2871631070060731010?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/2871631070060731010/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=2871631070060731010&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2871631070060731010'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2871631070060731010'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_17.html' title='डॉ महंगाई सिंह की सरकार का एक अहम् पैतरा'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-7139921269978276211</id><published>2010-06-07T22:58:00.000-07:00</published><updated>2010-06-07T22:59:50.196-07:00</updated><title type='text'>महंगाई विरोधी जनांदोलन का फैसला</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;महंगाई को लेकर आम आदमी बेहद लाचार है और सरकार द्वारा ठगा सा महसूस कर रहा । है पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाए जाने की खबर सुनकर एक बार फिर चिंतित होगया है इसी के मद्देनजर मुंबई के तमाम रेसिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य तथा हाऊसिंग सोसायटियों के सदस्यों नें फैसला किया है क़ि जिस दिन सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का दाम बढ़ाएगी उस दिन हाऊसिंग सोसायटियों काला झंडा लगाकर और हांथों में काली पट्टी बांध कर सरकार द्वारा ताबड़तोड़ बढाई जा रही महंगाई का विरोध करेगे ।&lt;br /&gt;यह प्रतीकात्मक विरोध होगा आगे चलकर प्रत्येक माह के एक पुरे सप्ताह यह प्रक्रिया चलाई जायेगी इसे "महंगाई के विरुद्ध साप्ताहिक विरोध" नाम दिया जायेगा मुंबईवासियों नें देश के सभी प्रबुद्ध नागरिकों से भावनात्मक अपील की है क़ि प्रत्येक शहर के लोग इस प्रतीकात्मक महंगाई विरोधी जनांदोलन को अपने-अपने रेसिडेंस एरिया, हाऊसिंग कालोनी, हाऊसिंग सोसायटी शुरू करें।&lt;br /&gt;इस बीच खबर आयी है कि पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ाने का फैसला फ़िलहाल टाल दिया गया है   हालाँकि सोमवार 7 जून को मंत्रियों का समूह पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला लिया जाना था । इसके हिसाब से गणनाएं भी की जा रही थीं कि इंडियन ऑयल से लेकर ओएनजीसी का मूल्यांकन कितना बढ़ जाएगा और उनके शेयर कितने बढ़ सकते हैं। लेकिन कोरम न पूरा होने से मंत्रियों के समूह की बैठक ही न हो सकी  । &lt;br /&gt;मंत्रियों के इस समूह (ई-जीओएम) के अध्यक्ष वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी हैं। सोमवार की बैठक में प्रणव मुखर्जी समेत पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा, उर्वरक मंत्री एम के अलागिरी, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोटेंक सिंह आहलूवालिया और कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर ने हिस्सा लिया है। लेकिन चार प्रमुख मंत्रियों की गैर-मौजूदगी के चलते कोई फैसला नहीं हो सका। अनुपस्थित मंत्रियों में रेल मंत्री ममता बनर्जी और कृषि मंत्री शरद पवार शामिल हैं। तेल सचिव एस सुंदरेशन के मुताबिक बैठक काफी अच्छी रही। लेकिन मंत्रियों के न होने से कोई फैसला नहीं लिया जा सका। जल्दी ही फिर बैठक बुलाई जाएगी। मंत्रियों के समूह को किरीट पारिख समिति की सिफारिशों पर फैसला लेना है जिसमें पेट्रोल और डीजल पर मूल्य नियंत्रण खत्म करने की बात कही गई है।&lt;br /&gt;इसे मान लेने पर पेट्रोल के दाम 3.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाएंगे। इसका राजनीतिक विरोध हो रहा है। खासकर, ममता बनर्जी इसे मानने को तैयार नहीं हैं। लेकिन मुरली देवड़ा इसे हर हालत में लागू करवाना चाहते हैं। बावजूद इसके मुंबईवासियों नें अपने इस निर्णय पर दृढ़ है कि जिस दिन सरकार पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ाएगी उस दिन से प्रतीकात्मक महंगाई विरोधी जनांदोलन की शुरुवात करेंगे और आगे चलकर इसे "महंगाई के विरुद्ध साप्ताहिक विरोध" का रूप दे दिया जायेगा ।&lt;br /&gt;मुंबईवासियों के इस प्रयास की सराहना  &lt;a href="http://hprdindia.org/"&gt;Honesty Project for Real Democracy in India&lt;/a&gt; के माडरेटर जय कुमार झा ने भी दिल्ली से की है. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-7139921269978276211?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/7139921269978276211/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=7139921269978276211&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7139921269978276211'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/7139921269978276211'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_8735.html' title='महंगाई विरोधी जनांदोलन का फैसला'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-2571610584634483986</id><published>2010-06-07T10:24:00.000-07:00</published><updated>2010-06-07T10:25:50.678-07:00</updated><title type='text'>महंगाई विरोधी जनांदोलन का फैसला</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;दरसल महंगाई को लेकर आम आदमी बेहद लाचार है और सरकार द्वारा ठगा सा महसूस कर रहा । है पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाए जाने की खबर सुनकर एक बार फिर चिंतित होगया है इसी के मद्देनजर मुंबई के तमाम रेसिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य तथा हाऊसिंग सोसायटियों के सदस्यों नें फैसला किया है क़ि जिस दिन सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का दाम बढ़ाएगी उस दिन हाऊसिंग सोसायटियों काला झंडा लगाकर और हांथों में काली पट्टी बांध कर सरकार द्वारा ताबड़तोड़ बढाई जा रही महंगाई का विरोध करेगे ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;यह प्रतीकात्मक विरोध होगा आगे चलकर प्रत्येक माह के एक पुरे सप्ताह यह प्रक्रिया चलाई जायेगी इसे "महंगाई के विरुद्ध साप्ताहिक विरोध" नाम दिया जायेगा मुंबईवासियों नें देश के सभी प्रबुद्ध नागरिकों से भावनात्मक अपील की है क़ि प्रत्येक शहर के लोग इस प्रतीकात्मक महंगाई विरोधी जनांदोलन को अपने-अपने रेसिडेंस एरिया, हाऊसिंग कालोनी, हाऊसिंग सोसायटी शुरू करें। मुंबईवासियों के इस प्रयास की सराहना  &lt;a href="http://hprdindia.org/"&gt;Honesty Project for Real Democracy in India&lt;/a&gt; के माडरेटर जय कुमार झा ने भी दिल्ली से की है. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-2571610584634483986?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/2571610584634483986/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=2571610584634483986&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2571610584634483986'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2571610584634483986'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_3323.html' title='महंगाई विरोधी जनांदोलन का फैसला'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-4951997913466061577</id><published>2010-06-07T08:30:00.000-07:00</published><updated>2010-06-07T08:31:48.060-07:00</updated><title type='text'>मुंबई के लोगों नें किया महंगाई विरोधी जनांदोलन का फैसला</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;दरसल महंगाई को लेकर आम आदमी बेहद लाचार है और सरकार द्वारा ठगा सा महसूस कर रहा । है पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाए जाने की खबर सुनकर एक बार फिर चिंतित होगया है इसी के मद्देनजर मुंबई के तमाम रेसिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य तथा हाऊसिंग सोसायटियों के सदस्यों नें फैसला किया है क़ि जिस दिन सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस का दाम बढ़ाएगी उस दिन हाऊसिंग सोसायटियों काला झंडा लगाकर और हांथों में काली पट्टी बांध कर सरकार द्वारा ताबड़तोड़ बढाई जा रही महंगाई का विरोध करेगे ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;यह प्रतीकात्मक विरोध होगा आगे चलकर प्रत्येक माह के एक पुरे सप्ताह यह प्रक्रिया चलाई जायेगी इसे "महंगाई के विरुद्ध साप्ताहिक विरोध" नाम दिया जायेगा मुंबईवासियों नें देश के सभी प्रबुद्ध नागरिकों से भावनात्मक अपील की है क़ि प्रत्येक शहर के लोग इस प्रतीकात्मक महंगाई विरोधी जनांदोलन को अपने-अपने रेसिडेंस एरिया, हाऊसिंग कालोनी, हाऊसिंग सोसायटी शुरू करें। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-4951997913466061577?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/4951997913466061577/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=4951997913466061577&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4951997913466061577'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4951997913466061577'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/06/blog-post_8682.html' title='मुंबई के लोगों नें किया महंगाई विरोधी जनांदोलन का फैसला'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-2144923826050670990</id><published>2010-05-21T09:32:00.000-07:00</published><updated>2010-05-21T09:38:09.374-07:00</updated><title type='text'>15 हजार मछुआरे क्या मराठी माणुस नहीं हैं?</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/S_a2qL59DWI/AAAAAAAAALI/t25Yhm7iyAQ/s1600/Rnpar_Bandar_2_920511886.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5473763232982044002" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 350px; CURSOR: hand; HEIGHT: 238px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/S_a2qL59DWI/AAAAAAAAALI/t25Yhm7iyAQ/s400/Rnpar_Bandar_2_920511886.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;strong&gt;मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर महाराष्ट्र का एक जिला है- रत्नागिरी। जिले की आबादी लगभग 17 लाख है जिले में कुल 9 तालुकाएं है मंडनगढ़, दापोली, खेड़, चिपलून, गुहागर, संगमेश्वर, लोज़ा, राजापुर, और रत्नागिरी। रत्नागिरी तालुका में समुद्र के किनारे दो गाँव है (1) गोलप मोहल्ला (2) पावस, इन दोनों गावों में लगभग 5000 मछुआरों का परिवार रहता है जिसमें हिन्दू कोली समुदाय और मुस्लिम दाल्दी समुदाय के लोग है और यह दोनों समुदाय मिलजुल कर समुद्र से मछली पकड़कर अपनी आजीविका चलाते है।&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;मछली पकड़ने का यह कार्य इनका पुस्तैनी धंधा है और लगभग 15,000 लोग इस धंधे पर आश्रित हैं। ये लोग मछली पकड़ने के इस व्यवसाय को सदियों से करते चले आ रहे है किन्तु अब इन मछुआरों का मछली पकड़ने का व्यवसाय खतरे में पड़ गया है अब इन्हें अपना भविष्य अंधकारमय दिख रहा है इनके नजरों के सामने ही इनके व्यवसाय को तहस-नहस किया जा रहा है.इन मछुआरों के रोजगार को तहस-नहस करने के पीछे एक कंपनी है जो कि 20 वर्ष पहले यहाँ आयी है। कंपनी का नाम है फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड। स्थानीय लोग एवं कंपनी से पीड़ित मछुआरे बताते है कि इस कंपनी और कंपनी के मालिक को मराठा क्षत्रप शरद पवार का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए इन मछुआरों की व्यथा को स्थानीय समाचार पत्रों में भी जगह नहीं मिलती। इलेक्ट्रानिक मिडिया तो दूर की बात है क्योकि यह कंपनी इन्हें नियमित रूप से विज्ञापन देती रहती है सो मछुआरों के इन सवालों से मिडिया नें अपने आपको अलग कर लिया है. चूँकि कंपनी को शरद पवार का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए किसी स्थानीय नेता की इन मछुआरों के पक्ष में खड़े होने की हिम्मत नहीं है. अब ये मछुआरे अपने आपको मछली पकड़ने के अपने पुस्तैनी व्यवसाय से बेदखल किये जाते असहाय होकर देख रहे है कंपनी द्वारा इनके व्यवसाय पर हमले के विरुद्ध उक्त गांव के सभी मछुआरे अपने-अपने घरों के छतों पर कंपनी के अत्याचार के विरोध स्वरूप काले झंडे लगा रखें है.&lt;br /&gt;फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 20 वर्ष पहले यहाँ आकर अपनी जेट्टी बनाया था तथा दूर समुद्र में खड़े मालवाहक जहाजों से माल बार्जों पर लाद कर अपनी जेट्टी तक लाती है। कंपनी को रनपार बंदर के इर्द-गिर्द के समुद्र में किसी की दखलंदाजी बर्दास्त नहीं। कंपनी नहीं चाहती कि मछुआरे मछली पकड़ने के लिए समुद्र में आवाजाही करें। हालाँकि अब तक कंपनी के किसी अधिकारी ने खुलकर इस बारे में कुछ नहीं कहा है. मछुआरों की रनपार बंदर में अपनी एक जेट्टी है. मौजूदा समय में मछुआरों के पास 4 बड़े यांत्रिक बोट (ट्रालर), 60 छोटे यांत्रिक बोट, 20 सादा बोट (बिना यन्त्र के) हैं. मछुआरे इन बोटों को रनपार बंदर में रखते है. रनपार बंदर अंग्रेजी के U के आकर का है. मछुआरे बताते है कि कंपनी के बार्जों के लगातार आवाजाही से भारी मात्रा में रेत किनारे पर बह कर आ जाती है जिसमें मछुआरों की बोट फंस जाती है. मछुआरों की जेट्टी के आस-पास रेत पट जाने के वजह से समुद्र के ज्वार-भाटे की भरती जहाँ तक आती थी अब वहां रेत पट गयी है मछुआरों की बोटों का किनारे तक आना-जाना मुश्किल हो रही है, इस कारण से उन्हें भारी नुकसान सहना पड़ रहा है.&lt;br /&gt;समुद्र में खड़े मालवाहक जहाजों तक बार्जों के आने-जाने के लिए कंपनी नें सिग्नल की बोई लगा रखी है जिसमें आये दिनों मछुआरों की मछली पकड़ने की जाली फंस कर फट जाती है। एक जाली के फटने से मछुआरों का लगभग 70 000/- रूपये का नुकसान हो रहा है. पहले जिस रास्ते से मछुआरे समुद्र में जाते थे अब उस रास्ते के बीचों-बीच से कंपनी के बार्ज मालवाहक जहाजों तक आ जा रहे है इस कारण कंपनी अब मछुआरों को सीधे समुद्र में जाने से सख्ती से रोक लगा रही है. इस वजह से अब मछुआरों को लगभग 8 किलोमीटर घूम कर समुद्र में जाना पड़ता है, जिसके कारण मछुआरों को हर बार अतिरिक्त 20 लीटर डीजल जलाना पड़ता है. इससे मछुआरों को हर बार समुद्र में जाने पर अतिरिक्त 800/- रूपये का बोझ पड़ रहा है जो कि मछुआरों के आर्थिक स्थिति को और खराब कर रहा है.&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;वर्ष 2006 में महाराष्ट्र राज्य की मत्स्य उद्योग मंत्री श्रीमती मीनाक्षी ताई पाटील के कार्यकाल में रनपार बंदर के मच्छीमार जेट्टी के विकास के लिए कुल 3 करोड़ रूपये का फंड पास किया गया था जिसमे मछुआरों के गांव से जेट्टी तक के सड़क का निर्माण, मच्छीमार जेट्टी का पुनर्विकास, मछुआरों द्वारा पकड़ी गयी मछलियों के नीलामी के लिए नीलाम घर (आक्सन हॉउस) का निर्माण, मच्छीमार जेट्टी पर मछुआरों के लिए शौचालय एवं स्नान घर का निर्माण आदि के लिए था. मत्स्य विभाग द्वारा उक्त फंड से मछुआरों के जेट्टी का काम शुरू किया गया लगभग 65 लाख रूपये खर्च करके मछुआरों के गांव से मछुआरों की जेट्टी तक के सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया और 12 फिट चौड़ी और 1 किलोमीटर लंबी सड़क बन भी गयी किन्तु मच्छीमार जेट्टी का सरकारी फंड से विकास होते देख फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड नें रत्नागिरी सत्र न्यायालय में दिनांक 12 /03 /2006 को (दीवानी वाद क्र. रे.मु.नं. 73 / 2006 ) सहायक संचालक मत्स्य विभाग, रत्नागिरी कोल्हापुर के विरूद्ध मुकदमा दायर कर दिनांक 17 /03 /2006 को उक्त निर्माण कार्य पर एकतरफा स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया. जब इस स्थगन आदेश के बारे में मछुआरों नें पता किया तो पता चला कि मत्स्य विभाग नें मुकद्दमें की पैरवी के लिए सत्र न्यायालय में अपना वकील ही नहीं खड़ा किया था जिसके कारण कंपनी को एकतरफा स्थगन आदेश प्राप्त हो गया मछुआरों का कहना है कि कंपनी तो हमारे पीछे पड़ी है किन्तु महाराष्ट्र राज्य मत्स्य विभाग द्वारा भी कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए मुकद्दमे की पैरवी के लिए वकील न खड़ा करके हमारे साथ धोखाधड़ी की गयी है महाराष्ट्र सरकार द्वारा मच्छीमार जेट्टी के विकास के लिए पास किये गये 3 करोड़ रूपये में से बाकी बचे 2 करोड़ 35 लाख रूपये वैसे ही पड़े है. मछुआरों की दो सोसायटियां है (1) परशुराम मच्छीमार सोसायटी, (2) पावस मच्छीमार सोसायटी, इन दोनों सोसायटियों के पदाधिकारी कंपनी के इस कार्रवाई से और मत्स्य विभाग द्वारा कंपनी का साथ देने से अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है. मछुआरों के अनुसार कंपनी जिस जमीन को अपनी जमीन बताकर सत्र न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किया वह सी.आर.जेड. ( केंद्र सरकार) की जमीन है और वहां तक ज्वार-भाटे के समय समुद्र की भरती आती है दोनों सोसायटियों के पदाधिकारी सुरेन्द्र भडेकर, विट्ठल पावस्कर, प्रशांत हरचेकर, गणेश सुर्वे, जिक्रिया पावस्कर, शफी भुजबा, आदि मछुआरों के प्रतिनिधि के रूप में श्रीमती पाटील के बाद मत्स्य उद्योग मंत्री हसन मुश्रीफ़ से मिले और मछुआरों पर कंपनी द्वारा किये जा रहे अत्याचार को रोकने की गुहार लगायी. मछुआरों के प्रतिनिधि मंडल नें मांग की कि कंपनी के स्थगन आदेश के विरूद्ध हम सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे हमें मत्स्य विभाग अनुमती दे किन्तु हसन मुश्रिफ ने मछुआरों के अनुरोध को अनसुना कर दिया. इसके बाद भी मछुआरों के प्रतिनिधि मंडल नें अपना प्रयास जारी रखते हुए बंदर विकास मंत्री प्रीतम कुमार शेगावकर से मिले किन्तु वहां से भी मछुआरों को बैरंग वापस लौटना पड़ा. मछुआरे कहते है कि अब कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है हमारे सामने अब केवल दो रास्ते है या तो हम विदर्भ के किसानों की तरह आत्महत्या कर लें या गढ़चिरौली, चन्द्रपुर के आदिवासियों की तरह कंपनी, शासन और प्रशासन के विरुद्ध हथियार उठा लें. स्थानीय जानकार कंपनी के इन करतूतों को पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बता रहे है इनके अनुसार रनपार बंदर का 8 किलोमीटर का समुद्री किनारा है और रनपार बंदर के तीन तरफ से पहाड़ है इस 8 किलोमीटर लंबे समुद्री किनारे पर समुद्री घास मैन्ग्रोस की बहुतायत है समुद्री मछलियां इन्ही समुद्री मैन्ग्रोस के पास अंडे देने आती है रनपार बंदर का समुद्री किनारा मछलियों के अंडे देने का सबसे पसंदीदा जगह था किन्तु अब कंपनी के मालवाहक जहाज और बार्जों के आवाजाही से रनपार बंदर के समुद्री किनारे का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है अब जब संयुक्त राष्ट्र नें वर्ष 2010 को बायोडाईवर्सिटी इयर यानि जैव विविधता वर्ष घोषित किया है कंपनी ( फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड) रनपार बंदर के जैव विविधता को ध्वस्त करने पर तुली है. चूँकि यह कंपनी मछुआरों के रोजगार को छीन रही है इसलिए मछुआरे कंपनी के विरुद्ध आवाज उठा रहे है. मछली व्यवसाय के इस धंधे के कुल 15,000 आश्रितों के आजीविका को छीनने वाली इस कंपनी में केवल 300 लोग रोजगार पाते है जिसमे 26 लोग स्थानीय यानि मराठी माणुस हैं. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे, मनसे प्रमुख राज ठाकरे और मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण यह बताने की कोशिश करेंगे कि 15000 मछुआरे मराठी माणुस क्यों नहीं है?&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-2144923826050670990?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/2144923826050670990/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=2144923826050670990&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2144923826050670990'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/2144923826050670990'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2010/05/15.html' title='15 हजार मछुआरे क्या मराठी माणुस नहीं हैं?'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/S_a2qL59DWI/AAAAAAAAALI/t25Yhm7iyAQ/s72-c/Rnpar_Bandar_2_920511886.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-999058540235027004</id><published>2009-11-17T05:28:00.000-08:00</published><updated>2009-11-21T01:05:36.737-08:00</updated><title type='text'>भारतीय लोकतंत्र के मायने</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;भारत में आज लोकतंत्र के मायने क्या हैं कहने को तो यह छह दशक पुराना और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है किन्तु क्या जन सामान्य को इस लोकतंत्र का लाभ मिल रहा &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; आखिर भारत के लोकतान्त्रिक सरकारों की दिशा क्या है ? भारत विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र होने के कगार पर खड़ा है किन्तु किसका विकास हुआ क्या यह राष्ट्रीय संपत्ति का विकास है या कुछ चुनिन्दा उद्योगपतियों का या फिर जन सामान्य का यह गहन अध्ययन का विषय &lt;span class=""&gt;है । &lt;/span&gt;सरसरी तौर पर देखने से विकास तो अब केवल राजनैतिक घटनाओं तक ही सीमित हो गया लगता &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; देश में युवा बेरोजगारों की फेहरिस्त लगातार लंबी होती चली जा रही है । बेरोजगार रोजगार न मिलने के कारण आत्महत्या करने को विवश है । विकास के नाम पर सरकारी पैसे का दुरूपयोग, ठेकेदारों को लाभ पहुचाने एवं कमीशन हेतु अनाप-सनाप परियोजनाओं को मंजूरी देना और आम जनता से वसूले गये टैक्स के पैसे को उन परियोजनाओं में झोकना जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों का मुख्य लक्ष्य हो गया है&lt;span class=""&gt; ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span class=""&gt;आखिर &lt;/span&gt;स्पेशल इकोनामिक ज़ोन किसके लिए है ? स्पेशल इकोनामिक ज़ोन अधिनियम २००५ को लागू कर किसका भला किया जा रहा है और किसको बेदखल किया जा रहा है किसी से छुपा नहीं है । इस अधिनियम की आड़ लेकर किसानों को उनकी जमीनों से बेदखल करने का षड्यंत्र जारी है । इन्ही कारणों से कृषि का संकट और भी गहरा हो रहा &lt;span class=""&gt;है । &lt;/span&gt;क्या कृषि को हाशिये पर रख कर उद्योगों को उन्नत बनाया जा सकता है वह भी ऐसे उद्योगों को जिससे गिने-चुने उद्योगपतियों को लाभ हो । स्पेशल इकोनामिक ज़ोन को विकसित करने के नाम पर उद्योगपतियों को भारी पैमाने पर करों में छूट दी जा रही है इतना ही नहीं जनता से वसूले गए टैक्स का हजारों करोड़ रूपये सब्सिडी के नाम पर उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है साथ ही इन स्पेशल इकोनामिक ज़ोन से श्रम कानूनों को दूर रखने की पुरजोर कोशिशें हो रहीं है जिससे निरंकुश उद्योगपति श्रमिकों का शोषण कर सकें । मनमोहन, चिदंबरम और मोंटेक डेढ़ से दो दशक पहले (ट्रिकल डाउन थ्योरी) के बारे में कहा था कि समाज के शिखरों पर समृद्धी आयेगी तो वह नीचे तक पहुंच जायेगी किन्तु नतीजों की दिशा इन दावों से एकदम उलट दिखती &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; अर्थशास्त्री जॉन केनेथ गालब्रेथ ने "ट्रिकल डाउन थ्योरी" का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि घोड़े को चाहे कुछ भी खिलाओ पीछे से वह लीद ही निकलेगा यानि ट्रिकल डाउन थ्योरी की आड़ में उद्योगपतियों को चाहे जितना भी छूट और मुनाफा कूटने के अवसर दिए जाय तो भी वे श्रमिकों को उतना ही देंगे जिससे वे &lt;span class=""&gt;कारखाने में &lt;/span&gt;अपनी हड्डियाँ गला सकें ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;देश के नागरिकों के लिए लोकतंत्र को बड़ी सफाई से "ये जनता का, जनता से, जनता के लिए शासन है" का नारा दिया जाता है यह नारा आमजन को भ्रमित करने के लिए गढ़ा गया लगता है । अभी तक लोकसभा या &lt;span class=""&gt;विधानसभा के चुनावों में&lt;/span&gt; ऐसा कहीं भी नज़र नहीं आया कि चुनाव जनता के लिए हो रहे &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; नेताओं और उनकी तथाकथित पार्टियों द्वारा सत्ता हथियाने के उद्देश्य से अपनाए जा रहे हथकंडों को देख कर यही लगता है कि चुनाव सत्ता सुख की प्राप्ति के लिए हो रहे है इन चुनावों के पश्चात विजेता अपने कार्यकाल में जनता के हित कम और अपने हित अधिक साधते &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; विख्यात गांधीवादी व दर्शनशास्त्री प्रोफ़ेसर रामजी सिंह नें एक व्याख्यानमाला में कहा कि भारत में दलगत राजनीति का दीया बुझ चुका &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; दलगत राजनीति व सत्ता पर दलपतियों का कब्जा है और संसदीय प्रणाली महज औपचारिक लोकतंत्र बन गयी है । भारतीय लोकतंत्र पर परिवारवाद हावी &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; ध्यान से देखें तो आज आधी संसद ही परिवारवाद का नमूना &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; भारतीय राजनीति में परिवारवाद की मौजूदा स्थिती को देखकर सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले ५ से १० वर्षों में भारतीय संसद पर केवल ५०० परिवारों का कब्जा होगा और उन्ही का शासन भी ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;इन सबके बीच आम आदमी की स्थिती क्या है ? अभाव और गरीबी से त्रस्त मंहगाई की मार झेलने को मजबूर, मंहगाई की मार का सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है । दिन भर मेहनत करके भी मुश्किल से दो जून की रोटी पूरे परिवार को नसीब हो रही &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; लगभग ३५ करोड़ लोग भूखा सोने को विवश &lt;span class=""&gt;हैं ।&lt;/span&gt; राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की जनवरी २००८ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार २००५-०६ में लगभग १९ % आबादी मात्र १२ रूपये प्रतिदिन से कम में गुजारा कर रही &lt;span class=""&gt;थी ।&lt;/span&gt; इसी तरह २२% शहरी आबादी ५८० रूपये मासिक से भी कम में जीवनयापन करने को मजबूर है । देश की लगभग एक अरब दस करोड़ की आबादी में से शासक वर्ग और उसके नाभिनाल से जुड़े उच्च मध्य वर्ग और मध्यम मध्यवर्ग लगभग १५ से २० करोड़ के बीच है, इसमें पूंजीपतियों, व्यापारियों, ठेकेदारों, शेयर दलालों, कमीशन एजेंटों, कार्पोरेट प्रबंधकों, सरकारी नौकरशाहों, नेताओं, डाक्टरों, इंजीनियरों, उच्च वेतनभोगी प्रोफेसरों, मिडिया प्रबंधकों, अच्छी प्रक्टिस करने वाले वकीलों को गिना जा सकता &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt; इन्ही के लिए लोकतंत्र के मायने हो सकते हैं बाकी के लगभग ८८ से ९० करोड़ की आबादी के लिए आज भी लोकतंत्र के मायने नहीं &lt;span class=""&gt;हैं ।&lt;/span&gt; "अमर्त्य सेन के शब्दों में कहें तो मानव एक उदर के साथ दो हांथ और एक मस्तिष्क लेकर पैदा होता है और यह सत्ता और व्यवस्था की सफलता, असफलता होती है कि वह उसका किस तरह प्रयोग कराती है या तो उसके हांथ व मस्तिष्क से मानव समाज के विकास की ओर बढ़ा जा सकता है और व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है अन्यथा वह इसे व्यवस्था परिवर्तन के हथियार के रूप में प्रयोग करेगा जहां उसे सम्पूर्ण रोजगार, सम्पूर्ण सुविधाए, और समानता की &lt;span class=""&gt;उम्मीद होगी"&lt;/span&gt; ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-999058540235027004?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/999058540235027004/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=999058540235027004&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/999058540235027004'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/999058540235027004'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/11/blog-post_17.html' title='भारतीय लोकतंत्र के मायने'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-3101002361726130624</id><published>2009-11-10T08:00:00.000-08:00</published><updated>2009-11-11T03:08:21.155-08:00</updated><title type='text'>(पसंद की भाषा में) बोलने की आजादी पर हमला</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;कल महाराष्ट्र विधान सभा में २००९ के नवनिर्वाचित विधायकों के सपथ समारोह में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आज़मी के साथ सदन में हाथापाई और मारपीट की गयी । आज़मी का दोष यह था कि उन्होंने हिंदी में सपथ लेने का साहस &lt;span class=""&gt;किया विधानसभा के अंदर किसी तरह की हाथापाई या अभिव्यक्ति में बाधा पहुंचाना दरअसल सदन की &lt;span class=""&gt;अवमानना एवं बोलने की आजादी पर हमला &lt;/span&gt;है। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;संविधान के अनुच्छेद १९४ में राज्य के विधानमंडल को अधिकार होता है कि वे अपनी अवमानना के लिए अपने सदस्य या गैर-सदस्य को दंडित कर सकते हैं। &lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;अनुच्छेद १९४-३ यह कहता है कि विशेषाधिकार उल्लंघन के लिए राज्य विधानमंडलों के पास दंडित करने का वही अधिकार होगा, जो १९७८ में ४४ वें संविधान संशोधन के लागू होने के ठीक पहले था। सदन की अवमानना के लिए या विशेषाधिकार हनन के लिए सदन को जो तमाम अधिकार दिए गए हैं, उसमें जेल में निरूद्ध करना, बुलाकर फटकार लगाना या अन्य आवश्यक या उचित दंड देने के अधिकार शामिल हैं। इसके अलावा सदन को अपने सदस्यों को उपरोक्त दंडों के अलावा उनको निष्कासित करने या निलंबित करने या अन्य तरह से दंडित करने का अधिकार भी प्राप्त है। महाराष्ट्र विधानसभा में हमलावर विधायकों द्वारा अबू आजमी से हाथापाई या थप्पड़ मारना या कोई भी कार्रवाई करना गैरकानूनी कार्य करना सदन की अवमानना है। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;हालाँकि सदन नें हमलावर विधायकों को चार वर्ष के लिए निलंबित कर दिया यह बात आयी गयी हो जायेगी महाराष्ट्र का सदन भी आने वाले दिनों में अपना काम करने लगेगा अबू आसिम आज़मी भी अपने साथ किये गये दुर्व्यवहार को भूलकर अपने काम में व्यस्त हो जायेगे किन्तु इस घटना से अगर किसी की क्षति हुई है तो वह है अपने पसंद की भाषा में बोलने की आजादी क्षति ! इसकी क्षतिपूर्ति न तो हमलावर कर सकते है ( माफी मांगने पर भी), न अबू आसिम आज़मी और न तो वह सदन जिसने प्रस्ताव पास करके हमलावर विधायकों को चार वर्ष कल लिए निलंबित कर दिया ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;कुछ लोग इसे अबू आसिम आज़मी की राजनैतिक हठवादिता की उपमा देंगे तो कुछ लोग उपरोक्त हमलावरों को क्षेत्रीय भाषाई उग्रवाद की उपमा देंगे किन्तु यहाँ पर हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं यह पसंद की भाषा में बोलने की आजादी पर हमला है और अबू आसिम उसके वाहक बनें लेकिन उन्होंने इस मुद्दे के प्रवाह को मोड़ दिया विषय पर बुलाये गये कांफ्रेंस में बाल ठाकरे पर तीखी टिप्पणी की और वे बोलने की आजादी पर हुए हमले को मुद्दा नहीं बना सके । अगर वे इस मुद्दे को लेकर आम जनता में गये होते तो आम जन में नवीन राजनीतिज्ञों एवं व्यवस्थातंत्रों के विरूद्ध एक नई जागरूकता, एवं संघर्ष चेतना का निर्माण होता एवं अभिव्यक्ति के आजादी के वास्तविक लडाई के वाहक बनते ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;लोकतंत्र में अपनी बात अपनी भाषा में कहने की आजादी होनी चाहिए इसे रोकना लोकतंत्र पर कुठाराघात है क्योंकि अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता का मूल मानव अधिकार है । किसी को उसके पसंद की भाषा में बोलने से रोकना उसकी स्वतंत्रता का हनन है, उसके मानव अधिकारों का हनन है १० दिसम्बर १९४८ वह ऐतिहासिक दिन था जब संयूक्त राष्ट्र महासभा नें मानव अधिकार पर सार्वभौमिक घोषणा पत्र यानि युनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स जिसके अनुच्छेद १९ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को विचारों की अभिव्यक्ति और जानकारी हासिल करने का अधिकार है ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;भारत के संविधान के द्वारा प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति का मूल अधिकार दिया गया है जिसमें मनचाही अभिव्यक्ति के साथ भाषाई स्वतंत्रता भी शामिल है । देश के प्रत्येक नागरिक को अपने पसंद की भाषा में स्वयं को अभिव्यक्त करने का अधिकार है अगर इन अधिकारों से कोई किसी को वंचित करता है या रोकता है तो वह मानव अधिकारों के उल्लंधन का दोषी है साथ ही वह राष्ट्र की एकता व अखंडता पर कुठाराघात करने का दोषी भी होगा ।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-3101002361726130624?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/3101002361726130624/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=3101002361726130624&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3101002361726130624'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3101002361726130624'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='(पसंद की भाषा में) बोलने की आजादी पर हमला'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-1160958682575466258</id><published>2009-10-19T01:20:00.000-07:00</published><updated>2009-10-22T07:26:05.424-07:00</updated><title type='text'>पाकिस्तान में नहीं है सुरक्षित हिन्दू-सिख परिवारों के मानव अधिकार</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;पाकिस्तान में हिन्दू-सिख परिवारों के मानव अधिकारों को कुचला जा रहा है और पाकिस्तानी सरकार तमाशबीन बनकर तमाशा देख रही है हिन्दू-सिख परिवारों को धर्म परिवर्तन हेतु धमकाया जा रहा है इतना ही नहीं वहां के हिन्दू परिवारों की लड़कियों को ज़बरदस्ती मुसलमान बना लिया जाता है बहुत से कट्टरपंथी मुसलमान इस मुहिम पर बड़ी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं कि हिंदुओं को और ख़ासतौर पर उनकी बेटियों को मुसलमान बनाया जाए । पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष २००५-६ में लगभग पचास हिंदू लड़कियों ने इस्लाम क़बूल किया था। पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं का कहना है कि " हमने तो जैसे-तैसे वक़्त गुज़ार लिया लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पाकिस्तान में हालात अच्छे नहीं हैं । हम बहुत डर में ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। हमारे बुज़ुर्गों ने पाकिस्तान में रहने का फ़ैसला करके बहुत बड़ा ख़तरा मोल लिया था।” &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;अगस्त १९४७ में पाकिस्तान बनते समय उम्मीद की गई थी कि वो मुसलमानों के लिए एक आदर्श देश साबित होगा लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि पाकिस्तान एक मुस्लिम देश ज़रूर होगा मगर सभी आस्थाओं वाले लोगों को पूरी धार्मिक आज़ादी होगी। पाकिस्तान के संविधान में ग़ैर मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी के बारे में कहा भी गया है, “देश के हर नागरिक को यह आज़ादी होगी कि वह अपने धर्म की अस्थाओं में विश्वास करते हुए उसका पालन और प्रचार कर सके और इसके साथ ही हर धार्मिक आस्था वाले समुदाय को अपनी धार्मिक संस्थाएँ बनाने और उनका रखरखाव और प्रबंधन करने की इजाज़त होगी।” मगर आज के हालात पर ग़ौर करें तो पाकिस्तान में ग़ैर मुसलमानों की परिस्थितियाँ ख़ासी चिंताजनक हैं । उनकी पहचान पाकिस्तानी पहचान में खो सी गई है, बोलचाल और पहनावा भी मुसलमानों की ही तरह होता है, वे अभिवादन के लिए मुसलमानों की ही तरह अस्सलामुअलैकुम और माशाअल्लाह, इंशाअल्लाह जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं । पाकिस्तान में हिंदुओं की ज़्यादातर अबादी सिंध में है । सिंध और पंजाब में रहने वाले हिंदुओं के हालात में भी ख़ासा फ़र्क नज़र आता है सिंध में हिंदू अपने अधिकारों के लिए संघर्ष भी करते नज़र आते हैं लेकिन लाहौर में रहने वाले हिंदू जैसे पूरे तौर पर सरकार पर निर्भर हैं और उन पर सरकार की निगरानी भी &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;इधर तालिबानियों के निशाने पर आए सिख परिवार पलायन करने को मजबूर है पिछले दिनों औरकज़ई ऐजेंसी इलाक़े में तालिबान चरमपंथियों ने जज़िया (सुरक्षा कर) नहीं चुकाने पर सिख धर्म के लोगों को घरों को तोड़ दिया लंबे समय से सिख समुदाय के लोग इस इलाक़े में रहते आए हैं और औरकज़ई एजेंसी में मोरज़ोई के नज़दीक फ़िरोज़खेल में लगभग ३५ घर सिखों के हैं। तालिबान और सिख समुदाय के बीच जज़िया तय भी हुआ था, लेकिन ऐसा माना जाता है कि रक़म के बहुत अधिक होने के वजह से सिख समुदाय इसे नहीं दे सके. इन इलाक़ों में पाकिस्तान सरकार की पकड़ बहुत ही कमज़ोर होने के कारण मूकदर्शक बनी तमाशा देख रही है, इसलिए तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है और किसी कार्रवाई की उम्मीद भी नहीं की जा सकती भारत सरकार ने इस मामले पर केवल चिंता जता कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करती दिखाई दी जो कि चिंता का विषय है । &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;पिछले चार सालों में पाकिस्तान से करीब ५ हजार हिंदू तालिबान के डर से भागकर भारत आ गए, कभी वापस न जाने के लिए। अपना घर, अपना सबकुछ छोड़कर, यहां तक की अपना परिवार तक छोड़कर, आना आसान नहीं है। लेकिन इन लोगों का कहना है कि उनके पास वहां से भागने के अलावा कोई चारा नहीं था। २००६ में पहली बार भारत-पाकिस्तान के बीच थार एक्सप्रेस की शुरुआत की गई थी। हफ्ते में एक बार चलनी वाली यह ट्रेन कराची से चलती है भारत में बाड़मेर के मुनाबाओ बॉर्डर से दाखिल होकर जोधपुर तक जाती है। पहले साल में ३९२ हिंदू इस ट्रेन के जरिए भारत आए। २००७ में यह आंकड़ा बढ़कर ८८० हो गया। पिछले साल कुल १२४० पाकिस्तानी हिंदू भारत आए जबकि इस साल अगस्त तक एक हजार लोग भारत आए और वापस नहीं गए हैं। वह इस उम्मीद में यहां रह रहे हैं कि शायद उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाए, इसलिए वह लगातार अपने वीजा की अवधि बढ़ा रहे हैं। राना राम पाकिस्तान के पंजाब में स्थित रहीमयार जिले में अपने परिवार के साथ रहता था। अपनी कहानी सुनाते हुए उसने कहा- वह तालिबान के कब्जे में था। उसकी बीवी को तालिबान ने अगवा कर लिया। उसके साथ रेप किया और उसे जबरदस्ती इस्लाम कबूल करवाया। इतना ही नहीं, उसकी दोनों बेटियों को भी इस्लाम कबूल करवाया। यहां तक की जान जाने के डर से उसने भी इस्लाम कबूल कर लिया। इसके बाद उसने वहां से भागना ही बेहतर समझा और वह अपनी दोनों बेटियों के साथ भारत भाग आया। उसकी पत्नी का अभी तक कोई अता पता नहीं है। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;विडंबना यह है भारत में शरणार्थियों के लिए कोई नीति नहीं है। पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों के लिए काम करने वाले सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढ़ा का मानना है कि- पाकिस्तान के साथ बातचीत में अथवा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत सरकार कभी पाकिस्तान में हिदुंओं के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार व अत्याचार का मुद्दा नहीं उठाती है। उन्होंने कहा- २००४-०५ में १३५ शरणार्थी परिवारों को भारत की नागरिकता दी गई, लेकिन बाकी लोग अभी भी अवैध तरीके से यहां रह रहे हैं। यहां पुलिस इन लोगों पर अत्याचार करती है। उन्होंने कहा- पाकिस्तान के मीरपुर खास शहर में दिसंबर २००८ में करीब २०० हिदुओं को इस्लाम धर्म कबूल करवाया गया। बहुत से लोग ऐसे हैं जो हिंदू धर्म नहीं छोड़ना चाहते लेकिन वहां उनके लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। पाकिस्तानी सरकार से तो पाकिस्तानी हिन्दुओं-सिखों के मानव अधिकारों की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है किन्तु क्या पाकिस्तानी हिन्दुओं-सिखों के मानव अधिकारों की सुरक्षा की उम्मीद भारत सरकार से की जा सकती है ? । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-1160958682575466258?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/1160958682575466258/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=1160958682575466258&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1160958682575466258'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1160958682575466258'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/10/blog-post_19.html' title='पाकिस्तान में नहीं है सुरक्षित हिन्दू-सिख परिवारों के मानव अधिकार'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-4725677243835336505</id><published>2009-10-15T07:20:00.000-07:00</published><updated>2009-10-15T07:39:26.395-07:00</updated><title type='text'>हिरासत में मौत गंभीर मामला ! किन्तु आम बात</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;आज सुबह जब मै अखबार पढ़ रहा था तो अचानक मेरी नजर एक खबर पर पडी शीर्षक था " हिरासत में युवक की मौत से पुलिस संदेह के घेरे में" खबर को आगे पढ़ने पर पता चला कि मुंबई हाई कोर्ट के न्यायाधीश 'द्वय' जस्टिस बिलाल नाचकी एवं जस्टिस ए. आर. जोशी की डिविजन बेंच नें मंगलवार को याचिकाकर्ता मेहरूनिसा जो कि मृतक अल्ताफ की माँ है के याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पहली नजर में यह हिरासत में हत्या का मामला लगता है क्योंकि पोष्टमार्डम रिपोर्ट में यह बात कही गयी है कि मृतक अल्ताफ के पुरे शरीर पर गंभीर घाव थे पुलिस इस मामले की लीपापोती कर रही है । संभव है कि याचिकाकर्ता के प्रयास एवं मुंबई हाई कोर्ट की सक्रियता से अल्ताफ के हिरासत में मौत का मामला उजागर हो जाय यह भी संभव है कि मामला उजागर होने से पहले दबा दिया जाये और याचिकाकर्ता हाँथ मलते हुए अदालत से बाहर आ जाय क्योंकि न्यायपालिका, विधायिका आदि आज के भारतीय लोकतंत्र की तानाशाही के दिखाने के दाँत हैं, पुलिस, सेना और तरह-तरह के अर्द्धसैनिक बल ही उसके खाने के दाँत हैं। तमाम पुलिसिया दमन-उत्पीड़न के बावजूद सरकार दोषी पुलिसकर्मियों पर न तो कोई कार्रवाई करती है और न ही ब्रिटिशकालीन पुलिस सम्बन्‍धी कानूनों में संशोधन करती है। हिरासत में मौत अब आम बात हो गयी है देश भर में हर रोज पुलिस हिरासत या कानूनी हिरासत में औसतन चार लोगों की मौत हो रही है ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट ( टार्चर इन इंडिया ) खुलासा किया है कि १ अप्रैल २००१ से ३१ मार्च २००९ तक देश भर में कुल ११८४ लोगों की पुलिस हिरासत में मौत होने की सूचना राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को मिली इसमें उन लोगों की भारी संख्या है जिनकी मौत पुलिस हिरासत में की गई हिंसा ( मार-पीट) से हुई अधिकतर मौतें पुलिस हिरासत में लिये जाने के ४८ घण्टों के भीतर हुईं वर्ष २००७ में पुलिस हिरासत में ११८ लोगों की मौत हुई जबकि २००६ में यह संख्या ८९ थी। यानी कि एक साल में ३२.५ प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी के बरक्स रिपोर्ट बताती है कि २००७ में पुलिस हिरासत में हुई मौतों के ११८ मामलों में सिर्फ ६१ मामलों में मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच के आदेश दिये गये या जाँच की गयी। १२ मामलों में कानूनी जाँच हुई। ५७ मामलों में पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ मामले दर्ज किये गये और ३५ पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ चार्जशीट दाख़िल की गयी। ग़ौरतलब है कि वर्ष २००७ में हिरासत में हुई मौत के मामलों में एक भी पुलिसकर्मी को सज़ा नहीं हुई। ध्‍यान देने वाली बात यह भी है कि ये ऑंकड़े सिर्फ उन मामलों के हैं जिनकी सूचना सम्बन्धित राज्यों की पुलिस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी है। एसीएचआर की रिपोर्ट कई ऐसे मामलों का ज़िक्र करती है जिनमें हिरासत में हुई मौत की सूचना पुलिस ने मानवाधिकार आयोग को नहीं दी। इसके अलावा सेना, अर्द्धसैनिक बलों, सीमा सुरक्षा बल और अन्य सशस्त्र बलों की हिरासत मे होने वाली मौतों का ज़िक्र इस रिपोर्ट में नहीं है, क्योंकि ये बल केन्द्र सरकार के नियन्त्रण में हैं।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;इन सब के बीच मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाये गये राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्यों में राज्य मानवाधिकार आयोग के पास कोई ख़ास अधिकार ही नहीं होते। ये सिर्फ जवाब-तलब कर सकते हैं और सूचनाएँ इकट्ठा कर सकते हैं। सरकारी अधिकारी बहुत बाध्‍य हो जाने पर ही और काफी टालमटोल के बाद इनकी बात मानते हैं। इन आयोगों की शिकायतें और संस्तुतियाँ कार्रवाई के इन्तज़ार में पड़ी धूल फाँकती रहती हैं। हिरासत में मौत होने के ज्यादातर मामलों में पीड़ित के स्वास्थ्य सम्बन्‍धी रिपोर्टों और मौजूदा साक्ष्यों के बजाय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग पुलिस के बयान को तरजीह देता है। यही कारण है कि वर्ष २००७ में हिरासत में हुई मौतों के सिलसिले में एक भी पुलिसकर्मी को सज़ा नहीं हो पायी। अन्य सरकारी विभागों की तरह ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी आम जनता को जितनी राहत देता है, उससे कहीं अधिक का भ्रम बनाये रखता है। मानवाधिकारों का खुलेआम और बड़े पैमाने पर हनन के विरोध में मीडिया और सभ्य समाज में किसी सार्थक पहल का पूरी तरह अभाव है। ऐसे &lt;span class=""&gt;में मानव अधिकारों के संरक्षण हेतु कार्य कर रहे देश के तमाम बुद्धिजीवियों एवं मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी निश्चित रूप से बढ़ गयी है ।&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-4725677243835336505?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/4725677243835336505/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=4725677243835336505&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4725677243835336505'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/4725677243835336505'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='हिरासत में मौत गंभीर मामला ! किन्तु आम बात'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-3024968798258743383</id><published>2009-09-11T08:26:00.000-07:00</published><updated>2009-09-12T07:50:58.409-07:00</updated><title type='text'>मानव अधिकार विचारधारा की उत्पत्ति एवं विकास में भारतीय योगदान</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;मानव अधिकार विचारधारा के विकास का क्रम भारत में आज से लगभग ९००० वर्ष (७३२३ ईसा पूर्व) पहले शुरू हुआ माना जाता है भारत के राज्य अयोध्या, प्राचीन काल में इसे कौशल देश कहा जाता था, के राजा रामचंद्र नें रावण और अन्य आततायी राजाओं का संहार कर रामराज्य की स्थापना की एवं द्वारका जोकि भारत के पश्चिम में समुद्र के किनारे पर बसी है, हजारों वर्ष पूर्व श्री कॄष्ण ने इसे बसाया था कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर उन्होने द्वारका में ही बैठकर सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। कंस शिशुपाल और दुर्योधन जैसे आततायी अधर्मी राजाओं को नष्ट कर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की एवं नागरिकों के अधिकार उन्हें दिलाया । भगवान महावीर ( ५९९ ईसा पूर्व से २२७ ईसा पूर्व ) एवं भगवान बुद्ध ५६३ ईसा पूर्व के कालखंड में अधिकारों के अवधारणा की रचना की जिसमें सत्य, अहिंसा और समता मुख्य &lt;span class=""&gt;थे ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;इसी तरह यूनान में ( ४६९ से ३९९ ईसा पूर्व ) विख्यात दार्शनिक सुकरात का नाम आता है । सुकरात  नें अपने अनुयाइयों को आत्मानुसंधान के बारे में तथा सत्य न्याय एवं इमानदारी का अवलंबन करने के बारे में बताया । हालाँकि तत्कालीन यूनानी शासकों नें सुकरात के उपदेशों पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रयास &lt;span class=""&gt;किया पर &lt;/span&gt; सफल न होने पर उन्होंने सुकरात को विषपान कर अपनी इहलीला समाप्त करने का आदेश दिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस प्रबल पैरोकार नें विषपान कर अपनी इहलीला तो समाप्त कर ली किन्तु अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को आंच नहीं पहुचने दी इसके बाद सुकरात का शिष्य प्लेटो (४२८ ईसा पूर्व से ४२७ ईसा पूर्व ) प्लेटो का शिष्य अरस्तु (३८४ ईसा पूर्व से ३२२ ईसा पूर्व ) इन महान यूनानी दार्शनिकों नें तमाम मानवीय अधिकारों की व्याख्या की ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;इधर भारत में आगे चलकर सम्राट अशोक नें भगवान बुद्ध और भगवान महावीर के (धार्मिक) अवधारणाओं को लेकर उसे राजनीतिक रूप दिया और यह सब सम्राट अशोक नें कलिंग की लडाई के पश्चात् उसमे हुए नरसंहार से दुखी होकर मानव गरिमा को अच्छुण बनाये रखने के प्रयास के तहत किया । सम्राट अशोक का कार्यकाल ईसा पूर्व २७३ से २३२ तक बताया जाता है इसके पश्चात् मानवीय अधिकारों को केंद्रविन्दु मानकर विश्व में तमाम क्रांतियाँ हुई जिसमें १२१५ ईसवी में मैग्नाकार्टा, १७९१ अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स, तथा मानव अधिकारों को व्यापक गरिमा फ्रांसीसी क्रांति (१७८९ ) के पश्चात प्राप्त हुई । अमेरिका में जाँ जैक के संविदा सिद्धांत से प्रेरित क्रांति के समय संविधान सभा नें यह घोषणा की थी कि अमेरिकी संविधान निर्मित होने पर सबसे पहले मानव अधिकारों का उल्लेख किया जाएगा यह घोषणा वास्तव में जार्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वतंत्रता की घोषणा ( सन १७७८ ई०) के सिद्धांतों से प्रेरित थी ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;इसमें कोई दो राय नही कि भारत के आजादी की लडाई मानवीय अधिकारों के मूल्यों पर लड़ी गई । महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता के रूप में उभरे वे सत्याग्रह, अत्याचार के प्रतिकार एवं अहिंसा ( उन्होंने ये सभी अवधारणाए महावीर और बुद्ध के (धार्मिक) अवधारणाओं से उठाया ) और इसी का आजादी की लडाई में हथियार के रूप में इस्तेमाल किया तत्कालीन भारतीयों के दिलों-दिमाग पर छा गये सत्याग्रह, अत्याचार के प्रतिकार एवं अहिंसा रूपी हथियार इतनें कारगर साबित हुए कि आज भी समूची दुनिया महात्मा गांधी के इस प्रयोग का लोहा मानती है । देश के आजाद होनें के पश्चात सम्राट अशोक से प्रभावित हमारे तत्कालीन नेतागण भारतीय संविधान में भगवान बुद्ध और भगवान महावीर एवं सम्राट अशोक के अवधारणाओं को मौलिक अधिकारों के रूप में शामिल  किया इतना ही नहीं हमारे देश के तत्कालीन नेतागण दो कदम और आगे जाकर अशोक चक्र को राष्ट्रीय  चिन्ह एवं अशोक स्तम्भ को राष्ट्रीय  मुद्रा चिन्ह के रूप में स्वीकृत किया ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;जानकारों के मुताबिक तमाम देशों के संविधान में भगवान बुद्ध और भगवान महावीर एवं सम्राट अशोक के अवधारणाओं एवं मूल्यों को शामिल किया गया है । इतना ही नहीं हर विषय पर पश्चिमी देशों की तरफ देखने वालों और तमाम मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को शायद  ही यह पता हो कि संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना २४ अक्टूबर १९४५ को हुई थी उसका मूल भगवान बुद्ध और भगवान महावीर एवं सम्राट अशोक की  अवधारणाए एवं मूल्य ही है । जब हम मानवीय अधिकारों के अवधारणा के विकास का गहराई से अध्ययन करते है  तब हमें मानव अधिकारों के विकास में प्राचीन भारत के राजा रामचंद्र, राजा कृष्ण, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर एवं सम्राट अशोक से लेकर महात्मा गांधी के योगदान की अद्वितीय गाथा का पता चलता है किन्तु शायद इस बात से अनजान या जानते हुए कि पुरी दुनिया भारतीय महापुरुषों द्वारा निर्मित मानवीय अधिकारों के अवधारणाओं एवं मूल्यों को स्वीकार्य एवं अंगीकृत किया है । भारत सरकार नें संयुक्त राष्ट्रसंघ के दबाव में आकर मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम १९९३ तो संसद में किसी तरह पास कर दिया किन्तु सरकार मानव अधिकारों की गरिमा को अच्छुण बनाये रखने के प्रति कितनी उदासीन है, दिखाई देता है ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-3024968798258743383?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/3024968798258743383/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=3024968798258743383&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3024968798258743383'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/3024968798258743383'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/09/blog-post_11.html' title='मानव अधिकार विचारधारा की उत्पत्ति एवं विकास में भारतीय योगदान'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-753052259267111387</id><published>2009-09-07T06:43:00.000-07:00</published><updated>2009-09-13T00:45:26.817-07:00</updated><title type='text'>मानव अधिकार आयोगों द्वारा किये जा रहे मानव अधिकारों के हनन का कड़वा सच</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUXn1fRYlI/AAAAAAAAAHs/CoCzOg9VTAw/s1600-h/Picture+002.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378731303104504402" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 290px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUXn1fRYlI/AAAAAAAAAHs/CoCzOg9VTAw/s400/Picture+002.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUWAuhATkI/AAAAAAAAAHk/d9rDjfHt4X4/s1600-h/Picture+003.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378729531706199618" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 290px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUWAuhATkI/AAAAAAAAAHk/d9rDjfHt4X4/s400/Picture+003.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUQnpcNVqI/AAAAAAAAAHc/AbbyRjvy4rM/s1600-h/Picture+004.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378723603289036450" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 290px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUQnpcNVqI/AAAAAAAAAHc/AbbyRjvy4rM/s400/Picture+004.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; भारत सरकार नें वर्ष १९९३ में अंतर्राष्ट्रीय एवं संयुक्तराष्ट्र संघ के निर्देशों को ध्यान में रख कर मानव अधिकार सुरक्षा अधिनियम १९९३ पारित किया इस अधिनियम के उद्देश्य कितने मानवीय थे या कितने तकनीकी यह अलग बहस का विषय है । बहरहाल अधिनियम को संसद से पारित करने के पश्चात राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया । उस समय भी तमाम वरिष्ठ मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की तरफ से सरकार द्वारा पारित किये गये अधिनियम के नियम व उपनियम तथा आयोगों में नियुक्तियों को लेकर तरह-तरह के सवाल खडे किये गये किन्तु इसके पश्चात भी मानव अधिकार कार्यकताओं को यह लगा कि कम से कम सरकार नें अधिनियम तो पारित किया ! आयोग तो बनाया ! । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;div align="justify"&gt;इन आयोगों को मानव अधिकार कार्यकर्ताओं नें मानव अधिकार हनन के शिकायतों के निपटारे के लिए बनाये गये एक फोरम के रूप में देखा और राज्य स्तरीय मानव अधिकार आयोगों के गठन हेतु अपने आंदोलनों को सक्रिय बनाये रखा परिणाम स्वरूप देश के तमाम राज्यों में मानव अधिकार आयोगों का गठन हो गया जिसमें आंध्रप्रदेश, आसाम, हिमांचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, केरल, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, उडीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, गुजरात, एवं बिहार आदि का समावेश है । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;खेद जनक बात यह है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सहित तमाम राज्य मानव अधिकार आयोग विषय पर कार्यरत मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, सिविल सोसायटियों, संस्थाओं को समय-समय पर पीड़ित प्रताडित करने से बाज नहीं आते इनका मकसद मानव अधिकार हनन के मामलों पर नजर रखने तथा उसे रोकने के बजाय मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, सिविल सोसायटियों, संस्थाओं, को नष्ट करना हो गया है जोकि काफी गंभीर बात है दरअसल जिस दिन इन आयोगों की कमान नौकरशाहों के हाँथ में दी गयी उसी दिन यह तय हो गया कि आने वाले दिनों में ये आयोग ही मानव अधिकार आंदोलनों को कुचलने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे इस समय वे स्थितियां बनती नजर आ रहीं है । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;मानव अधिकार आंदोलनों, संगठनों, संस्थाओं, को कुचलने के पीछे सरकारों की मंसा को जानने के लिए हमें यह समझना पडेगा कि इन आंदोलनों से सरकारों एवं सत्ताधारियों के किन हितों पर चोट पहुँचती है ! मसलन सरकारों एवं उसमें बैठे नौकरशाहों की जनविरोधी नीतियों का विरोध एवं उसका खुलासा करने, भ्रष्टाचार के मामले उजागर करने, नौकरशाहों के मनमानियों को रोकने का प्रयत्न करने, हिरासत में मौतों, फर्जी मुठभेडों, एवं पुलिस के अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने, जैसे मामले शामिल है इतना ही नही मानव अधिकार संगठनों की आयोगों के क्रिया कलापों के सम्बन्ध में उंगली उठाने से भी आयोगों में बैठाये गये नौकरशाह एवं पुलिस अधिकारी चिढ़ कर मानव अधिकार आंदोलनों को कुचलने की साजिशें रच रहें है । &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;अब जरूरत इस बात की है कि मानव अधिकार एवं तमाम जनआंदोलनों से जुड़े हुए कार्यकर्ता एक मंच पर आयें और मानव अधिकार आयोगों एवं सरकारों द्वारा संगठनों एवं संस्थाओं को कुचलने के कुचक्र का कड़ाई से मुकाबला करें । क्योंकि इन निरंकुश पुलिस अधिकारियों एवं नौकरशाहों को अंकुश संतुलन की परिधि में बनाये रखने की जिम्मेदारी अंततः मानव अधिकार कार्यकर्ताओं पर ही &lt;span class=""&gt;है ।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-753052259267111387?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/753052259267111387/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=753052259267111387&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/753052259267111387'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/753052259267111387'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='मानव अधिकार आयोगों द्वारा किये जा रहे मानव अधिकारों के हनन का कड़वा सच'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_WHwspsViQgA/SqUXn1fRYlI/AAAAAAAAAHs/CoCzOg9VTAw/s72-c/Picture+002.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-1392200485470830661</id><published>2009-08-31T04:33:00.000-07:00</published><updated>2009-08-31T09:35:44.045-07:00</updated><title type='text'>जरूरी है भोजन के अधिकारों (राइट टू फ़ूड) को कानूनी संरक्षण</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;डा. मनमोहन सिंह नें शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि जन वितरण प्रणाली के लिए देश के पास पर्याप्त खाद्यान भंडार है देश में कोई भूखा पेट न रहे इसकी जिम्मेदारी मौजूदा सरकार के माध्यम से अपने ऊपर ली । सूखे के चलते देश के ऊपर मंडरा रहे अकाल और भूखमरी के खतरे और अपने पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को ध्यान में रख कर उन्होंने यह बयान दिया । भूखमरी और कुपोषण गरीबी और अभाव देश के लगभग ३५ करोड़ लोगों को प्रभावित किये हुए है ऐसा नहीं कि हमारे प्रधानमंत्री को इस विषय की जानकारी नहीं है उपरोक्त ३५ करोड़ लोग जोकि भूखमरी और कुपोषण के लिए अभिशप्त है अभी तक इनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही क्यों नहीं तय की गयी । पहले से मौजूद इन आंकडों पर जब हम नजर डालते है कि भारत के करीब २० करोड़ लोग रात को खाली पेट सोने को मजबूर है (संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट) क्या प्रधानमंत्री महोदय नें इनके भोजन की व्यवस्था कर दी है ? &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;पिछले दिनों राष्ट्रपति ने यह घोषणा की कि भोजन का अधिकार कानून बनाना नयी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है इसके तत्काल बाद खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्रालय ने एक प्रस्ताव जारी किया जिसमें इस प्रस्तावित कानून के तहत सरकार की भूमिका महीने में सिर्फ़ २५ किलोग्राम चावल और गेहं तीन रुपये प्रति किलो की दर से आपूर्ति करने तक सीमित रखने की कोशिश की गयी । वह भी आबादी के एक छोटे से तबके के लिए जिन्हें सरकार गरीब मानती हो दबी जुबान यहां तक कहा गया कि इससे सरकारी खजाने पर काफ़ी बोझ पड़ेगा लेकिन इसके कुछ समय पहले यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस संदर्भ में शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया था जो कहीं ज्यादा व्यापक तरीके से भूखे लोगों को समुचित भोजन का भरोसा दिलाये उन्होंने कहा था कि इसके मसौदे में ऐसे लोगों का खास तौर पर ध्यान रखा जाये जो गंभीर रूप से भोजन के अभाव से ग्रस्त हैं जैसे कि अकेली महिला, अपंग या वृद्ध व्यक्ति, सड़कों पर पलनेवाले बच्चे, बंधुआ मजदूर, खेतिहर मजदूर और कचरा बीननेवाले लोगों समेत शहरी बेघर लोग ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;उनकी इस पहल पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुला द सिल्वा के शब्दों की झलक थी जब उनके देश ने इसी तरह से एक खाद्य गारंटी योजना हंगर जीरो लांच की थी। लुला ने विश्वास जताते हए कहा था- हम अपने देश के लोगों के लिए यह संभव कर देंगे कि उन्हें रोज तीन वक्त खाने को मिले जिसके लिए किसी को हाथ न फ़ैलाना पड़े ब्राजील इस तरह की विषमता के साथ और आगे नहीं जा सकता हमें भूख, गरीबी और सामाजिक विषमता पर काबू पाना होगा । हमारी जंग किसी को मारने के लिए नहीं है यह जिंदगी बचाने के लिए है । ब्राजील की खाद्य सुरक्षा नीति का उपशीर्षक भी उतना ही जबरदस्त है -ऐसे ब्राजीली नागरिक, जिन्हें भोजन नसीब होता है वे उनकी मदद करें जिनके पास भोजन नहीं है । यदि भारत को फ़िर से इतिहास लिखना है तो उसे ऐसी नैतिक और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के आधार पर ही भोजन का अधिकार कानून बनाना होगा ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;सवाल सिर्फ पेट भरने का ही नहीं है, सवाल समुचित पोषक तत्वों के शरीर में पहुंचने का भी है, ताकि शरीर इतना स्वस्थ बने कि व्यक्ति रोटी कमाने के लायक बन सके। अपेक्षित क़ानून में इस बात की गारंटी होनी चाहिये कि न केवल सबको पर्याप्त भोजन मिलेगा, बल्कि सबको पर्याप्त भोजन अर्जित करने का अवसर भी उपलब्ध कराया जायेगा। इस दृष्टि से देखें तो यह अधिकार व्यापक सन्दर्भों वाला बन जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ बरसों से भूख की समस्या से जूझने का संकल्प दुहराता रहा है और इसे मूल मानवीय अधिकारों का हिस्सा बताता रहा है। आज भी भूख एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है लेकिन इतना कह देने से बात बनती नहीं। हर देश को अपने स्तर पर इस समस्या से जूझना है। कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में इस आशय की बात कही थी। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;देश में कुपोषण और भुखमरी की भयावह स्थिति तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भ्रष्टाचार एवं लापरवाही को देखते हुए २००१ में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पी.यू.सी.एल.), राजस्थान ने भोजन के अधिकार को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित चायिका दायर की। यह याचिका उस समय दायर की गई, जब एक ओर देश के सरकारी गोदामों में अनाज का भरपूर भंडार था, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति एवं भूख से मौत के मामले सामने आ रहे थे। इस केस को भोजन के अधिकार केस के नाम से जाना जाता है। भोजन के अधिकार को न्यायिक अधिकार बनाने के लिए विभिन्न संस्थाएं, संगठन लगातार संघर्ष कर रही है। पी.यू.सी.एल. द्वारा दायर की गयी इस याचिका  का आधार संविधान का अनुच्छेद २१ है जो व्यक्ति को जीने का अधिकार देता है। जीने का अर्थ गरिमापूर्ण जीवन से है और यह भूख और कुपोषण से जूझ रहे व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। यह एक मौलिक अधिकार है। सरकार का दायित्व है इसकी रक्षा करना। सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार जीने के अधिकार को परिभाषित किया है, इसमें इज्जत से जीवन जीने का अधिकार और रोटी के अधिकार आदि शामिल हैं।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;जब हम जीने के अधिकार की बात करते हैं, तो प्रकारांतर से वैयक्तिक और सामाजिक सुरक्षा को ही रेखांकित करते हैं। भोजन का अधिकार देने का मतलब सबको सस्ती दरों पर कुछ अनाज मुहैया करा देना ही नहीं, इसका अर्थ बेहतर जिंदगी की गारंटी देना है। सब स्वस्थ हों, शिक्षित हों, जीविका उपार्जन में समर्थ हों, इसके लिए उन स्थितियों का निर्माण ज़रूरी है, जिनमें यह सब संभव हो सकता है। भोजन का अधिकार देना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम होगा। ऐसे क़दम की सार्थकता ब्राजील प्रमाणित कर चुका है। अब देखना यह है कि हमारी सरकार चला रहे नेतागण अपने चुनावी घोषणापत्र में किये गये (राइट टू फ़ूड) भोजन के अधिकार विषय पर वायदे का विधेयक लाने और उसे लोकसभा में पास कराने जैसी नैतिक जिम्मेदारी कितनी जल्दी पूरा करते है ।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-1392200485470830661?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/1392200485470830661/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=1392200485470830661&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1392200485470830661'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1392200485470830661'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/08/blog-post_31.html' title='जरूरी है भोजन के अधिकारों (राइट टू फ़ूड) को कानूनी संरक्षण'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7928935037960169751.post-1024842966602183827</id><published>2009-08-27T05:07:00.000-07:00</published><updated>2009-08-29T10:32:14.327-07:00</updated><title type='text'>अदालतों में लंबित मामलों से हो रहा है मानव अधिकारों का हनन</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;पिछले दिनों प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह नई दिल्ली में राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के एक संयुक्त सम्मेलन  संबोधित करते हुए बताया कि कानून और न्याय मंत्रालय न्यायिक सुधारों के बारे में एक रूप रेखा तैयार कर रहा है उन्होंने न्यायपालिका से ३००० खाली पदों को तत्काल भरने को कहा उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का ऐसा देश है जहां सबसे अधिक संख्या में मामलों पर निर्णय होना बाकी है। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों में बीस से पच्चीस फीसदी तक न्यायिक पद खाली पड़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की क्षमता का विकास करने के लिए राज्यों की न्यायिक अकादमियों को सुदृढ़ करने की जरूरत है।बहुत जल्द नई दिल्ली में न्यायवादियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की जाएगी। इससे एक सीमा और पुनर्गठन तैयार हो जाएगा। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;भारत के मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने न्यायिक अधिकारियों की बहुत अधिक कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से विचाराधीन मामलों की बढ़ती हुए संख्या से निपटने के प्रयासों में बाधा पहुंच रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ढ़ांचागत अड़चनों के कारण कानून के प्रतिभाशाली स्नातक न्यायिक सेवाओं में शामिल नहीं हो पाते और अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों के सत्रह प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं। इस सम्मेलन का लब्बोलुआब यह रहा कि प्रधानमंत्री नें न्यायपालिका को रिक्त न्यायिक पदों को भरने को कह कर गेंद न्यायपालिका के पाले में डाल दिया तो भारत के मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने ढ़ांचागत अड़चनों का हवाला देते हुए गेंद को पुनः सरकार की तरफ उछाल दिया ।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;यह बात भारत सरकार के मुखिया डा. मनमोहन और न्यायपालिका के शीर्ष पुरुष के जी बालाकृष्णन दोनों को पता है कि भारत की अदालतों में लंबित मामलों नें उसकी न्यायिक प्रक्रिया के सही इस्तेमाल को लेकर सवालिया निशान खड़े किए हैं ? देश का एक प्रबुद्ध नागरिक तब अपना माथा ठोक लेता है जब उसे पता चलता है कि भारतीय अदालतों में न्याय की आस लिए करोडों मामले अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे है । गौरतलब है कि देश भर के उच्च न्यायालयों में ३१ दिसंबर २००८ तक ३९,१४,६६९ मामले लंबित थे। जबकि ३१ मार्च २००९ तक उच्चतम न्यायालय में ५०१६३ मामले लंबित थे। देश भर की निचली अदालतों में वर्ष २००८ के अंत तक लंबित मामलों की संख्या २,६४,०९०११ &lt;span class=""&gt;थी जिसमें&lt;/span&gt; १,८८,६९,१६३ मामले क्रिमिनल, और ७५,३९,८४८ मामले सिविल से संबंधित हैं। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने देश की अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों &lt;span class=""&gt;के विषय पर &lt;/span&gt;चिंता जाहिर करते हुए जल्द निस्तारण के लिए कानूनों में बदलाव की वकालत की है। महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी के उद्घाटन समारोह के मौके पर राष्ट्रपति ने यहां कहा कि न्यायालयों के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या लंबित मुकदमों की है। मुकदमों पर निर्णय आने में काफी वक्त लगता है, तब तक मुकदमे से जुडे लोग सामान्य जीवन नहीं जी पाते। उन्होंने कहा, 'ऐसे लोगों की समस्या का समाधान खोजने की जरूरत है, जो लंबे समय से न्याय पाने का इंतजार कर रहे हैं।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;पॉँच वर्ष, दस वर्ष या पंद्रह वर्ष तक एक मुकद्दमें का जारी रहना तो आम बात है कई कई मामले के निपटारे में तो ३५ से ४० वर्ष तक लग जाते है इसलिए भारत की कुछ जेलों में यह हाल है कि वहां तिल धरने की जगह नहीं है मध्य-प्रदेश के कुछ कारावासों में तो बंदी बारी बारी सोते हैं, यानि सबके लेटने तक की जगह नहीं है लंबित मुकद्दमों की अंतिम सुनवाई एवं न्याय की आस लिए मर रहे एवं मानसिक संतुलन खो रहे लोगो की जवाबदेही किस पर है ? सरकार और न्यायपालिका दोनों की तरफ से जजों की कमी का रोना रोया जाता है । मुकद्दमें के निपटारे के देरी के लिए चाहे सरकार जिम्मेदार हो या न्यायपालिका किन्तु यह आम आदमी के ही "मानव अधिकारों का हनन" है । &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7928935037960169751-1024842966602183827?l=humanrightsarticle.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/feeds/1024842966602183827/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7928935037960169751&amp;postID=1024842966602183827&amp;isPopup=true' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1024842966602183827'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7928935037960169751/posts/default/1024842966602183827'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://humanrightsarticle.blogspot.com/2009/08/blog-post_27.html' title='अदालतों में लंबित मामलों से हो रहा है मानव अधिकारों का हनन'/><author><name>Rajesh R. Singh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17464328889363232422</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://bp1.blogger.com/_WHwspsViQgA/R1EiPdKhiXI/AAAAAAAAAB4/P1TDQxt36XU/S220/Rajesh+Singh.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999
